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Jammu News: पॉक्सो केस में अंतिम बहस के वक्त नया गवाह बुलाने की मांग खारिज, 5 हजार जुर्माना
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- ट्रायल लंबा खींचने की कोशिश, कोर्ट ने बताया न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग
- दो हफ्ते में जुर्माना जमा करने के निर्देश
जम्मू। पॉक्सो मामलों की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने अंतिम बहस के वक्त नया गवाह बुलाने की मांग खारिज कर दी। अदालत ने इसे ट्रायल में देरी की कोशिश मानते हुए शिकायतकर्ता पर पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाया।
स्पेशल जज अमरजीत सिंह लंगेह की अदालत में यह मामला बख्शी नगर थाने में दर्ज एक एफआईआर नंबर से जुड़ा है। इसमें आरोपियों रवि सेठी और राज कुमार के खिलाफ आईपीसी 354 और पॉक्सो एक्ट की धाराएं 7/8 के तहत मुकदमा चल रहा है। शिकायतकर्ता ने अर्जी देकर एक व्यक्ति को गवाह के रूप में बुलाने की मांग की थी। उसका कहना था कि संबंधित व्यक्ति घटना के समय मौके पर मौजूद था और उसका बयान मामले के लिए जरूरी है। यह भी आरोप लगाया गया कि जांच अधिकारी ने उसे गवाह के रूप में शामिल नहीं किया। आरोपियों की ओर से इसका विरोध किया गया। उनका कहना था कि शिकायतकर्ता का निजी वकील स्वतंत्र रूप से अभियोजन नहीं चला सकता और केवल सरकारी वकील की सहायता कर सकता है। साथ ही अर्जी ट्रायल के अंतिम चरण में दायर की गई, जिसका उद्देश्य कार्यवाही को लंबा करना है।
अदालत ने कहा कि गवाह बुलाने का अधिकार जरूर है, लेकिन इसका इस्तेमाल सावधानी और विवेक से होना चाहिए। शिकायतकर्ता और उसके वकील ने पूरे ट्रायल के दौरान कभी इस गवाह को बुलाने की मांग नहीं की। न तो किसी गवाह ने उसके मौके पर होने की बात कही और न ही शिकायतकर्ता ने अपने बयान में इसका जिक्र किया। अदालत ने यह भी माना कि मामला संवेदनशील है क्योंकि एक आरोपी शिकायतकर्ता का भाई और दूसरा मामा है। इसके बावजूद अंतिम चरण में अर्जी देकर कार्यवाही को लंबा करने की कोशिश की गई।
सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए अदालत ने कहा कि निजी वकील केवल सरकारी वकील की मदद कर सकता है, वह मुकदमे की कमान नहीं संभाल सकता। अदालत ने अर्जी को न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग मानते हुए खारिज कर दिया और शिकायतकर्ता पर पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाया।
कोर्ट ने निर्देश दिया कि यह रकम दो हफ्ते के भीतर जमा कराई जाए और आरोपियों को बराबर हिस्से में दी जाए। तय समय में रकम जमा न होने पर कानून के अनुसार वसूली की जाएगी।
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- दो हफ्ते में जुर्माना जमा करने के निर्देश
जम्मू। पॉक्सो मामलों की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने अंतिम बहस के वक्त नया गवाह बुलाने की मांग खारिज कर दी। अदालत ने इसे ट्रायल में देरी की कोशिश मानते हुए शिकायतकर्ता पर पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाया।
स्पेशल जज अमरजीत सिंह लंगेह की अदालत में यह मामला बख्शी नगर थाने में दर्ज एक एफआईआर नंबर से जुड़ा है। इसमें आरोपियों रवि सेठी और राज कुमार के खिलाफ आईपीसी 354 और पॉक्सो एक्ट की धाराएं 7/8 के तहत मुकदमा चल रहा है। शिकायतकर्ता ने अर्जी देकर एक व्यक्ति को गवाह के रूप में बुलाने की मांग की थी। उसका कहना था कि संबंधित व्यक्ति घटना के समय मौके पर मौजूद था और उसका बयान मामले के लिए जरूरी है। यह भी आरोप लगाया गया कि जांच अधिकारी ने उसे गवाह के रूप में शामिल नहीं किया। आरोपियों की ओर से इसका विरोध किया गया। उनका कहना था कि शिकायतकर्ता का निजी वकील स्वतंत्र रूप से अभियोजन नहीं चला सकता और केवल सरकारी वकील की सहायता कर सकता है। साथ ही अर्जी ट्रायल के अंतिम चरण में दायर की गई, जिसका उद्देश्य कार्यवाही को लंबा करना है।
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अदालत ने कहा कि गवाह बुलाने का अधिकार जरूर है, लेकिन इसका इस्तेमाल सावधानी और विवेक से होना चाहिए। शिकायतकर्ता और उसके वकील ने पूरे ट्रायल के दौरान कभी इस गवाह को बुलाने की मांग नहीं की। न तो किसी गवाह ने उसके मौके पर होने की बात कही और न ही शिकायतकर्ता ने अपने बयान में इसका जिक्र किया। अदालत ने यह भी माना कि मामला संवेदनशील है क्योंकि एक आरोपी शिकायतकर्ता का भाई और दूसरा मामा है। इसके बावजूद अंतिम चरण में अर्जी देकर कार्यवाही को लंबा करने की कोशिश की गई।
सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए अदालत ने कहा कि निजी वकील केवल सरकारी वकील की मदद कर सकता है, वह मुकदमे की कमान नहीं संभाल सकता। अदालत ने अर्जी को न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग मानते हुए खारिज कर दिया और शिकायतकर्ता पर पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाया।
कोर्ट ने निर्देश दिया कि यह रकम दो हफ्ते के भीतर जमा कराई जाए और आरोपियों को बराबर हिस्से में दी जाए। तय समय में रकम जमा न होने पर कानून के अनुसार वसूली की जाएगी।
