लोकसभा चुनाव: जम्मू कश्मीर में माकपा नहीं उतारेगी उम्मीदवार, भाजपा के खिलाफ वोट करेगी मजबूत
माकपा नेता यूसुफ तारिगामी ने कहा कि आगामी लोकसभा चुनाव में जम्मू कश्मीर की पांच लोकसभा सीटों पर कोई उम्मीदवार नहीं उतारेगी।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) (माकपा) आगामी लोकसभा चुनाव में जम्मू कश्मीर की पांच लोकसभा सीटों पर कोई उम्मीदवार नहीं उतारेगी। माकपा के वरिष्ठ नेता एम वाई तारिगामी ने मंगलवार को यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि माकपा लोकसभा चुनावों में भाजपा के खिलाफ वोट मजबूत करेगी। तारिगामी ने मोदी सरकार को तानाशाही करार दिया।
उन्होंने लोकसभा चुनाव के लिए सीट बंटवारे को लेकर पीपुल्स अलायंस फॉर गुपकर डिक्लेरेशन (पीएजीडी) के घटकों के भीतर कथित कलह पर कहा कि यह कोई चुनावी गठबंधन नहीं है और हर घटक के अपने राजनीतिक हित हैं।
तारिगामी ने कहा, 'हम सीधे (जम्मू-कश्मीर में लोकसभा चुनाव) नहीं लड़ेंगे। आज के समय में हमारा राजनीतिक दृष्टिकोण भाजपा को हराना होगा, उन्हें सरकार बनाने से रोकना होगा। उन्होंने पहले ही जम्मू-कश्मीर को बहुत नुकसान पहुंचाया है।'
उन्होंने कहा, "हम अन्य राजनीतिक दलों से भी यह सुनिश्चित करने की अपील करते हैं कि वोट विभाजित न हों। हमें उम्मीद है कि हम जल्द ही तानाशाहों से छुटकारा पा लेंगे।"
गुलाम नबी आजाद के नेतृत्व वाली डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव आजाद पार्टी, अल्ताफ बुखारी की अपनी पार्टी और सज्जाद लोन की अध्यक्षता वाली पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के एक साथ आने की खबरों के बारे में पूछे जाने पर तारिगामी ने कहा, "हमें अपने लोगों के प्रति वफादार होना चाहिए था। वे एक साथ मिलकर एक महागठबंधन बना रहे हैं। किसके खिलाफ? मैं इसका स्वागत करता अगर इस गठबंधन का उद्देश्य हमारे प्रदेश और हमारे भूमि अधिकारों जैसी लोगों की वास्तविक चिंताओं को उठाना होता।
माकपा नेता ने कहा, "मतभेदों को एक तरफ रखते हुए, हमें कम से कम अपने लोगों के प्रति वफादार रहना चाहिए था। उन्हें लोगों के अधिकारों के लिए लड़ाई लड़नी चाहिए थी।"
उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि जम्मू-कश्मीर हमेशा गोलीबारी के दौरा में रहा है। तारिगामी ने कहा, "आज की सरकार ने केंद्र और लोगों के बीच समझौते की नींव को ध्वस्त करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। हमें हमेशा हमारे संवैधानिक अधिकारों से वंचित किया गया है। उन्होंने (भाजपा) अनुच्छेद 370 को भी नष्ट कर दिया।"
तारिगामी ने कहा, "अगर भाजपा के पास स्पष्ट रोडमैप होता, तो वे तानाशाही रवैया का सहारा नहीं लेते। उन्होंने जम्मू-कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेश में बदल दिया। यहां सरकारी कर्मचारियों की दुर्दशा देखें। उन्हें विरोध करने की भी अनुमति नहीं है।"
उन्होंने कहा, "जम्मू और कश्मीर एकमात्र स्थान है जहां पिछले 10 वर्षों में विधानसभा चुनाव नहीं हुए हैं। लोगों की आकांक्षाओं को ध्यान में रखे बिना एक राज्य को विभाजित किया गया। घटक दलों ने जो भी बयान दिए हैं, वे पीएजीडी के विचार को नहीं बदलते हैं।"
तारिगामी ने कहा कि भाजपा के नेताओं के बीच भी मतभेद हैं। चुनावी बांड को "बड़ा घोटाला" करार देते हुए उन्होंने भाजपा पर निशाना साधा और कहा, "यदि आप भ्रष्टाचार करना चाहते हैं, तो कानून के नाम पर ऐसा न करें। माकपा ने एक पैसा भी नहीं लिया है चुनावी बांड के माध्यम से।"
उन्होंने कहा, "वास्तव में, हम सुप्रीम कोर्ट में चुनावी बांड के खिलाफ याचिका दायर करने वाले पहले व्यक्ति थे। लोगों को यह समझने में ज्यादा समय नहीं लगना चाहिए कि देश में इन दिनों क्या चल रहा है।"
भ्रष्टाचार के विभिन्न मामलों में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और झारखंड के पूर्व प्रमुख हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी पर तारिगामी ने कहा, "संविधान पर हमला हो रहा है। लोकतंत्र पर हमला है। अगर आप किसी पार्टी को कमजोर करना या तोड़ना चाहते हैं, तो ईडी और सीबीआई को उनके पीछे लगा देते हैं ।
गृह मंत्री अमित शाह के हालिया बयान के बारे में पूछे जाने पर कि केंद्र सरकार जम्मू-कश्मीर में सशस्त्र बल विशेष अधिकार अधिनियम (एएफएसपीए) को हटाने पर विचार करेगी, उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार केवल झूठे वादे करती आई है। लोकतंत्र में ऐसे कानून के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए।
"शाह ने कहा था कि पहले परिसीमन होगा, फिर चुनाव और फिर राज्य का दर्जा। उस कालक्रम का क्या हुआ? यदि लोकसभा चुनावों के लिए (जम्मू-कश्मीर में) माहौल संभव है, तो विधानसभा चुनावों के लिए क्यों नहीं? आप इसके बारे में जानते ही होंगे।