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अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई विधानसभा तक पहुंची: अवैध कब्जे तो हट नहीं रहे, पिट रही जेडीए की टीम
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
Published by: निकिता गुप्ता
Updated Mon, 16 Feb 2026 01:22 PM IST
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सार
जम्मू में अवैध कब्जे हटाने के अभियान के दौरान जेडीए और पुलिस टीम पर कई जगह विरोध और पथराव हुआ, जिससे कर्मचारी घायल हुए और कार्रवाई विधानसभा तक चर्चा का विषय बनी।
बेलीचराना में तोड़े गए घर, जहां पर बवाल हुआ था।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
शहर में अवैध कब्जों के खिलाफ चल रहा अभियान प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। पिछले कुछ महीनों में कई स्थानों पर कार्रवाई के दौरान जम्मू विकास प्राधिकरण (जेडीए) की टीम को न केवल तीखा विरोध झेलना पड़ा बल्कि पथराव और धक्का-मुक्की की घटनाएं भी सामने आईं।
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अतिक्रमण हटाते समय कभी-कभी हालात इतने बिगड़े कि मामला जम्मू-कश्मीर विधानसभा तक पहुंच गया जहां कार्रवाई की कार्यप्रणाली और सुरक्षा इंतजामों पर सवाल भी उठते नजर आए। बीते 14 फरवरी को बेलीचराना में सरकारी जमीन पर निर्माणाधीन अवैध मकानों को ध्वस्त करने पहुंची राजस्व, जेडीए और पुलिस टीम पर पथराव हुआ और कई कर्मचारी घायल हुए।
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इससे पहले 17 जनवरी को भी इसी क्षेत्र में टीम को स्थानीय विरोध के चलते लौटना पड़ा था और इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने गाड़ी के शीशे तोड़ दिए थे। पांच दिसंबर को गोल गुजराल में अतिक्रमण हटाने पहुंची संयुक्त टीम को गुज्जर समुदाय के आक्रोश का सामना करना पड़ा। इस दौरान पथराव में एसएचओ समेत तीन पुलिस अधिकारी, एक हेड कांस्टेबल, जेसीबी चालक और एक मीडियाकर्मी भी घायल हुआ था और स्थिति ऐसी बनी कि टीम को पीछे हटना पड़ा।
इसी तरह सतवारी, त्रिकुटा नगर, बाहु फोर्ट, तालाब तिल्लो और नरवाल में भी कार्रवाई के दौरान तनाव की स्थिति देखने को मिली थी। इतना ही नहीं कई जगह अतिक्रमण हटाने के बाद दोबारा कब्जे की शिकायतें सामने आईं, जो इन दिनों अभियान की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े रहे हैं। इससे साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि कई मामलों में स्थानीय पुलिस को समय रहते पर्याप्त सूचना नहीं मिल पाती या संवेदनशील इलाकों में सीमित बल के साथ टीम नहीं भेजी जाती है। इससे नोटिस अवधि के दौरान निगरानी की कमी के कारण अतिक्रमणकारी संगठित होकर विरोध की तैयारी कर लेते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि संयुक्त एक्शन प्लान, पर्याप्त पुलिस बल और कार्रवाई के बाद कड़ी निगरानी के बिना यह अभियान सफल नहीं हो सकता। अन्यथा हर कार्रवाई टकराव में बदलती रहेगी और शहर में अवैध कब्जों पर स्थायी लगाम लगाना मुश्किल बना रहेगा।
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