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पूर्वाभ्यास : इबोला वायरस से संक्रमित मरीज आया तो मची अफरा-तफरी
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मेडिकल कॉलेज स्थित आइसोलेशन वार्ड में संदिग्ध इबोला मरीज को भर्ती करने के लिए एंबुलेंस से उतार
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जम्मू। राजकीय मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) स्थित वायरस रिसर्च डायग्नोस्टिक लैब के बाहर रविवार को उस समय अचानक हलचल मच गई जब आपातकालीन सायरन के साथ एंबुलेंस पहुंची। एंबुलेंस से संदिग्ध संक्रमित मरीज को उतारकर तुरंत आइसोलेशन वार्ड में भर्ती किया गया। शुरुआत में इसे इबोला वायरस का मामला समझकर डॉक्टरों की टीम पूरी तरह सतर्क दिखी। बाद में स्पष्ट हुआ कि यह कोई मरीज नहीं बल्कि नई दिल्ली स्थित इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) के निर्देश पर किया गया पूर्वाभ्यास (मॉकड्रिल) था। इसका उद्देश्य इबोला वायरस जैसी आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग की तैयारियों को जांचना था।
मॉकड्रिल की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रिंसिपल डॉ. आशुतोष गुप्ता, सुपरिंटेंडेंट डॉ. बीरेंद्र त्रिसल, माइक्रोबायोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. संदीप डोगरा और चीफ सर्विलांस ऑफिसर डॉ. रश्मि तुरंत मौके पर पहुंचे।
स्वास्थ्य निदेशक डॉ. पूनम सेठी के मार्गदर्शन में स्थानीय स्तर पर की गई तैयारियों की समीक्षा की गई। दोपहर एक बजे संदिग्ध मरीज को जीएमसी के 28 बेड वाले विशेष आइसोलेशन वार्ड में शिफ्ट किया गया जहां डॉक्टरों की टीम ने पीपीई किट पहनकर सुरक्षित तरीके से परीक्षण किया।
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गंग्याल अस्पताल बना क्वारंटीन सेंटर
चीफ सर्विलांस ऑफिसर डॉ. रश्मि ने बताया कि भविष्य की किसी भी चुनौती से निपटने के लिए गंग्याल स्थित राजीव गांधी अस्पताल को क्वारंटीन सेंटर बनाया गया है। यहां 28 बेड की व्यवस्था की गई है और केंद्र की कमान डॉ. फारुक को सौंपी गई है। उन्होंने साफ किया कि फिलहाल जम्मू-कश्मीर में इबोला का संक्रमित मामला नहीं है लेकिन स्वास्थ्य विभाग जांच और इलाज की व्यवस्था को लेकर मुस्तैद है। आईसीएमआर के दिशा-निर्देशों के तहत अब अफ्रीकी देशों की यात्रा का इतिहास रखने वाले यात्रियों की एयरपोर्ट और रेलवे स्टेशनों पर कड़ी स्क्रीनिंग की जाएगी।
लक्षण दिखने पर तत्काल जांच कराएं
माइक्रोबायोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. संदीप डोगरा ने स्वास्थ्य विभाग की एडवाइजरी का हवाला देते हुए बताया कि इबोला वायरस मुख्य रूप से जंगली जानवरों के संपर्क में आने से इंसानों में फैलता है। तेज सिरदर्द, डायरिया, बदन दर्द, उल्टी होना और शरीर के अंगों से खून आना मुख्य लक्षण हैं । जीएमसी की वायरस रिसर्च एंड डायग्नोस्टिक लैबोरेटरी में रक्त, मूत्र और लार के नमूनों की जांच की व्यवस्था है।
ऐसे होती है वायरस की जांच
स्वास्थ्य कर्मी पीपीई किट पहनकर सुरक्षा के साथ नमूनों को विशेष कंटेनर में सील करते हैं।
संदिग्ध संक्रमित के रक्त में इबोला वायरस के एंटीजन और एंटीबॉडी का पता लगाया जाता है।
संक्रमण की सटीक पुष्टि के लिए आरटीपीसीआरजांच के जरिये वायरस के आरएनए की पहचान की जाती है।
मॉकड्रिल की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रिंसिपल डॉ. आशुतोष गुप्ता, सुपरिंटेंडेंट डॉ. बीरेंद्र त्रिसल, माइक्रोबायोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. संदीप डोगरा और चीफ सर्विलांस ऑफिसर डॉ. रश्मि तुरंत मौके पर पहुंचे।
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स्वास्थ्य निदेशक डॉ. पूनम सेठी के मार्गदर्शन में स्थानीय स्तर पर की गई तैयारियों की समीक्षा की गई। दोपहर एक बजे संदिग्ध मरीज को जीएमसी के 28 बेड वाले विशेष आइसोलेशन वार्ड में शिफ्ट किया गया जहां डॉक्टरों की टीम ने पीपीई किट पहनकर सुरक्षित तरीके से परीक्षण किया।
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चीफ सर्विलांस ऑफिसर डॉ. रश्मि ने बताया कि भविष्य की किसी भी चुनौती से निपटने के लिए गंग्याल स्थित राजीव गांधी अस्पताल को क्वारंटीन सेंटर बनाया गया है। यहां 28 बेड की व्यवस्था की गई है और केंद्र की कमान डॉ. फारुक को सौंपी गई है। उन्होंने साफ किया कि फिलहाल जम्मू-कश्मीर में इबोला का संक्रमित मामला नहीं है लेकिन स्वास्थ्य विभाग जांच और इलाज की व्यवस्था को लेकर मुस्तैद है। आईसीएमआर के दिशा-निर्देशों के तहत अब अफ्रीकी देशों की यात्रा का इतिहास रखने वाले यात्रियों की एयरपोर्ट और रेलवे स्टेशनों पर कड़ी स्क्रीनिंग की जाएगी।
लक्षण दिखने पर तत्काल जांच कराएं
माइक्रोबायोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. संदीप डोगरा ने स्वास्थ्य विभाग की एडवाइजरी का हवाला देते हुए बताया कि इबोला वायरस मुख्य रूप से जंगली जानवरों के संपर्क में आने से इंसानों में फैलता है। तेज सिरदर्द, डायरिया, बदन दर्द, उल्टी होना और शरीर के अंगों से खून आना मुख्य लक्षण हैं । जीएमसी की वायरस रिसर्च एंड डायग्नोस्टिक लैबोरेटरी में रक्त, मूत्र और लार के नमूनों की जांच की व्यवस्था है।
ऐसे होती है वायरस की जांच
स्वास्थ्य कर्मी पीपीई किट पहनकर सुरक्षा के साथ नमूनों को विशेष कंटेनर में सील करते हैं।
संदिग्ध संक्रमित के रक्त में इबोला वायरस के एंटीजन और एंटीबॉडी का पता लगाया जाता है।
संक्रमण की सटीक पुष्टि के लिए आरटीपीसीआरजांच के जरिये वायरस के आरएनए की पहचान की जाती है।

मेडिकल कॉलेज स्थित आइसोलेशन वार्ड में संदिग्ध इबोला मरीज को भर्ती करने के लिए एंबुलेंस से उतार