Jammu: खेती-किसानी व नवाचार से दक्ष हो रहे चार लाख किसान, जम्मू-कश्मीर में डिजिटल कोर्स से बदल रहे भविष्य
जम्मू-कश्मीर में दक्ष पोर्टल से अब तक सवा चार लाख किसान जुड़ चुके हैं और डिजिटल कोर्स करके खेती-किसानी और कृषि नवाचारों से परिचित हो रहे हैं।
विस्तार
दक्ष पोर्टल से जम्मू-कश्मीर में खेती-किसानी की दुनिया बदल रही है। अब तक इस पोर्टल से सवा चार लाख किसान जुड़ चुके हैं। सुबह खेती-किसानी और शाम को कृषि क्षेत्र में हो रहे नित नए अनुसंधानों और नवाचार से परिचित हो रहे हैं।
आत्मनिर्भर होने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहे युवा इस पोर्टल पर उपलब्ध ऑनलाइन कोर्स करके अपने पुश्तैनी काम को नई पहचान दे रहे हैं। श्रीनगर के नोमान राशिद ग्रेजुएशन करने के बाद यूएई चले गए थे। लौटे तो फोकस खेती पर किया। दक्ष पोर्टल के बारे में पता चला। प्रोडक्शन का कोर्स किया और फिर अपनी डेयरी शुरू कर दी।
पहले कुछ उत्पाद खराब हो जाते थे, खासकर कच्चा दूध। वह बताते हैं कि कोर्स से मुझे उत्पादों को लंबे समय तक सुरक्षित रखने का तरीका पता चला। मेरा नुकसान खत्म हुआ। इसी तरह बिश्नाह के राजेश चौधरी कहते हैं कि हम लोग दादा-पिता के जमाने से खेती कर रहे हैं। कुछ वक्त पहले दक्ष पोर्टल की जानकारी विभाग के अफसरों से मिली। मैंने उस पर नामांकन कराया। पाॅलीहाउस का निर्माण करने में मुझे इस पोर्टल से मदद मिली। धीरे-धीरे पोर्टल के जरिए नई तकनीक से परिचित हो रहे हैं। ये दो उदाहरण महज बानगी हैं। इस वक्त प्रदेश की पहली डिजिटल यूनिवर्सिटी में प्रदेश के 4.15 लाख किसान नामांकन करवा चुके हैं। इनमें से 2.98 लाख किसान कोर्स पूरा कर चुके हैं।
4.15 लाख से ज्यादा किसानों ने कराया नामांकन, 2.98 लाख किसानों ने कोर्स पूरा किया
05 भाषाओं में पोर्टल पर पढ़ाई की सामग्री उपलब्ध, अंग्रेजी, कश्मीरी, डोगरी, हिंदी और उर्दू जानने वालों के लिए आसान
171 कोर्स उपलब्ध : इनमें खेती से जुड़े 97 कोर्स, बागवानी के 28 कोर्स, और पशुपालन के 46 कोर्स शामिल हैं। कीट नियंत्रण, फसल कटाई के बाद की जानकारी, उत्पाद का मूल्य बढ़ाने के तरीके, खेती से जुड़ा कारोबार और खर्च-लाभ की समझ जैसे विषयों पर भी कोर्स हैं।
स्मार्ट फोन का सही इस्तेमाल कैसे हो...इस सोच से मिली प्रेरणा
2023 में आंकड़ा सामने आया कि 70% से ज्यादा किसानों के हाथ में स्मार्टफोन है। प्रशासन ने किसान संपर्क अभियान चलाया। पता चला कि स्मार्ट फोन का लाभ किसान नहीं उठा पा रहे हैं। इसके बाद प्रदेश प्रशासन ने दक्ष पोर्टल की नींव डाली। स्मार्टफोन को ध्यान भटकाने वाली चीज या सिर्फ बातचीत का जरिया मानने के बजाय इसे कृषि सेक्टर के लिए सीखने का माध्यम बना दिया। इसी का नतीजा था ‘दक्ष किसान’-लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम जो आज भारत में अपनी तरह का पहला प्रोजेक्ट है। शायद पूरे एशिया में भी। इसे स्कास्ट जम्मू व कश्मीर से मिलकर डिजाइन किया है। -अटल डुल्लू, मुख्य सचिव
