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जंगलों में छिपे आतंकियों की खैर नहीं: टीओबी से हर हलचल पर एसओजी की पैनी नजर, पहाड़ों में सुरक्षा का नया जाल

Sat, 29 Aug 2026 01:33 PM IST
Nikita Gupta अरुण कुमार, अमर उजाला नेटवर्क जम्मू
अरुण कुमार, अमर उजाला नेटवर्क जम्मू Published by: Nikita Gupta Updated Sat, 29 Aug 2026 01:33 PM IST
सार

जम्मू-कश्मीर के पहाड़ी और घने जंगलों में आतंकियों के खिलाफ अभियान तेज करने के लिए टीओबी पर जंगल और माउंटेन वारफेयर में माहिर एसओजी की विशेष टुकड़ियां तैनात की गई हैं।

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SOG keeping an eye on every suspicious activity from the TOB.
=सुरक्षाबल। - फोटो : बसित जरगर

विस्तार

जम्मू और कश्मीर संभाग के पहाड़ी और घने जंगलों में छिपे आतंकियों की टेंपरेरी ऑपरेशनल बेस (टीओबी) से चौतरफा घेराबंदी की जा रही है। टीओबी पर विशेष अभियान समूह (एसओजी) की विशेष टुकड़ियां तैनात की गई हैं। जंगल और माउंटेन वारफेयर में माहिर ये जवान आतंकियों के खात्मे के लिए हर संदिग्ध गतिविध पर पैनी नजर रख रहे रहे हैं।

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पहाड़ी और घने जंगलों में छिपे आतंकियों के खिलाफ टीओबी सुरक्षाबलों की रणनीति का अहम हिस्सा बन गए हैं। आतंकियों के पनाहगार माने जाने वाले दुर्गम जंगलों में उनकी गतिविधियों पर नजर रखने और अभियान चलाने के लिए टीओबी को मजबूत किया जा रहा है।

किश्तवाड़ के छात्रू और उधमपुर के डुडू-बसंतगढ़ के घने जंगलों और पहाड़ी इलाकों में आतंकियों के खिलाफ अभियान में टीओबी कारगर साबित हुए हैं। इसके बाद अब जम्मू संभाग के अन्य जंगली और पहाड़ी इलाकों में भी इन बेस को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।

टीओबी में जंगल, पहाड़ और गुरिल्ला युद्ध में पारंगत विशेष टुकड़ियों को तैनात किया गया है। इनकी मौजूदगी आतंकियों के लिए अचानक दबाव बनाने वाले प्रभावी तंत्र के रूप में काम कर रही है। जम्मू-कश्मीर पुलिस के डीजीपी नलिन प्रभात खुद टीओबी की सुरक्षा तैयारियों का जायजा ले रहे हैं। उन्होंने पीर पंजाल के अलावा चटरगुल और बांगर में स्थापित टीओबी का दौरा कर जवानों की तैनाती और ऑपरेशनल तैयारियों की समीक्षा की। इन दौरों के दौरान दुर्गम इलाकों में जवानों की क्षमता, हथियारों और जरूरी उपकरणों की उपलब्धता समेत अन्य व्यवस्थाओं को परखा जा रहा है।

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आतंकी मददगारों पर भी नजर
टीओबी में तैनात एसओजी के जवानों को जंगल, गुरिल्ला और माउंटेन वारफेयर का विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। एसओजी में नए जवानों को शामिल कर टीमों को मजबूत किया गया है। जवानों को आधुनिक हथियारों और विशेष उपकरणों से भी लैस किया गया है। अब टीओबी के जरिए आतंकियों की गतिविधियों पर नजर रखने के साथ-साथ उनके मददगार नेटवर्क और स्थानीय संपर्कों की जानकारी जुटाने पर भी जोर दिया जा रहा है। सुरक्षा बलों की रणनीति का उद्देश्य दुर्गम इलाकों में आतंकियों पर लगातार दबाव बनाए रखना और उन्हें सुरक्षित ठिकाने बनाने से रोकना है।

2021 से 2023 के बीच बढ़ी थीं आतंकी गतिविधियां
2021 से 2023 के बीच जम्मू संभाग के पहाड़ी इलाकों में आतंकी गतिविधियों में बढ़ोतरी देखने को मिली थी। लश्कर-ए-ताइबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी संगठनों ने इन इलाकों में अपनी मौजूदगी मजबूत करने की कोशिश की। इसके बाद आतंकियों को जंगलों और पहाड़ी क्षेत्रों तक सीमित रखने तथा उनके खिलाफ लगातार दबाव बनाए रखने के लिए ऊंची चोटियों और पहाड़ी ढलानों पर टीओबी स्थापित करने की रणनीति अपनाई गई। छात्रू और डुडू-बसंतगढ़ में इसी रणनीति के तहत टीओबी स्थापित किए गए। इन बेस से जवानों ने घने जंगलों और ऊंचे इलाकों में अभियान चलाकर आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई की। इससे उन क्षेत्रों में सुरक्षा बलों की पहुंच और निगरानी बढ़ाने में मदद मिली, जहां पहले लगातार ऑपरेशन चलाना चुनौतीपूर्ण था।

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अब हरकत पर नजर रखना आसान
सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर विजय सागर धीमान का कहना है कि जंगलों में छिपे आतंकियों के खिलाफ सुरक्षाबलों की कार्रवाई में ट्रांजिट ऑपरेशनल बेस (टीओबी) अहम भूमिका निभा रहे हैं। जंगल और पहाड़ी क्षेत्रों में रणनीतिक स्थानों पर टीओपी स्थापित होने से जवानों को इलाके की लगातार निगरानी करने और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने में मदद मिलती है। आतंकियों के खिलाफ इस तरह की पहल काफी कारगर है। इससे जवानों को इलाके की भौगोलिक स्थिति और गतिविधियों की जानकारी लगातार रहती है और किसी भी संदिग्ध हलचल पर तेजी से कार्रवाई करना आसान होता है।

आतंकवाद विरोधी अभियान हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता : आईजीपी
कश्मीर जोन के पुलिस महानिरीक्षक (आईजीपी) ने कहा कि घाटी में आतंकवाद विरोधी अभियान पुलिस बल की सर्वोच्च प्राथमिकता है। पदभार संभालने के एक दिन बाद सुजीत कुमार शुक्रवार को हजरतबल दरगाह पहुंचे और सुरक्षा प्रबंधों का जायजा लिया। यहां आतंकवाद विरोधी अभियानों, ओवरग्राउंड वर्कर्स (ऑजीडब्ल्यू) की धरपकड़ और हथियारों की बरामदगी से जुड़े सवाल पर आईजीपी ने कहा कि ऑपरेशंस पहले भी हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता थे और अब भी हमारी शीर्ष प्राथमिकता बने रहेंगे। उन्होंने पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती का बारीकी से निरीक्षण किया। उन्होंने कहा, उन्होंने वीरवार को ही कार्यभार संभाला है।

आज हम दरगाह में अपनी पुलिस टीम की तैनाती का जायजा लेने और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के साथ बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने आए हैं। उन्होंने कहा, हम श्रीनगर के उन अन्य इलाकों का भी दौरा और समीक्षा कर रहे हैं जहां अधिक भीड़ जुटने की संभावना है। नए आईजीपी ने घाटी के लोगों को भरोसा दिलाया कि कश्मीर जोन पुलिस हमेशा जनता के साथ खड़ी है।

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