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नीट रद्द होते ही छात्रों की बढ़ी चिंता: बोले- परीक्षा के बाद किताबें समेट दी थीं, अब फिर से शुरू करनी होगी जंग

अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: Nikita Gupta Updated Wed, 13 May 2026 12:25 PM IST
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सार

जम्मू में नीट परीक्षा रद्द होने की खबर से हजारों छात्रों में चिंता और असमंजस की स्थिति बन गई है। परीक्षा के बाद पढ़ाई से ब्रेक ले चुके छात्र अब दोबारा तैयारी शुरू करने के दबाव और मानसिक तनाव का सामना कर रहे हैं।

The news of the NEET exam cancellation has heightened the anxiety of students in Jammu.
NEET - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

नीट परीक्षा रद्द होने की खबर ने जम्मू के छात्रों की चिंता बढ़ा दी है। जम्मू जिले में 27 परीक्षा केंद्रों पर 14,997 छात्रों ने यह परीक्षा दी थी। महीनों की तैयारी और परीक्षा के तनाव से बाहर निकले छात्र अब फिर उसी दौर में लौटने की आशंका से परेशान हैं। किसी ने किताबें समेट दी थीं तो किसी ने आगे की योजनाएं बनानी शुरू कर दी थीं लेकिन अब सब कुछ फिर वहीं आकर रुक गया है। छात्रों का कहना है कि मेहनत से ज्यादा अब मानसिक दबाव उन्हें परेशान कर रहा है।

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लोअर रूप नगर की रहने वाली रिद्धि शर्मा ने इस बार पहली बार नीट परीक्षा दी थी। रिद्धि ने बताया कि उनका पेपर अच्छा गया था और उन्हें उम्मीद थी कि मेहनत का अच्छा परिणाम मिलेगा। परीक्षा रद्द होने की खबर ने उन्हें परेशान कर दिया। परीक्षा खत्म होने के बाद उन्होंने किताबें और नोट्स अलग रख दिए थे। अब फिर से वही किताबें और नोट्स निकालकर तैयारी शुरू करनी पड़ेगी। अगर दोबारा परीक्षा के लिए पर्याप्त समय मिला तो संभलना आसान होगा लेकिन कम समय में तैयारी करना काफी मुश्किल रहेगा। उन्हें यह भी डर है कि अगला पेपर पहले से ज्यादा कठिन न हो जाए।

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बार-बार गड़बड़ी से सिस्टम पर भरोसा कमजोर पड़ रहा
बंगलूरू मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे जम्मू के माणिक पंडिता ने बताया कि उन्होंने पिछले साल कठिन पेपर के बावजूद परीक्षा पास की थी। छात्र लंबे समय तक तैयारी के दबाव में रहते हैं और परीक्षा खत्म होने के बाद मानसिक रूप से राहत महसूस करने लगते हैं। ऐसे में दोबारा उसी तैयारी में लौटना आसान नहीं होता। 2024 में भी पेपर लीक हुआ था। पेपर लीक और छेड़छाड़ जैसी खबरें मेहनत करने वाले छात्रों को सबसे ज्यादा निराश करती हैं। छात्र अनमोल शर्मा ने बताया कि परीक्षा के बाद वह काफी खुश थे। आंसर-की से जवाब मिलाने पर उन्हें उम्मीद थी कि उनके 600 से ज्यादा अंक आ सकते हैं। अब उनकी खुशी चिंता में बदल गई है। परीक्षा के बाद वह आगे की योजनाओं के बारे में सोच रहे थे लेकिन अब फिर उसी तनाव में लौटना होगा।

ओएमआर की जगह हो कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट
नीट की तैयारी करवाने वाले जम्मू के शिक्षक प्रियांशु गुप्ता ने कहा कि परीक्षा से पहले छात्र लगातार दबाव में रहते हैं और परीक्षा खत्म होने के बाद थोड़ा आराम के मूड में आ जाते हैं। ऐसे में अचानक दोबारा परीक्षा की स्थिति बनने से बच्चों पर मानसिक और भावनात्मक दबाव दोनों बढ़ेंगे। कोचिंग संस्थान परीक्षा से पहले बच्चों को मॉडल पेपर और टेस्ट सीरीज के जरिए तैयार करते हैं लेकिन कम समय में दोबारा उसी स्तर की तैयारी कराना बड़ी चुनौती होगी। लंबे समय से लगातार तैयारी कर रहे छात्रों को शायद कम परेशानी हो, लेकिन जिन छात्रों ने आखिरी महीनों में अपनी रणनीति बदलकर मेहनत की थी, उनके लिए यह स्थिति ज्यादा मुश्किल साबित होगी। प्रियांशु ने परीक्षा प्रणाली को ज्यादा सुरक्षित बनाने की जरूरत बताई। साथ ही ओएमआर आधारित परीक्षा की जगह कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (सीबीटी) लागू करने पर भी विचार होना चाहिए।

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