पिता की गोद में सिसकती मासूम: 'पापा मैंने आपको आवाज लगाई थी, अंकल ने मेरा मुंह दबा दिया, मैं बोल नहीं पाई'
जम्मू के बिश्नाह इलाके में मासूम से दुष्कर्म की खबर ने पूरे जम्मू को झकझोर दिया है। हर जुबां पर आक्रोश है।
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पूरी रात मेरी फूल सी बच्ची कराहती रही...। रह-रह यही कहती-दर्द हो रहा है...। कुछ खाया भी नहीं...। जानती हैं जब मैंने इसे गोद में उठाया तो यह क्या बोली-पापा मैंने आपको आवाज लगाई थी। अंकल ने मेरा मुंह दबा दिया...। मैं बोल नहीं पाई। अब आप बताइए..कितनी मासूम है ये। दरिंदे को अंकल कह रही थी। यह कहते हुए दुष्कर्म पीड़िता साढ़े तीन साल की बच्ची के पिता का गला भर्रा आता है। आंखों से आंसू की धार छलक पड़ती है...। कुछ पल का सन्नाटा...।
बिश्नाह इलाके में मासूम से दुष्कर्म की खबर ने पूरे जम्मू को झकझोर दिया है। हर जुबां पर आक्रोश है। बच्ची और परिवार का हाल जानने के लिए हम एसएमजीएस अस्पताल पहुंचे। अस्पताल के गलियारे में फिनाइल की तीखी गंध के बीच मरीजों के तीमारदारों की बातें थीं तो कुछ सिसकियां भी...। हम बच्ची के पिता को तलाशते अल्ट्रासाउंड रूम तक पहुंच गए। पिता से बच्ची का हाल पूछा तो वह इस दर्द में भी हाथ जोड़कर नमस्कार करना नहीं भूले। गोद में ली गई बच्ची का चेहरा और सूखे पड़े होठ बता रहे थे कि वह कितनी पीड़ा में है। आंखें मिलते ही वह मुस्कुरा दी। नन्ही परी की इस फीकी मुस्कान से हमारी आंखें डबडबा आईं। इस मूक और आंसुओं के संवाद में सवाल मौन हो गए।
बच्ची के पिता ने कहा कि मेरे दोस्त ने मुझे फोन करके बताया कि एक डाॅक्टर की क्लीनिक के बाहर बच्ची खड़ी है। उसके शरीर से खून बह रहा है। हमें लगा कि कोई हादसा हो गया। उसके पास पहुंचने के लिए बेतहाशा भागे। इस हाल में मिली मेरी बच्ची।
रोटी लेकर सब्जी मांगने आया था...बच्ची को उठा ले गया
पिता ने घटनाक्रम सुनाते हुए कहा कि आरोपी हाथ में रोटी लेकर आया था। खाने के लिए सब्जी नहीं थी उसके पास। सब्जी मांगने आया था। साथ में रह रहीं मेरी सास ने उसे भगा दिया। इसके बाद वह घर के बाहर टहल रही बच्ची को उठा ले गया। हमने कभी नहीं सुना कि इस तरह की दरिंदगी हुई है...। मेरी बच्ची ने उसका क्या बिगाड़ा था? ऐसे दरिंदों को सख्त सजा मिले नहीं तो ये बेटियों के लिए सुरक्षित इस शहर को बर्बाद कर देंगे।
बिन मां की बच्ची को पाल-पोस रहा था पिता
जिस बच्ची की हंसी उसके पिता के हर गम की दवा थी, आज उसके पीले पड़े चेहरे पर फीकी मुस्कान देख आंखों से आंसू की धार बह निकली। यही कोई 30-32 साल की उम्र में बिना मां की बच्ची को पाल रहे पिता का जैसे हौसला जवाब दे गया। संभलते हुए बोलते हैं-जी मैं मेहनत-मजदूरी करता हूं। पिछले साल पत्नी की मौत हो गई। इसे इसकी नानी-मौसी संभालती हैं।
नानी, मौसी, पड़ोसी सभी की मांग- आरोपी को मिले सख्त सजा
बच्ची के पड़ोस में रहने वाले भी उसे देखने पहुंचे थे। कहने लगे कि कुछ वक्त पहले तक हमारे बच्चों के साथ खेल रही थी। हमें क्या मालूम था कि क्या होने वाला है। बच्ची की नानी, मौसी और पड़ोसियों ने कहा कि पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है, पर उसे सख्त सजा मिलना जरूरी है।