J&K: सदन में गूंजेगा जम्मू से भेदभाव, मेडिकल कॉलेज की मान्यता व आरक्षण का मामला, बजट सत्र हंगामेदार तय
दो फरवरी से शुरू होने वाला जम्मू-कश्मीर विधानसभा का बजट सत्र जम्मू से भेदभाव, माता वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज की मान्यता और खेलों में चयन को लेकर विवादों के कारण हंगामेदार रहने के आसार हैं। आरक्षण के युक्तिकरण प्रस्ताव पर भी सरकार और विपक्ष आमने-सामने होंगे, जिससे सदन में तीखी राजनीतिक बहस तय मानी जा रही है।
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दो फरवरी से शुरू होने वाला विधानसभा का बजट सत्र हंगामेदार रहने वाला है। सदन में जम्मू से भेदभाव, श्रीमाता वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज की मान्यता और आरक्षण का मुद्दा गूंजने के आसार हैं। सदन में सरकार से फुटबाल और क्रिकेट अंडर-14 टीम चयन पर जम्मू से भेदभाव पर जवाब मांगा जा सकता है। मेडिकल कॉलेज मुद्दे पर सरकार आक्रामक है लेकिन क्रिकेट व फुटबाल में खिलाड़ियों के चयन पर उठा बवाल प्रदेश का दूसरा ऐसा मुद्दा है जिसने क्षेत्रवाद की सियासत को हवा दी है।
इस मुद्दे पर कश्मीर के ज्यादा खिलाड़ियों के चुनाव का आरोप है। भाजपा जम्मू हित में इस मुद्दे को हवा दे रही है तो नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां)ने खिलाड़ियों का चयन योग्यता के आधार पर बताया है। ऐसे में सत्र के दौरान खेल पर बहस होना तय है और इस मुद्दे में सियासी दल क्षेत्रीय राजनीति में बंटे नजर आने वाले हैं। सीएम मेडिकल कॉलेज की मान्यता रद्द होने पर भाजपा की घेरेबंदी में लगे हैं तो भाजपा नेशनल कॉन्फ्रेंस के पुराने फैसलों को पूरे विवाद की वजह बता रही है।
दूसरी तरफ आरक्षण को युक्तिकरण बनाने पर श्रीनगर में प्रदर्शन हो रहे हैं। मौजूदा समय में 60:40 का आरक्षण प्रदेश में लागू है। इसे 50:50 करने का प्रस्ताव सरकार ने तैयार किया है। स्वास्थ्य मंत्री सकीना इत्तू की अध्यक्षता में समिति बनाई थी। यह प्रस्ताव कैबिनेट उपसमिति के माध्यम से सरकार तक लाया गया। बीते चार दिसंबर को हुई कैबिनेट में उपसमिति की सिफारिश पर मुहर लगाने के बाद सरकार ने इसे उपराज्यपाल की मंजूरी के लिए भेज दिया। जहां यह प्रक्रिया में है।
आरक्षण पर श्रीनगर में हंगामा हो रहा है और मुख्यमंत्री कई जगह जवाब न आने की बात को दोहरा चुके हैं। आरक्षण के मुद्दे पर नेशनल कॉन्फ्रेंस व पीडीपी के सुर एक जैसे ही हैं जो बजट सत्र में सदन के अंदर सुनाई देंगे। फिलहाल, बजट सत्र के लिए सवाल विधानसभा सचिवालय पहुंचने शुरू हो गए हैं। विधायकों के सवाल स्थानीय मुद्दों पर केंद्रित हैं इनसे इतर बहस के विषय वजन के हिसाब से अलग तय हो रहे हैं।
शामलात भूमि पर मालिकाना हक पर भी हो सकती है बहस
भूमि अधिकार बिल पर भी बहस होने के आसार हैं। 20 साल से ज्यादा समय से शामलात भूमि पर कब्जे को मालिकाना हक देने की पैरवी नेशनल कॉन्फ्रेंस ने की है। इस संबंध में नेकां प्रवक्ता व विधायक तनवीर सादिक ने लैंड ग्रांट रूल्स, 2022 को रद्द करने और वर्ष 1960 के भूमि अनुदान नियम को लागू करने के विधेयक लाने की बात कही है। बीते दिनों अवैध कब्जों पर हुई कार्रवाई पर मुख्यमंत्री सवाल उठा चुके हैं। यह विधेयक पारित होता है तो अवैध रूप से शामलात या चरागाह में बैठे कब्जाधारक जमीन के मालिक हो जाएंगे।
वेतन बढ़ोतरी पर हमराही बनेंगे पक्ष-विपक्ष
सदन में इस सियासत के बीच अब तक एक मुद्दा ऐसा भी है जिसमें दोनों पक्षों की सहमति रहने वाली है। विधायकों के वेतन बढ़ोतरी का प्रस्ताव सरकार ने तैयार किया है। प्रस्ताव को विपक्ष के विधायकी की अगुवाई वाली समिति ने तैयार किया है। विधायकों के वेतन व भत्ते दोगुना करने की सिफारिश पर सदन की मुहर लगना तय है। तमाम बहस के बीच यही एक मुद्दा रहने वाला है जिसमें सत्ता पक्ष व विपक्ष एकसाथ के हमराही बने नजर आ सकते हैं।