Kishtwar: किश्तवाड़ में नाबालिग की मौत पर गरमाया मामला, एनसीएसटी से एससी-एसटी एक्ट लगाने की मांग
किश्तवाड़ में 15 वर्षीय गुज्जर नाबालिग की गर्भपात की प्रक्रिया के दौरान मौत के मामले में आदिवासी संगठन ने एनसीएसटी से हस्तक्षेप और एससी/एसटी एक्ट के तहत कार्रवाई की मांग की है।
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किश्तवाड़ जिले में 15 वर्षीय गुज्जर नाबालिग की यौन उत्पीड़न के बाद गर्भावस्था और र्भपात के दौरान मौत के मामले में आदिवासी संगठन ने राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (एनसीएसटी) से हस्तक्षेप की मांग की है। ट्राइबल गुज्जर बकरवाल वेलफेयर फाउंडेशन (टीजीबीडब्ल्यूएफ) ने मामले में एससी/एसटी अधिनियम की धाराएं लागू करने, जांच की निगरानी और पीड़ित परिवार को मुआवजा देने की मांग की है।
संगठन की ओर से उसके सदस्य ट्रस्टी कबीर अहमद ने एनसीएसटी को शिकायत भेजकर मामले का तत्काल संज्ञान लेने और जांच पूरी होने तक संबंधित अधिकारियों से समय-समय पर प्रगति रिपोर्ट लेने का आग्रह किया है।
शिक्षक और उसका भाई गिरफ्तार
पुलिस ने शुक्रवार को मामले में आरोपी खालिद अहमद शेख को गिरफ्तार किया। वह इंद्रवाल गांव के एक सरकारी मिडिल स्कूल में ग्रेड-II शिक्षक और प्रभारी मुख्याध्यापक था। पुलिस ने उसके भाई को भी गिरफ्तार किया है।
अधिकारियों के मुताबिक दोनों आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराओं के साथ-साथ पॉक्सो अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
एससी/एसटी एक्ट लागू करने की मांग
टीजीबीडब्ल्यूएफ ने अपनी शिकायत में कहा कि मृतका गुज्जर समुदाय से थी, जो अधिसूचित अनुसूचित जनजाति है, जबकि आरोपी अनुसूचित जनजाति से नहीं है। संगठन का आरोप है कि इसके बावजूद मामले में एससी/एसटी एक्ट की धाराएं नहीं लगाई गई हैं।
संगठन ने एनसीएसटी से पुलिस को इस विशेष कानून के प्रावधान लागू करने का निर्देश देने की मांग की है। साथ ही गर्भावस्था सामने आने के बाद पर धमकी, पैसों का लालच और पंचायत के जरिए मामले को दबाने या समझौता कराने की कोशिशों की भी जांच की मांग की गई है।
मेडिकल प्रक्रिया से जुड़े लोगों की जांच की मांग
संगठन ने गर्भपात की प्रक्रिया से जुड़े चिकित्सकों, बिचौलियों और अन्य लोगों की भूमिका की जांच की मांग की है। इसके अलावा इलेक्ट्रॉनिक संदेश, कॉल रिकॉर्ड, वित्तीय लेन-देन, स्कूल और मेडिकल रिकॉर्ड, दवाओं के पर्चे तथा फार्मेसी रिकॉर्ड जैसे सभी संभावित साक्ष्यों को सुरक्षित रखने और उनकी जांच कराने की अपील की गई है। टीजीबीडब्ल्यूएफ ने यह भी जांचने की मांग की है कि क्या किसी ऐसे व्यक्ति को घटना की पहले से जानकारी थी, जिसने पॉक्सो कानून के तहत अनिवार्य रिपोर्टिंग की जिम्मेदारी पूरी नहीं की।
परिवार की सुरक्षा और मुआवजे की मांग
संगठन ने नाबालिग के माता-पिता, भाई-बहनों और महत्वपूर्ण गवाहों को दबाव, धमकी या जबरदस्ती से सुरक्षा देने की मांग की है। साथ ही परिवार को कानून के तहत मिलने वाले मुआवजे और पुनर्वास लाभ उपलब्ध कराने की अपील की गई है।
संगठन ने जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिव पुलिस महानिदेशक और अन्य संबंधित अधिकारियों से मामले में की गई कार्रवाई की रिपोर्ट एनसीएसटी के समक्ष प्रस्तुत करने का आग्रह किया है। साथ ही मृत नाबालिग और उसके परिवार की पहचान और गरिमा की रक्षा करने की अपील की गई है।
घटना के बाद किश्तवाड़ में प्रदर्शन
सूत्रों के अनुसार, नाबालिग की मौत गुरुवार देर शाम एक मृत बच्चे को जन्म देने के बाद हुई। स्थानीय लोगों के मुताबिक वह कई महीनों से गर्भवती थी। करीब दो सप्ताह पहले पेट में दर्द की शिकायत के बाद उसे स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां जांच में गर्भावस्था का पता चला। इसके बाद उसने कथित तौर पर अपने माता-पिता को शिक्षक द्वारा पिछले कुछ महीनों से यौन उत्पीड़न किए जाने की जानकारी दी।
स्थानीय लोगों ने आरोपी पर परिवार को पैसे देने और पुलिस के पास जाने पर धमकी देने के आरोप भी लगाए हैं। बाद में आरोपी और उसका भाई नाबालिग को उसके पिता और चाचा के साथ किश्तवाड़ के एक स्वास्थ्य केंद्र ले गए, जहां से उसे दूसरे स्वास्थ्य केंद्र में रेफर किया गया। वहां गर्भपात की प्रक्रिया के दौरान उसने मृत बच्चे को जन्म दिया। इसके बाद उसकी हालत बिगड़ गई और उसकी भी मौत हो गई। घटना के विरोध में शुक्रवार को छत्रू क्षेत्र में बंद रहा। शुक्रवार की नमाज के बाद किश्तवाड़ के कई इलाकों में भी प्रदर्शन हुए।