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किश्तवाड़ में बड़ी कार्रवाई: आतंकी मददगार शिक्षक गिरफ्तार, आतंकियों को देता था लॉजिस्टिक सपोर्ट

अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: Nikita Gupta Updated Wed, 13 May 2026 12:38 PM IST
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सार

किश्तवाड़ के छात्रू उपमंडल में सुरक्षा एजेंसियों ने यूएपीए के तहत सरकारी शिक्षक मशकूर अहमद को आतंकी मदद के आरोप में गिरफ्तार किया है। वह आतंकियों को लॉजिस्टिक सपोर्ट, ठिकाना और स्थानीय मदद उपलब्ध कराता था।
 

Teacher Aiding Terrorists Arrested: Major Operation in Chatru, Kishtwar
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

किश्तवाड़ जिले के छात्रू उपमंडल में पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने आतंकवाद पर बड़ी कार्रवाई की है। बेगमपुरा छात्रू निवासी मशकूर अहमद उर्फ मशकूर मास्टर को गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत गिरफ्तार किया है। आरोपी सरकारी प्राइमरी स्कूल गुजराड़ी में शिक्षक था। मशकूर पर गंभीर आरोप हैं और उसे जेल भेज दिया गया है।

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सूत्रों के अनुसार, सिंहपोरा के वन क्षेत्र में हुए एनकाउंटर के बाद की सबसे बड़ी और निर्णायक कार्रवाई मानी जा रही है। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि मशकूर मास्टर शिक्षक की आड़ में लंबे समय से आतंकियों को लॉजिस्टिक और स्थानीय सहायता उपलब्ध करवा रहा था। आरोपी कथित तौर पर आतंकियों को भोजन और राशन उपलब्ध करवाता था। छिपने के लिए ठिकाना मुहैया करवाने के साथ ही उनकी सुरक्षित आवाजाही में मदद करता था। आतंकियों को स्थानीय मार्गों की जानकारी और अन्य सहायता देने में शामिल पाया गया।
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सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार आरोपी की गतिविधियों पर काफी समय से निगरानी रखी जा रही थी और उसे क्षेत्र की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा माना जा रहा था। पुलिस ने विस्तृत जांच और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद सक्षम प्राधिकारी से उसे गिरफ्तार करने अनुमति प्राप्त की। इसके बाद मशकूर मास्टर को प्रिवेंटिव कस्टडी में लेकर जिले से बाहर जेल में भेज दिया गया है। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि आतंकियों और  उनके मददगारों के नेटवर्क को तोड़ने के लिए लगातार कार्रवाई की जा रही है और आगे भी जारी रहेगी।

आतंक समर्थक नेटवर्क ध्वस्त करने के लिए कार्रवाई जारी
अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई पुलिस, सुरक्षा बल और खुफिया एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय और योजनाबद्ध ऑपरेशन का परिणाम है। इस अभियान में डीवाईएसपी ऑपरेशंस, एसडीपीओ मढ़वा, जिला पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी और विभिन्न इंटेलिजेंस एजेंसियों ने अहम भूमिका निभाई। सुरक्षा अधिकारियों ने कहा कि छात्रू और उससे सटे जंगलों में सक्रिय आतंक समर्थक नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करने के लिए अभियान चलाया जा रहा है। पिछले कुछ ममाह में सिंहपोरा के वन क्षेत्रों में सुरक्षा बलों ने आतंकवाद के  खिलाफ कई बड़े अभियान चलाए हैं और हाल ही में आतंकियों के साथ भीषण मुठभेड़ भी हुई हैं।

टेरर फंडिंग मामले में हिजबुल के मददगार की जमानत अर्जी खारिज
जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने टेरर फंडिंग मामले में प्रतिबंधित आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन के कथित मददगार सैयद इरफान अहमद की जमानत याचिका खारिज कर दी। नजनीनपोरा, शोपियां निवासी आरोपी की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने फोरम शॉपिंग की भी आलोचना की।

कोर्ट ने कहा, जब मामले की सुनवाई हाईकोर्ट में चल रही थी, उसी दौरान आरोपी ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देकर ट्रायल कोर्ट में भी समान राहत के लिए अर्जी दाखिल की। बेंच ने इसे न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग और फोरम शॉपिंग करार दिया। आरोपी पर हिजबुल से जुड़े मामले में अन्य 10 सह-आरोपियों के साथ भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने, आतंकी फंडिंग, हथियार और गोला-बारूद खरीदने तथा आतंकियों की आवाजाही में मदद करने के आरोप हैं। जस्टिस सिंधु शर्मा और जस्टिस शहजाद अजीम की डिवीजन बेंच ने एनआईए मामलों के स्पेशल जज के 22 अप्रैल के आदेश को सही ठहराया, जिसमें आरोपी की जमानत अर्जी खारिज की गई थी।

अभियोजन पक्ष का आरोप
अभियोजन पक्ष के अनुसार, सैयद इरफान अहमद आरोपी नवीद मुश्ताक, इरफान शफी मीर व देवेंद्र सिंह (एंटी-हाइजैकिंग यूनिट में पुलिस अधिकारी थे) के बीच बिचौलिए की भूमिका निभा रहा था। कोर्ट ने माना आरोपी ने फरवरी 2019 में अपने सगे भाई हिजबुल के जिला कमांडर और अन्य आतंकियों को शोपियां से जम्मू तक सुरक्षित पहुंचाने में मदद की थी। उनका उद्देश्य आतंकियों को पाकिस्तान भेजना था। बेंच ने फंड ट्रांसफर, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और साजिश में संलिप्तता से जुड़े आरोपों का भी उल्लेख किया।

बचाव पक्ष की दलील
बचाव पक्ष के वकील ने कहा, आरोपी का पिछला रिकॉर्ड बेदाग है। वह सरकारी कर्मी होने के साथ पीएचडी स्कॉलर भी है। साथ ही अभियोजन पक्ष के गवाहों ने उसके खिलाफ आरोपों का समर्थन नहीं किया है।

हाईकोर्ट की टिप्पणी
हाईकोर्ट ने कहा, 16 दिसंबर 2022 को उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोप तय किए जा चुके हैं। ऐसे में यूएपीए की धारा 43-डी(5) के प्रावधान लागू होते हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि गंभीर आतंकी आरोपों वाले मामले में ट्रायल में देरी जमानत का आधार नहीं बन सकती।

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