सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Jammu News ›   For the first time, silt accumulated at the base of the Salal Dam will be cleared.

Kathua: इतिहास में पहली बार सलाल बांध की तलहटी तक जमा गाद होगी साफ, बढ़ेगी बिजली उत्पादन क्षमता

साहिल खजूरिया, संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ Published by: Nikita Gupta Updated Wed, 13 May 2026 01:11 PM IST
विज्ञापन
सार

सलाल बांध में पहली बार बड़े पैमाने पर गाद हटाने (डिसिल्टिंग) का काम शुरू किया जा रहा है। इससे बिजली उत्पादन में सुधार होगा, टरबाइन पर दबाव कम होगा और सलाल पावर स्टेशन की कार्यक्षमता बेहतर होगी।

For the first time, silt accumulated at the base of the Salal Dam will be cleared.
सलाल बांध - फोटो : NHPC
विज्ञापन

विस्तार

सिंधु जल समझौते को स्थगित करने के बाद अब भारत सरकार अपने संसाधनों का पूरी तरह से इस्तेमाल करने में जुट गई है। अस्सी के दशक में बने रियासी जिले के सलाल पॉवर स्टेशन में बांध जलाशय की तलहटी की गाद को पहली बार निकाला जाएगा।

Trending Videos


सिंधु जलसंधि की एवज में पाकिस्तान की शुरुआती दौर में आपत्तियों के चलते बांध के स्ल्यूस गेट बंद कर दिए गए थे। इससे 80 फीसदी तक जलाशय में गाद जमा हो गई। इसका असर बांध की उत्पादन क्षमता पर पड़ता रहा। टरबाइन में गाद जाने से मरम्मत लागत और समय भी बढ़ता रहा। सलाल पाॅवर स्टेशन 690 मेगावाट क्षमता की रन आफ द रिवर परियोजना है। यह चिनाब नदी की जलविद्युत क्षमता का दोहन करती है। पावर स्टेशन को अलग-अलग चरणों में 1987,1993, 1994 व 1995 में कमिशन किया गया था।
विज्ञापन
विज्ञापन


बीते साल केंद्र के निर्देश पर सलाल परियोजना से ड्रेजिंग के जरिए गाद निकालने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। हालांकि स्ल्यूस गेट पहली बार खोले जा रहे हैं। सलाल पॉवर स्टेशन के ध्यानगढ़ में हाइड्रोग्राफिक सर्वे भी करवाया जा रहा है।

स्लयूस गेटों की मरम्मत और उन्हें परिचालन योग्य बनाने के लिए एनएचपीसी ने 516.63 करोड़ की लागत से निविदाएं शुरू कर दी हैं। इस कार्य में सिविल और हाइड्रो-मैकेनिकल सुधार शामिल हैं। ये काम 822 दिनों में पूरा करने का लक्ष्य है। सूत्रों के अनुसार डिसिल्टिंग न होने से हर साल जलाशयों की क्षमता दो से तीन प्रतिशत तक घट रही थी। अब जल उपलब्धता सुनिश्चित होने से बिजली उत्पादन दक्षता बढ़ेगी। टरबाइन पर दबाव कम होगा। जलाशय में अधिक मात्रा में पानी रोका जा सकेगा।

इसलिए जरूरी हैं अंडर स्लयूस गेट
अंडर स्लयूस गेट बांध की सुरक्षा व क्षमता बनाए रखने का सबसे अहम हैं। यह जलाशय में साल-दर-साल जमा होने वाली सिल्ट (गाद) को बाहर निकालता है। सिल्ट न हटाए जाने से जलाशय की क्षमता घटती है और बांध कमजोर पड़ सकता है। इन गेटों का संचालन संतुलन का काम है। बहुत अधिक खोलने पर पानी की हानि होती है और कम खोलने पर सिल्ट जमा होती रहती है। बाढ़ के समय इन्हें लंबे समय तक खोला जाता है जबकि सूखे मौसम में केवल सिल्ट निकालने के लिए खोला जाता है। यदि गेट फंस जाए या लीक करने लगे तो पूरा बांध खतरे में पड़ सकता है, इसलिए इनकी नियमित जांच, धुलाई और मरम्मत बेहद जरूरी है।

बग्लिहार परियोजना से भी निकाली जाएगी गाद
पहलगाम आतंकी हमले के बाद सिंधु जलसंधि स्थगित करने के बाद ही चिनाब पर बने बग्लिहार प्रोजेक्ट के गेट बंद किए जा चुके हैं। अब इसके जलाशय की क्षमता को बढ़ाने के लिए इसके भीतर जमा गाद निकालने का काम भी होने जा रहा है। प्रदेश के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि फिलहाल गाद निकालने के लिए निविदा आमंत्रित की गई है। ऐसे में जलाशय की क्षमता भी बढ़ेगी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed