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मनुष्य जीवन अनमोल, इसे व्यर्थ न गवाएं : ज्योत्सना
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ठंगर बेरी पट्टन में तीन दिवसीय श्री हरि कथा में साध्वी ने बांटा ज्ञान
संवाद न्यूज एजेंसी
नाैशेरा। दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के तत्वावधान में ठंगर बेरी पट्टन में तीन दिवसीय श्री हरि कथा करवाई जा रही है। शनिवार को दूसरे दिन साध्वी ज्योत्सना भारती ने श्रद्धालुओं को प्रभु चरणों से जोड़ा। उन्होंने कहा कि मनुष्य जीवन अनमोल है। इसे व्यर्थ नहीं गवाना चाहिए।
आज इंसान के जीवन में अनेक प्रकार की चिंताएं हैं। इनसे वह उभर नहीं पाता और जीवन लीला समाप्त करने के लिए तत्पर रहता है। जिस मानव तन को सृष्टि का सिरमौर कहा गया है वह देवी-देवताओं के लिए भी दुर्लभ है। उस मानव तन को इंसान यूं ही समाप्त करने के लिए तत्पर है। आशावादी न होकर निराशावादी बनता जा रहा है। नकारात्मक विचारों को अपने जीवन पर हावी रखता है। नकारात्मक विचारों के विकसित होने पर मानव अपनी वास्तविक शक्ति से परिचित नहीं होता और उसका जीवन निराशा की खाई में गिरा रहता है। वह अपने जीवन के वास्तविक लक्ष्य से परिचित नहीं हो पाता। साध्वी ने कहा कि हमें अपने जीवन में एक पूर्ण श्रोत्रिय ब्रह्मनिष्ठ गुरु की जरूरत है जिससे ब्रह्मज्ञान प्राप्त कर मानव अपनी सुप्त शक्ति को पहचान कर जीवन को निराशा से आशा में बदलकर जीवन सफल बना सकता है। कार्यक्रम में भंडारे की व्यवस्था गई। श्री आरती के साथ कथा को विराम दिया गया। विशेष तौर पर स्वामी हरिदासानंद, स्वामी सुचेतानंद, महात्मा गुरप्रीत आदि उपस्थित रहे।
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नाैशेरा। दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के तत्वावधान में ठंगर बेरी पट्टन में तीन दिवसीय श्री हरि कथा करवाई जा रही है। शनिवार को दूसरे दिन साध्वी ज्योत्सना भारती ने श्रद्धालुओं को प्रभु चरणों से जोड़ा। उन्होंने कहा कि मनुष्य जीवन अनमोल है। इसे व्यर्थ नहीं गवाना चाहिए।
आज इंसान के जीवन में अनेक प्रकार की चिंताएं हैं। इनसे वह उभर नहीं पाता और जीवन लीला समाप्त करने के लिए तत्पर रहता है। जिस मानव तन को सृष्टि का सिरमौर कहा गया है वह देवी-देवताओं के लिए भी दुर्लभ है। उस मानव तन को इंसान यूं ही समाप्त करने के लिए तत्पर है। आशावादी न होकर निराशावादी बनता जा रहा है। नकारात्मक विचारों को अपने जीवन पर हावी रखता है। नकारात्मक विचारों के विकसित होने पर मानव अपनी वास्तविक शक्ति से परिचित नहीं होता और उसका जीवन निराशा की खाई में गिरा रहता है। वह अपने जीवन के वास्तविक लक्ष्य से परिचित नहीं हो पाता। साध्वी ने कहा कि हमें अपने जीवन में एक पूर्ण श्रोत्रिय ब्रह्मनिष्ठ गुरु की जरूरत है जिससे ब्रह्मज्ञान प्राप्त कर मानव अपनी सुप्त शक्ति को पहचान कर जीवन को निराशा से आशा में बदलकर जीवन सफल बना सकता है। कार्यक्रम में भंडारे की व्यवस्था गई। श्री आरती के साथ कथा को विराम दिया गया। विशेष तौर पर स्वामी हरिदासानंद, स्वामी सुचेतानंद, महात्मा गुरप्रीत आदि उपस्थित रहे।
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