कांग्रेस की झारखंड इकाई ने राहुल गांधी को लोकसभा की सदस्यता से अयोग्य ठहराए जाने के विरोध में रविवार को यहां एक दिवसीय 'संकल्प सत्याग्रह' किया। रामेश्वर उरांव और बन्ना गुप्ता सहित पार्टी के वरिष्ठ नेता रांची के मोरहाबादी मैदान में बापू वाटिका में एकत्र हुए। उन्होंने कहा कि भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार अदाणी मुद्दे पर गांधी की मुखर आवाज से डरा हुआ है।
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बापू वाटिका में कांग्रेस नेता व कार्यकर्ता
- फोटो : ट्विटर/झारखंड कांग्रेस
'राहुल को अयोग्य ठहराने में की गई जल्दबाजी'
झारखंड कांग्रेस प्रमुख राजेश ठाकुर ने पत्रकारों से कहा, लोकसभा सचिवालय द्वारा राहुल को अयोग्य ठहराने में दिखाई गई जल्दबाजी दिखाती है कि केंद्र की भाजपा सरकार अदाणी मुद्दे पर उनकी मुखर आवाज से डरी हुई है।
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बापू वाटिका में कांग्रेस नेता व कार्यकर्ता
- फोटो : ट्विटर/झारखंड कांग्रेस
मानहानि मामले में ठहराया राहुल गांधी को दोषी
सूरत की एक अदालत ने हाल ही में राहुल गांधी को 2019 के आपराधिक मानहानि मामले में दोषी ठहराया और उन्हें दो साल की सजा सुनाई। हालांकि, उन्हें तुरंत की जमानत भी मिल गई। इसके एक दिन बाद ही शुक्रवार को उन्हें लोकसभा की सदस्यता से अयोग्य घोषित कर दिया गया। यह अयोग्यता गांधी को आठ साल तक चुनाव लड़ने पर रोक देगी, जब तक कि ऊपरी अदालत उनकी दोषसिद्धि और सजा पर रोक नहीं लगाती है।
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बापू वाटिका में कांग्रेस नेता व कार्यकर्ता
- फोटो : ट्विटर/दीपिका पांडे
राहुल की आवाज को चुप कराने का प्रयास: राजेश ठाकुर, प्रदेश कांग्रेस प्रमुख
ठाकुर ने कहा, केंद्र ने राहुल गांधी की आवाज को चुप कराने का प्रयास किया है। लेकिन, वे गलत हैं। उनकी आवाज को दबाया नहीं जा सकता। हम सच्चाई और न्याय के लिए राज्य भर में ब्लॉक से लेकर जिला स्तर तक आंदोलन करेंगे। कांग्रेस की राष्ट्रीय सचिव दीपिका पांडे सिंह ने कहा, यह आम आदमी के लिए भी लड़ाई है, जिसकी मेहनत की कमाई को केंद्र द्वारा एक विशेष कॉर्पोरेट हाउस को लाभ पहुंचाने के लिए जोखिम में डाला जा रहा है।
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दीपक प्रकाश
- फोटो : ट्विटर/दीपक प्रकाश
घड़ियाली आंसू बहा रहे कांग्रेस नेता: दीपक प्रकाश, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष
संकल्प सत्याग्रह पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा के झारखंड इकाई के अध्यक्ष दीपक प्रकाश ने कहा, यह और कुछ नहीं बल्कि कांग्रेस द्वारा किया गया नाटक है। कांग्रेस के नेता राजनीतिक लाभ लेने के लिए घड़ियाली आंसू बहा रहे हैं। यह अदालत का फैसला है और उन्हें इसका सम्मान करना चाहिए। अगर उन्हें (कांग्रेस) यह उचित नहीं लगता है, तो उनके पास इसे ऊपरी अदालत में चुनौती देने का विकल्प भी है।
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