{"_id":"6a1694dfdc547471b60753ed","slug":"ambulance-becomes-cot-for-pregnant-woman-exposes-the-poor-health-system-in-giridih-ranchi-news-c-1-1-noi1475-4327788-2026-05-27","type":"story","status":"publish","title_hn":"Jharkhand: सिस्टम शर्मसार! प्रसव पीड़ा से तड़प रही गर्भवती को नहीं मिली एम्बुलेंस, खाट पर ले जाना पड़ा अस्पताल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Jharkhand: सिस्टम शर्मसार! प्रसव पीड़ा से तड़प रही गर्भवती को नहीं मिली एम्बुलेंस, खाट पर ले जाना पड़ा अस्पताल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
Published by: राँची ब्यूरो
Updated Wed, 27 May 2026 01:35 PM IST
विज्ञापन
सार
गिरिडीह के दालुवाडीह गांव में सड़क नहीं होने के कारण प्रसव पीड़िता सुनीता सोरेन को खाट पर अस्पताल पहुंचाया गया। एम्बुलेंस गांव तक नहीं पहुंच सकी। घटना ने स्वास्थ्य व्यवस्था और ग्रामीण सुविधाओं की बदहाली उजागर कर दी।
प्रसव पीड़ित महिला को अस्पताल ले जाते ग्रामीण
- फोटो : Amar Ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
विस्तार
झारखंड के गिरिडीह जिले से इंसानियत को झकझोर देने वाली तस्वीर सामने आई है। प्रसव पीड़ा से तड़प रही एक गर्भवती महिला को एम्बुलेंस नहीं मिलने पर ग्रामीणों को उसे खाट पर लिटाकर अस्पताल पहुंचाना पड़ा। इस घटना ने राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था और ग्रामीण इलाकों में बुनियादी सुविधाओं की बदहाली को उजागर कर दिया है।
मामला गिरिडीह जिले के पीरटांड़ प्रखंड अंतर्गत मधुबन थाना क्षेत्र के दालुवाडीह गांव का है। गांव निवासी सुनीता सोरेन को अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हुई। परिजनों ने तत्काल एम्बुलेंस सेवा से संपर्क किया, लेकिन गांव तक सड़क नहीं होने के कारण एम्बुलेंस पहुंचने से मना कर दिया गया।
चार किलोमीटर तक खाट पर ढोया
एम्बुलेंस नहीं मिलने के बाद परिजन और ग्रामीण मजबूरी में सुनीता सोरेन को खाट पर लिटाकर उबड़-खाबड़ रास्तों से करीब चार किलोमीटर पैदल चलकर पिपराडीह मुख्य सड़क तक लेकर पहुंचे। वहां से किसी तरह वाहन की व्यवस्था कर उन्हें अस्पताल भेजा गया। इस घटना का वीडियो और तस्वीरें अब इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई हैं।
विज्ञापन
मंत्री के क्षेत्र में बदहाल व्यवस्था
विडंबना यह है कि यह इलाका राज्य के नगर विकास मंत्री सुदीव्य कुमार सोनू के विधानसभा क्षेत्र में आता है। इसके बावजूद ग्रामीण आज भी सड़क और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पिपराडीह तक सड़क बनी हुई है, लेकिन उसके आगे दालुवाडीह समेत कई गांव आज भी सड़क सुविधा से वंचित हैं। इसका असर कुरुवारांड, डाहिया, ईटाबेड़ा, गाड़ापरोम, सहेरबेड़ा, जिरबेड़ा, सतकटिया और बोरवाबेड़ा जैसे गांवों के हजारों लोगों पर पड़ रहा है।
ये भी पढ़ें- Jharkhand: राज्यसभा चुनाव पर रार, झामुमो ने चुनाव आयोग को लिखा पत्र; केंद्रीय एजेंसियों पर निगरानी की मांग
'रोड नहीं तो वोट नहीं' की चेतावनी
घटना के बाद ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों पर उपेक्षा का आरोप लगाया है। ग्रामीणों का कहना है कि चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन बाद में गांवों की सुध लेने वाला कोई नहीं रहता। लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द सड़क निर्माण नहीं हुआ तो आगामी चुनाव में “रोड नहीं तो वोट नहीं” अभियान चलाया जाएगा।
पहले भी सामने आ चुकी हैं ऐसी घटनाएं
ग्रामीणों के मुताबिक यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी कई बीमार और गर्भवती महिलाओं को खाट पर अस्पताल पहुंचाना पड़ा है, लेकिन प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। सुनीता सोरेन को खाट पर अस्पताल ले जाने की तस्वीरें अब सरकार के विकास दावों पर सवाल खड़े कर रही हैं।
मामला गिरिडीह जिले के पीरटांड़ प्रखंड अंतर्गत मधुबन थाना क्षेत्र के दालुवाडीह गांव का है। गांव निवासी सुनीता सोरेन को अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हुई। परिजनों ने तत्काल एम्बुलेंस सेवा से संपर्क किया, लेकिन गांव तक सड़क नहीं होने के कारण एम्बुलेंस पहुंचने से मना कर दिया गया।
विज्ञापन
विज्ञापन
चार किलोमीटर तक खाट पर ढोया
एम्बुलेंस नहीं मिलने के बाद परिजन और ग्रामीण मजबूरी में सुनीता सोरेन को खाट पर लिटाकर उबड़-खाबड़ रास्तों से करीब चार किलोमीटर पैदल चलकर पिपराडीह मुख्य सड़क तक लेकर पहुंचे। वहां से किसी तरह वाहन की व्यवस्था कर उन्हें अस्पताल भेजा गया। इस घटना का वीडियो और तस्वीरें अब इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई हैं।
Trending Videos
मंत्री के क्षेत्र में बदहाल व्यवस्था
विडंबना यह है कि यह इलाका राज्य के नगर विकास मंत्री सुदीव्य कुमार सोनू के विधानसभा क्षेत्र में आता है। इसके बावजूद ग्रामीण आज भी सड़क और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पिपराडीह तक सड़क बनी हुई है, लेकिन उसके आगे दालुवाडीह समेत कई गांव आज भी सड़क सुविधा से वंचित हैं। इसका असर कुरुवारांड, डाहिया, ईटाबेड़ा, गाड़ापरोम, सहेरबेड़ा, जिरबेड़ा, सतकटिया और बोरवाबेड़ा जैसे गांवों के हजारों लोगों पर पड़ रहा है।
ये भी पढ़ें- Jharkhand: राज्यसभा चुनाव पर रार, झामुमो ने चुनाव आयोग को लिखा पत्र; केंद्रीय एजेंसियों पर निगरानी की मांग
'रोड नहीं तो वोट नहीं' की चेतावनी
घटना के बाद ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों पर उपेक्षा का आरोप लगाया है। ग्रामीणों का कहना है कि चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन बाद में गांवों की सुध लेने वाला कोई नहीं रहता। लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द सड़क निर्माण नहीं हुआ तो आगामी चुनाव में “रोड नहीं तो वोट नहीं” अभियान चलाया जाएगा।
पहले भी सामने आ चुकी हैं ऐसी घटनाएं
ग्रामीणों के मुताबिक यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी कई बीमार और गर्भवती महिलाओं को खाट पर अस्पताल पहुंचाना पड़ा है, लेकिन प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। सुनीता सोरेन को खाट पर अस्पताल ले जाने की तस्वीरें अब सरकार के विकास दावों पर सवाल खड़े कर रही हैं।