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लोकसभा चुनाव: जम्मू कश्मीर के सियासी अखाड़े में बड़े नेताओं को भी खानी पड़ी पटखनी, जानें क्या कहता है इतिहास

Sun, 07 Apr 2024 02:57 PM IST
kumar गुलशन कुमार डॉ. बृजेश कुमार सिंह, जम्मू
डॉ. बृजेश कुमार सिंह, जम्मू Published by: kumar गुलशन कुमार Updated Sun, 07 Apr 2024 02:57 PM IST
सार

प्रदेश की राजनीति में घाटी में नेकां और पीडीपी तो जम्मू में भाजपा व कांग्रेस का वर्चस्व रहा है। नेकां नेता डॉ. फारूक अब्दुल्ला को 2014 के चुनाव में पीडीपी के तारिक हमीद कर्रा से हार का सामना करना पड़ा।

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Lok Sabha election: Even big leaders had to face defeat in the political arena of Jammu and Kashmir
जम्मू-कश्मीर लोकसभा चुनाव - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जम्मू-कश्मीर के सियासी अखाड़े में बड़े नेताओं को भी पटखनी खानी पड़ी है। इनमें नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) नेता डॉ. फारूक अब्दुल्ला, पीडीपी के नेता मुफ्ती मोहम्मद सईद व पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती, पूर्व मंत्री चमनलाल गुप्ता, पूर्व मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद व राजघराने के विक्रमादित्य सिंह शामिल हैं।

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प्रदेश की राजनीति में घाटी में नेकां और पीडीपी तो जम्मू में भाजपा व कांग्रेस का वर्चस्व रहा है। नेकां नेता डॉ. फारूक अब्दुल्ला को 2014 के चुनाव में पीडीपी के तारिक हमीद कर्रा से हार का सामना करना पड़ा। इस चुनाव में कर्रा ने 50.58 प्रतिशत मत पाकर चुनाव जीत लिया था।
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नेकां के फारूक को 37.04 फीसदी वोट मिले थे। बाद में महबूबा मुफ्ती से विवादों के चलते कर्रा ने पार्टी छोड़ दी और 2017 में हुए उप चुनाव में फारूक दोबारा चुने गए। अनंतनाग सीट से महबूबा मुफ्ती 2004 और 2014 में सांसद रहीं लेकिन 2019 में उन्हें पराजय का सामना करना पड़ा। यहां से नेकां के हसनैन मसूदी संसद में पहुंचे। उन्हें 32.17 फीसदी, कांग्रेस के जीए मीर को 26.83 और पीडीपी की महबूबा मुफ्ती को 24.44 प्रतिशत वोट मिला।
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1998 में अनंतनाग से ही मुफ्ती मोहम्मद सईद संसद में पहुंचे थे, लेकिन 1999 के चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। नेकां के अली मोहम्मद नायक 33.6 फीसदी मत पाकर विजयी रहे। मुफ्ती को 21.9 फीसदी मत मिले थे।
 

भाजपा के दिग्गजों को भी करना पड़ा हार का सामना

2004 के चुनाव में भाजपा के दिग्गज चमनलाल गुप्ता को कांग्रेस प्रत्याशी चौधरी लाल सिंह के हाथों उधमपुर सीट पर हार का सामना करना पड़ा। लाल सिंह को 39.61 फीसदी तो चमनलाल को 31.85 प्रतिशत मत मिले थे। 2014 में कांग्रेस के दिग्गज गुलाम नबी आजाद को भाजपा के डॉ. जितेंद्र सिंह ने उधमपुर सीट पर हराया था।

डॉ. सिंह को 46.78 प्रतिशत मिले थे, जबकि आजाद को 40.93 प्रतिशत मत प्राप्त हुए थे। 2019 में उधमपुर सीट पर डॉ. जितेंद्र सिंह ने राजघराने के विक्रमादित्य सिंह को हराया था। जितेंद्र को 61.38 तथा विक्रमादित्य को 31.10 प्रतिशत मत मिले थे।

उधमपुर, अनंतनाग व श्रीनगर में ज्यादा उलटफेर

जम्मू-कश्मीर की राजनीति में सबसे ज्यादा उलटफेर उधमपुर, अनंतनाग तथा श्रीनगर संसदीय सीट पर देखने को मिला है। उधमपुर से सबसे ज्यादा दिग्गज हारे हैं। इसके बाद अनंतनाग सीट है और श्रीनगर में भी उलटफेर हुआ है।

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