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Jammu News: दिशाहीन व्यवस्था ने युवाओं को बना दिया असहाय, तीन अपाहिज नाटक में समाज के बड़े वर्ग की निष्क्रियता पर तल्ख टिप्पणी
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जम्मू। नटरंग ने रविवार को तीन अपाहिज नाटक का मंचन किया। नाटक की पृष्ठभूमि चौराहे पर आधारित है जहां तीन पात्र कल्लू, खल्लू और गल्लू को लैंप पोस्ट के नीचे बैठे दिखाया गया है। वे कुछ भी नहीं कर रहे हैं, बस हर चीज पर टिप्पणियां कर रहे हैं। नाटककार ने उस दिशाहीन व्यवस्था को उजागर करने का प्रयास किया है जिसने युवाओं को न केवल असहाय बना दिया है बल्कि अपाहिज भी कर दिया है।
क्रूर भ्रष्टाचार का संक्रमण हमारी सोच में घर कर गया है और यह जहर मन में किसी भी नए विचार, क्रांति या पहल को पनपने नहीं देगा। तीनों पात्र असंगत ढंग से संवाद करते हैं जो दर्शकों को बेमतलब सा लगता है। फिर भी लगातार यह अहसास बना रहता है कि आसपास जो कुछ भी घटित हो रहा है उसमें कोई न कोई गहरा अर्थ छिपा है। स्वतंत्रता का अर्थ, नेताओं के निरर्थक भाषण, भारतीयता, हमारा देश, भाषा और वर्ग विषय पर चर्चा होती है। यह सब भले ही उद्देश्यहीन प्रतीत होता हो, पर वास्तव में सभी विषय अत्यंत आवश्यक हैं। समाज के एक बड़े वर्ग की निष्क्रियता, अर्थहीनता, भ्रम और थकावट ये सभी कारक मिलकर समाज और देश को सामूहिक अपाहिजपन की ओर धकेल रहे हैं।
नाटक का निर्देशन नीरज कांत और लेखन डॉ. विपिन कुमार अग्रवाल ने किया है। निर्देशक बलवंत ठाकुर ने बताया कि नटरंग पांच जून से नटरंग स्टूडियो थियेटर में 40 दिन के लिए बाल नाट्य शिविर लगाने जा रहा है। इस दौरान कलाकार निकष महाजन, मोहित सिंह, अर्णव धोत्रा, गौतम रतन और आकाश वाधवान मौैजूद रहे।
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विश्व तंबाकू निषेध दिवस पर कार्टून प्रदर्शनी
नटरंग की ओर से विश्व तंबाकू निषेध दिवस पर कार्टून प्रदर्शनी लगाई गई। उद्घाटन पद्मश्री बलवंत ठाकुर ने किया। प्रदर्शनी में रचनात्मक रूप से तैयार कार्टूनों की शृंखला प्रदर्शित की गई जो तंबाकू की लत के विनाशकारी परिणाम को दर्शाती है। पद्मश्री बलवंत ठाकुर के अनुसार कार्टूनिस्ट चंद्र शेखर ने इस बात पर जोर दिया कि कार्टून में अद्वितीय संप्रेषण शक्ति होती है जो भाषाई और सांस्कृतिक बाधाओं को पार करने में सक्षम है। नटरंग के उपाध्यक्ष सुभाष जम्वाल और कलाकार नीरज कांत उपस्थित रहे।
क्रूर भ्रष्टाचार का संक्रमण हमारी सोच में घर कर गया है और यह जहर मन में किसी भी नए विचार, क्रांति या पहल को पनपने नहीं देगा। तीनों पात्र असंगत ढंग से संवाद करते हैं जो दर्शकों को बेमतलब सा लगता है। फिर भी लगातार यह अहसास बना रहता है कि आसपास जो कुछ भी घटित हो रहा है उसमें कोई न कोई गहरा अर्थ छिपा है। स्वतंत्रता का अर्थ, नेताओं के निरर्थक भाषण, भारतीयता, हमारा देश, भाषा और वर्ग विषय पर चर्चा होती है। यह सब भले ही उद्देश्यहीन प्रतीत होता हो, पर वास्तव में सभी विषय अत्यंत आवश्यक हैं। समाज के एक बड़े वर्ग की निष्क्रियता, अर्थहीनता, भ्रम और थकावट ये सभी कारक मिलकर समाज और देश को सामूहिक अपाहिजपन की ओर धकेल रहे हैं।
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नाटक का निर्देशन नीरज कांत और लेखन डॉ. विपिन कुमार अग्रवाल ने किया है। निर्देशक बलवंत ठाकुर ने बताया कि नटरंग पांच जून से नटरंग स्टूडियो थियेटर में 40 दिन के लिए बाल नाट्य शिविर लगाने जा रहा है। इस दौरान कलाकार निकष महाजन, मोहित सिंह, अर्णव धोत्रा, गौतम रतन और आकाश वाधवान मौैजूद रहे।
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