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Kashmir Target Killing: आतंकियों ने नाम पूछकर मारी गोली, टीआरएफ ने ली जिम्मेदारी; 10 दिन में दूसरी बड़ी घटना
Sat, 01 Aug 2026 02:08 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमृतपाल सिंह बाली, श्रीनगर
अमृतपाल सिंह बाली, श्रीनगर
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sat, 01 Aug 2026 02:08 AM IST
सार
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार घटना की जिम्मेदारी लश्कर-ए-ताइबा (एलईटी) के शैडो संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) ने ली है।
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- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
दक्षिण कश्मीर के कुलगाम जिले में शुक्रवार देर शाम आतंकियों ने एक बार फिर अपनी पुरानी टारगेट किलिंग वाली मोडस ऑपरेंडी अपनाते हुए निर्दोष प्रवासी मजदूरों को निशाना बनाया। यह कायरतापूर्ण हमला कुलगाम के केल्लम इलाके में स्थित ईंट भट्ठा 77बी के पास हुआ, जहां काम कर रहे मजदूरों पर आतंकियों ने अंधाधुंध गोलीबारी की। इस हमले में छत्तीसगढ़ निवासी 24 वर्षीय दीपक रात्रे की मौके पर मौत हो गई, जबकि 28 वर्षीय भूपेंद्र गंभीर रूप से घायल हो गए।
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सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार घटना की जिम्मेदारी लश्कर-ए-ताइबा (एलईटी) के शैडो संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) ने ली है। सूत्रों के अनुसार मजदूरों को गोली मारने से पहले उनके इनके नाम भी पूछे गए। घाटी में महज 10 दिनों के भीतर टारगेट किलिंग की यह दूसरी बड़ी घटना है, जिसने सुरक्षाबलों के सामने एक बार फिर नया ट्रेंड और गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है। इससे पहले 22 जुलाई 2026 को अनंतनाग के व्यस्त लाल चौक बाजार में आतंकियों ने हेड कांस्टेबल आशिक हुसैन कुरैशी को निशाना बनाया था, जिसमें वे बलिदान हो गए थे। उस हमले की भी जिम्मेदारी टीआरएफ ने ली थी।
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इससे पहले 2024 में 7 फरवरी को श्रीनगर के शहीद गंज इलाके में पंजाब के दो मजदूरों अमृतपाल सिंह और रोहित मसीह की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। ताज़ा हमले के बाद प्रशासन ने प्रवासी मजदूरों के क्षेत्रों में सुरक्षा बढ़ा दी है। सुरक्षाबलों के अनुसार आतंकियों की इस बदलती रणनीति और नए ट्रेंड को देखते हुए सुरक्षा रणनीति को नए सिरे से तैयार किया जाएगा, ताकि आम नागरिकों की सुरक्षा पुख्ता की जा सके ।
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कुछ दिन पहले अनंतनाग में भी हुआ था आतंकी हमला
दक्षिण कश्मीर में गैर-स्थानीय नागरिकों और सुरक्षाबलों को निशाना बनाने की यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी अनंतनाग जिले में एक बड़ा आतंकवादी हमला देखने को मिला था। अनंतनाग में सबसे हालिया आतंकवादी हमला 22 जुलाई 2026 को दोपहर करीब 12:30 बजे हुआ था, जिसने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया था।
वह हमला दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग शहर के व्यस्त और मुख्य बाजार लाल चौक पर हुआ था। उस हमले में अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा में तैनात जम्मू-कश्मीर पुलिस के बहादुर हेड कॉन्स्टेबल आशिक हुसैन कुरैशी निशाना बने थे और देश की रक्षा करते हुए बलिदान हो गए थे। बाद में कुख्यात आतंकी संगठन लश्कर-ए-ताइबा से जुड़े शैडो ग्रुप द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) ने अनंतनाग में हुए उस हमले की जिम्मेदारी ली थी।
हमले के बाद सुरक्षा बलों को कार्रवाई तेज करने के निर्देश
आतंकी हमले के बाद उपराज्यपाल ने डीजीपी श्री नलिन प्रभात और शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों से बातचीत कर हालात की जानकारी ली। उन्होंने छत्तीसगढ़ के एक मजदूर की मौत पर गहरा दुख जताते हुए इस हमले की कड़ी निंदा की।
उपराज्यपाल ने सुरक्षा बलों को आतंकियों के खिलाफ अभियान तेज करने और हमले में शामिल आतंकियों को खत्म करने के निर्देश दिए हैं। जम्मू-कश्मीर पुलिस और सुरक्षा बलों ने इलाके की घेराबंदी कर हमलावरों को पकड़ने के लिए ऑपरेशन शुरू कर दिया है।
हमले में घायल छत्तीसगढ़ के एक अन्य मजदूर को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया है। उपराज्यपाल ने मृतक मजदूर के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की और घायल के जल्द स्वस्थ होने की कामना की। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर प्रशासन और पूरा देश पीड़ित परिवारों के साथ खड़ा है। सुरक्षा एजेंसियां हमले के जिम्मेदार आतंकियों की तलाश में लगातार अभियान चला रही हैं।