नौकरी के खेल कोटे में 'खेल'?: 225 खिलाड़ियों की चयन सूची पर उठे सवाल, एसीबी ने शुरू की जांच; मांगी रिपोर्ट
जम्मू-कश्मीर में खेल कोटे के तहत 225 खिलाड़ियों की सरकारी नौकरी के लिए चयन सूची पर लगे अनियमितता और पक्षपात के आरोपों की एसीबी ने जांच शुरू कर दी है।
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जम्मू-कश्मीर में खेल कोटे के तहत सरकारी नौकरियों की चयन सूची को लेकर उपजा विवाद अब कानूनी जांच के दायरे में आ गया है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने पड़ताल शुरू कर दी है। एसीबी जम्मू के एसएसपी ने जम्मू-कश्मीर स्पोर्ट्स काउंसिल के विभागीय सतर्कता अधिकारी श्रीनगर को एक पत्र भेजा है। इसके जरिए शिकायत में लगाए आरोपों पर तथ्यात्मक सत्यापन रिपोर्ट मांगी गई है। यह विवाद एसओ-12, प्रोविजनल मेरिट सूची और कुछ खास खेलों की मान्यता से जुड़ा हुआ है। शिकायतकर्ता खिलाड़ियों का आरोप है कि चयन प्रक्रिया में अनियमितताएं हुई हैं।
युवा सेवाएं एवं खेल विभाग की चयन सूची में खेल कोटे के तहत 225 खिलाड़ियों को शामिल किया गया था। इन खिलाड़ियों ने 2014 से 2022 तक विभिन्न खेल स्पर्धाओं में पदक जीते हैं। सूची में पांच खिलाड़ी राजपत्रित पदों के लिए शामिल थे। शिकायतकर्ता के आराेपों के हवाले एसीबी ने पत्र में लिखा, कुछ ऐसे खेलों से जुड़े उम्मीदवारों के नाम मेरिट सूची में हैं, जिन खेलों के पास मान्यता, नियामक ढांचा या सत्यापन योग्य प्रतिस्पर्धात्मक व्यवस्था नहीं है। कुछ खास खेलों से जुड़े उम्मीदवारों की संख्या अधिक होने पर भी सवाल उठाए हैं।
शिकायत में प्रशासनिक स्तर पर पक्षपात व कुछ उम्मीदवारों को प्राथमिकता देने का आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की गई है। कुछ खेलों में प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं। आरोप हैं कि प्रमाणपत्र प्रतिस्पर्धात्मक सत्यापन के बिना या पैसे लेकर जारी किए गए हैं।
ड्रैगन बोट और आयु मानकों की भी पड़ताल की जाएगी
जांच के दायरे में खेलों का तकनीकी वर्गीकरण भी आ गया है। शिकायत में विशेष रूप से ड्रैगन बोट को कैनोइंग और कयाकिंग के अंतर्गत रखने पर आपत्ति जताई गई है। तकनीकी रूप से ये दोनों बिल्कुल अलग खेल हैं। ऐसे में इस वर्गीकरण के पीछे की आधिकारिक नीति और आदेशों की वैधता जांची जाएगी। खिलाड़ियों की उम्र व राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के तय मानकों के उल्लंघन की भी पड़ताल होगी।
खिलाड़ियों का 22वें दिन भी धरना
मुद्दे को जम्मू में खिलाड़ी सोमवार को महाराजा हरि सिंह की प्रतिमा के समक्ष लगातार 22 दिन भी धरने पर बैठे रहे। मामला बढ़ता देख अब सरकार इसपर गंभीर हुई है। खेल मंत्री सतीश शर्मा भी खिलाड़ियों को मनाने का प्रयास कर चुके हैं। लेकिन खिलाड़़ी ठोस कार्रवाई से कम पर तैयार नहीं हैं।
जांच के मुख्य बिंदु
गैर-मान्यता प्राप्त खेल
मेरिट सूची में ऐसे खेलों के उम्मीदवारों को शामिल किया गया है जिनके पास न तो कोई आधिकारिक मान्यता है, न नियामक ढांचा और न ही कोई सत्यापन योग्य प्रतिस्पर्धात्मक व्यवस्था।
संदेहास्पद प्रमाणपत्र
शिकायत में कुछ खेलों में प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। आरोप है कि प्रमाणपत्र पैसे लेकर या पर्याप्त प्रतिस्पर्धात्मक सत्यापन के बिना जारी किए हैं।
प्रशासनिक पक्षपात
सूची में कुछ खास खेलों से जुड़े उम्मीदवारों की संख्या अचानक बहुत अधिक पाई गई है। शिकायत में इसे प्रशासनिक स्तर पर पक्षपात और कुछ उम्मीदवारों को प्राथमिकता देने का आरोप लगाया गया है।