'वह लड़खड़ाया, रुका नहीं': पहली गोली टायसन ने झेली, फिर ढेर हुआ जैश का टॉप कमांडर, आतंकियों की साजिश रही नाकाम
किश्तवाड़ के छात्रू में आतंकवाद विरोधी अभियान के दौरान सेना के खोजी कुत्ते टायसन ने आतंकियों के ठिकाने का पता लगाया और मुठभेड़ में पहली गोली खुद खाकर जवानों की रक्षा की। फैंटम और केंट की तरह टायसन की बहादुरी ने एक बार फिर साबित किया कि सेना के ये मूक प्रहरी हर ऑपरेशन की बड़ी ताकत हैं।
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जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद विरोधी अभियानों में भारतीय सेना के जांबाज जवानों के साथ-साथ खोजी कुत्तों की भूमिका हमेशा से बेहद अहम रही है।किश्तवाड़ में ऑपरेशन के दौरान टायसन की भूमिका अहम रही। आतंकियों के ठिकाने का सटीक पता इसी बहादुर श्वान ने लगाया था और मुठभेड़ शुरू होते ही आतंकियों की पहली गोली भी टायसन ने ही खाई।
किश्तवाड़ के छात्रू में आतंकियों के साथ मुठभेड़ में पहला मौका नहीं है जब सेना के इन मूक प्रहरियों ने ऑपरेशनों में अपनी जान पर खेलकर जवानों की मदद की है। सेना के श्वानों ने देश के लिए पहले भी अपना खून बहाया है।
28 अक्तूबर 2024 को अखनूर सेक्टर में एक आतंकरोधी ऑपरेशन के दौरान गोलीबारी में खोजी कुत्ते फैंटम ने देश के लिए शहादत दी थी।
सितंबर 2023 में राजोरी में एक मुठभेड़ के दौरान फीमेल लेब्राडोर केंट ने भी सर्वोच्च बलिदान दिया था। आतंकियों का पीछा करते हुए केंट ही ऑपरेशन को लीड कर रही थी तभी अचानक फायरिंग शुरू हो गई और अपने हैंडलर को बचाने के लिए केंट ने खुद गोली खाकर अपनी जान दे दी। इन बेजुबान योद्धाओं की बहादुरी और वफादारी सेना के हर ऑपरेशन की एक बड़ी ताकत है।