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Leh: लेह एयरपोर्ट जुलाई तक बनेगा देश का पहला भू-तापीय और सौर ऊर्जा संचालित हवाई अड्डा, खास प्रणाली से होगा लैस

अमर उजाला नेटवर्क, लेह Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sun, 11 Jan 2026 01:02 AM IST
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सार

640 करोड़ रुपये की इस परियोजना के साथ चार नए विमान पार्किंग वे के लिए अतिरिक्त 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

Leh Airport will become the country's first geothermal and solar powered airport by July.
निर्माणाधीन लेह हवाई अड्डा जुलाई 2026 तक पूरा होने की उम्मीद... - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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लेह के कुशोक बकुला रिनपोछे हवाई हवाई अड्डे का बड़े पैमाने पर नवीनीकरण किया जा रहा है। इससे यह भारत का पहला हवाई अड्डा बन जाएगा जो भूतापीय और सौर ऊर्जा दोनों का उपयोग करेगा। नए घरेलू टर्मिनल के जुलाई तक खुलने की उम्मीद है। 640 करोड़ रुपये की इस परियोजना के साथ चार नए विमान पार्किंग वे के लिए अतिरिक्त 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। यह सतत विमानन की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है।

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एयरपोर्ट निदेशक एवं महाप्रबंधक ए. उमाशंकर के अनुसार निर्माण अंतिम चरण में है। यह टर्मिनल भारत की सबसे बड़ी भू-तापीय हीटिंग और कूलिंग प्रणाली से लैस होगा। यह प्रणाली हीटिंग, कूलिंग और गर्म पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करेगी। इससे पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता में उल्लेखनीय कमी आएगी।11,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित यह हवाई अड्डा भारत का सबसे ऊंचाई पर स्थित एयरपोर्ट बताया जा रहा है।
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इस परियोजना की शुरुआत वर्ष 2019 में हुई थी लेकिन लद्दाख की कठोर जलवायु के कारण साल में केवल छह महीनों तक ही निर्माण कार्य संभव हो सका। अब तक लगभग 80 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है जबकि शेष एयरसाइड कार्यों के अगले वर्ष के अंत तक पूर्ण होने की उम्मीद है।

18,000 वर्ग मीटर में फैला यह टर्मिनल एक समय में 2,000 यात्रियों (1,000 आगमन और 1,000 प्रस्थान) को संभालने में सक्षम होगा। टर्मिनल का डिजाइन ढलानदार पहाड़ी रूप में तैयार किया गया है जो लद्दाख की संस्कृति को दर्शाता है। निर्माण में स्थानीय सामग्रियों का उपयोग किया गया है और इसमें स्थानीय कारीगरों का सहयोग भी लिया गया है। यह पर्यावरण-अनुकूल टर्मिनल उत्सर्जन को कम करेगा और उत्तरी भारत के प्रमुख पर्यटन और रणनीतिक स्थल लद्दाख के लिए हवाई यात्रा को बेहतर बनाएगा।

कनेक्टिविटी और यात्रा में होगी वृद्धि
परियोजना के पूरा होने के बाद विमान पार्किंग वे की संख्या दो से बढ़कर छह हो जाएगी। इससे प्रतिदिन अधिकतम 54 उड़ानों का संचालन संभव होगा। वर्तमान में गर्मियों में 18 और सर्दियों में आठ उड़ानों का संचालन किया जाता है। इस परियोजना का शिलान्यास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था और इसके पूर्ण होने पर उनकी ओर से उद्घाटन की भी संभावना जताई जा रही है। बेहतर सुविधाओं और बढ़ी हुई उड़ान सेवाओं से पर्यटकों, रक्षा कर्मियों और स्थानीय यात्रियों के लिए कनेक्टिविटी में सुधार होगा।

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