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Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Jammu News ›   The momentum seen in the industrial sector in Jammu and Kashmir over the past two years has now slowed down

निवेश बढ़ा, रोजगार घटा: जम्मू-कश्मीर में उद्योग की रफ्तार पर लगा ब्रेक, रोजगार और नए यूनिट लगातार घटे

Mon, 10 Aug 2026 02:04 PM IST
Nikita Gupta गौरव रावत अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
गौरव रावत अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: Nikita Gupta Updated Mon, 10 Aug 2026 02:04 PM IST
सार

जम्मू-कश्मीर में औद्योगिक निवेश लगातार बढ़ा, लेकिन नए यूनिट और रोजगार के आंकड़ों में गिरावट दर्ज की गई है।

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The momentum seen in the industrial sector in Jammu and Kashmir over the past two years has now slowed down
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : फ्रीपिक

विस्तार

जम्मू-कश्मीर में इंडस्ट्री (उद्योग) को लेकर पिछले दो साल में दिखी तेजी अब धीमी पड़ गई है। वर्ष 2022-23 और 2023-24 में नए यूनिट और नौकरियों में आया उछाल ज्यादा समय तक टिक नहीं पाया। निवेश बढ़ता रहा, लेकिन उतनी नौकरियां और नए यूनिट नहीं बढ़े। संसद की गृह मामलों की स्थायी समिति की रिपोर्ट में यह तस्वीर सामने आई है।

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राज्यसभा सांसद राधा मोहन दास की अध्यक्षता वाली समिति की रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2019-20 से वर्ष 2025-26 के बीच प्रदेश में 2279 औद्योगिक यूनिट लगे, जिनमें करीब 16,599 करोड़ रुपये का निवेश आया और 75,848 लोगों को रोजगार मिला।

साल दर साल आंकड़े देखें तो वर्ष 2019-20 से 2021-22 तक बढ़त धीमी रही। इन तीन साल में हर साल 175 से 310 के बीच यूनिट लगे। निवेश 300 से 400 करोड़ रुपये के आसपास रहा और रोजगार भी 2 से 3 हजार के बीच ही रहा। इसके बाद अचानक तेजी आई। वर्ष 2022-23 में 629 यूनिट लगे।

2153 करोड़ रुपये का निवेश आया और 15,719 रोजगार बने। वर्ष 2023-24 में यूनिट घटकर 234 रह गए, लेकिन निवेश बढ़कर 3389 करोड़ हो गया और रोजगार रिकॉर्ड करीब 30 हजार तक पहुंच गया। इसके बाद गिरावट शुरू हुई। 2024-25 में यूनिट 405 रहे और निवेश 4145 करोड़ तक पहुंचा, लेकिन रोजगार घटकर 11,396 रह गया। वर्ष 2025-26 में निवेश और बढ़कर 5824 करोड़ रुपये हो गया, जबकि यूनिट घटकर 224 रह गए और रोजगार और कम होकर 9185 रह गया।

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एनसीएसएस से 971 यूनिट को 951 करोड़ इंसेंटिव मिला
वर्ष इंसेंटिव
2022-23 44
2023-24 165
2024-25 227
2025-26 514
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एमएसएमई और कौशल विकास पर जोर
समिति ने कहा है कि आगे रफ्तार बनाए रखने के लिए छोटे उद्योगों, स्थानीय कारोबारियों और नए काम शुरू करने वालों को ज्यादा मदद देनी होगी। इसके साथ ही फैक्टरी लगाने के लिए बेहतर सुविधाएं देने और युवाओं को काम के हिसाब से प्रशिक्षण देने की जरूरत बताई गई है। समिति का साफ कहना है कि अगर इन बातों पर तेजी से काम नहीं हुआ, तो पैसा तो आएगा लेकिन लोगों को नौकरी नहीं मिल पाएगी।

एनसीएसएस से राहत असर अभी सीमित
समिति की रिपोर्ट कहती है कि सरकार ने उद्योग बढ़ाने के लिए नई केंद्रीय सेक्टर स्कीम (एनसीएसएस-2021) लागू की है, जिसका कुल आकार 28,400 करोड़ रुपये है। इस स्कीम में फैक्टरी लगाने वालों को पैसे की मदद, ब्याज में छूट और टैक्स में राहत दी जाती है। पिछले कुछ वर्षों में इस स्कीम के तहत सैकड़ों करोड़ रुपये उद्योगों को दिए गए हैं। इसके बावजूद रोजगार और नए उद्योग की रफ्तार धीमी पड़ना यह दिखाता है कि इसका पूरा असर अभी जमीन पर नहीं दिख रहा।

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