{"_id":"6a6c43f0c543a3b658035a1f","slug":"jharkhand-big-decision-hemant-soren-govt-approves-release-of-26-life-convicts-open-jail-planned-2026-07-31","type":"story","status":"publish","title_hn":"Jharkhand: हेमंत सोरेन सरकार का बड़ा फैसला, 79 आजीवन कैदियों में 26 की रिहाई को मंजूरी; खुलेगी ओपन जेल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Jharkhand: हेमंत सोरेन सरकार का बड़ा फैसला, 79 आजीवन कैदियों में 26 की रिहाई को मंजूरी; खुलेगी ओपन जेल
Fri, 31 Jul 2026 12:13 PM IST
हिमांशु सिंह बघेल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
Published by: हिमांशु सिंह बघेल
Updated Fri, 31 Jul 2026 12:13 PM IST
सार
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में हुई राज्य सजा पुनरीक्षण परिषद की बैठक में 79 आजीवन कैदियों के मामलों की समीक्षा की गई। इनमें 26 कैदियों की रिहाई पर सहमति बनी। साथ ही सभी प्रमंडलों में ओपन जेल खोलने और रिहा कैदियों के पुनर्वास पर विशेष जोर दिया गया।
विज्ञापन
झारखंड सीएम हेमंत सोरेन
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में गुरुवार को मुख्यमंत्री आवासीय कार्यालय, कांके रोड (रांची) में झारखंड राज्य सजा पुनरीक्षण परिषद की बैठक आयोजित हुई। बैठक में आजीवन कारावास की सजा काट रहे 79 कैदियों की रिहाई से जुड़े मामलों की समीक्षा की गई। विस्तृत विचार-विमर्श के बाद 26 कैदियों की रिहाई पर सहमति बनी।
42 अस्वीकृत मामलों पर हुई चर्चा
बैठक में परिषद की ओर से अनुशंसित 37 नए मामलों के अलावा पिछली बैठकों में लंबित या अस्वीकृत 42 मामलों पर भी चर्चा की गई। अधिकारियों ने प्रत्येक मामले में बंदियों के आचरण, जेल में बिताई गई अवधि, पात्रता, कानूनी प्रावधान, न्यायालय की टिप्पणियों तथा संबंधित जिलों के पुलिस अधीक्षक, जेल अधीक्षक और प्रोबेशन अधिकारियों की रिपोर्ट के आधार पर समीक्षा प्रस्तुत की।
सभी प्रमंडलों में ओपन जेल खोलने के निर्देश
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अधिकारियों को राज्य के सभी प्रमंडलों में ओपन जेल स्थापित करने की दिशा में आवश्यक भूमि चिन्हित कर प्रस्ताव तैयार करने का निर्देश दिया। सरकार का मानना है कि सुधारात्मक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए ओपन जेल की व्यवस्था प्रभावी कदम साबित हो सकती है।
विज्ञापन
रिहा होने वाले कैदियों के पुनर्वास पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन कैदियों की रिहाई होगी, उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए पुनर्वास, सामाजिक पुनर्स्थापन और सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर उपलब्ध कराया जाना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि न्यायिक प्रक्रिया के साथ-साथ मानवीय संवेदनाओं और सुधारात्मक सोच को भी समान महत्व दिया जाना चाहिए।
ये भी पढ़ें- सरकारी दावों पोल खुली! 102 एंबुलेंस के इंतजार में बीते पांच घंटे, ई-रिक्शा पर बांधकर ले जाना पड़ा शव
मानसिक रूप से बीमार बंदियों का बनेगा डाटाबेस
मुख्यमंत्री ने कारागारों में निरुद्ध मानसिक रूप से बीमार बंदियों और जेल से रिहा हो चुके ऐसे लोगों का डाटाबेस तैयार करने के निर्देश भी दिए। साथ ही कहा कि पात्र व्यक्तियों को सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ सुनिश्चित कराया जाए, ताकि वे सामान्य जीवन में वापस लौट सकें।
वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद
बैठक में मुख्य सचिव अविनाश कुमार, डीजीपी तदाशा मिश्रा, प्रधान सचिव-सह-विधि परामर्शी (विधि विभाग) नीरज कुमार श्रीवास्तव, महानिरीक्षक कारा एवं सुधारात्मक सेवाएं सुदर्शन प्रसाद मंडल, न्यायिक आयुक्त अनिल कुमार मिश्रा सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
विज्ञापन
42 अस्वीकृत मामलों पर हुई चर्चा
बैठक में परिषद की ओर से अनुशंसित 37 नए मामलों के अलावा पिछली बैठकों में लंबित या अस्वीकृत 42 मामलों पर भी चर्चा की गई। अधिकारियों ने प्रत्येक मामले में बंदियों के आचरण, जेल में बिताई गई अवधि, पात्रता, कानूनी प्रावधान, न्यायालय की टिप्पणियों तथा संबंधित जिलों के पुलिस अधीक्षक, जेल अधीक्षक और प्रोबेशन अधिकारियों की रिपोर्ट के आधार पर समीक्षा प्रस्तुत की।
विज्ञापन
सभी प्रमंडलों में ओपन जेल खोलने के निर्देश
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अधिकारियों को राज्य के सभी प्रमंडलों में ओपन जेल स्थापित करने की दिशा में आवश्यक भूमि चिन्हित कर प्रस्ताव तैयार करने का निर्देश दिया। सरकार का मानना है कि सुधारात्मक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए ओपन जेल की व्यवस्था प्रभावी कदम साबित हो सकती है।
विज्ञापन
रिहा होने वाले कैदियों के पुनर्वास पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन कैदियों की रिहाई होगी, उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए पुनर्वास, सामाजिक पुनर्स्थापन और सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर उपलब्ध कराया जाना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि न्यायिक प्रक्रिया के साथ-साथ मानवीय संवेदनाओं और सुधारात्मक सोच को भी समान महत्व दिया जाना चाहिए।
ये भी पढ़ें- सरकारी दावों पोल खुली! 102 एंबुलेंस के इंतजार में बीते पांच घंटे, ई-रिक्शा पर बांधकर ले जाना पड़ा शव
मानसिक रूप से बीमार बंदियों का बनेगा डाटाबेस
मुख्यमंत्री ने कारागारों में निरुद्ध मानसिक रूप से बीमार बंदियों और जेल से रिहा हो चुके ऐसे लोगों का डाटाबेस तैयार करने के निर्देश भी दिए। साथ ही कहा कि पात्र व्यक्तियों को सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ सुनिश्चित कराया जाए, ताकि वे सामान्य जीवन में वापस लौट सकें।
वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद
बैठक में मुख्य सचिव अविनाश कुमार, डीजीपी तदाशा मिश्रा, प्रधान सचिव-सह-विधि परामर्शी (विधि विभाग) नीरज कुमार श्रीवास्तव, महानिरीक्षक कारा एवं सुधारात्मक सेवाएं सुदर्शन प्रसाद मंडल, न्यायिक आयुक्त अनिल कुमार मिश्रा सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।