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Jharkhand News: झारखंड में मौत का गोला! नदी किनारे मिला WWII का जिंदा बम; सेना को बुलाना पड़ा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
Published by: Ashutosh Pratap Singh
Updated Sat, 21 Mar 2026 07:29 PM IST
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सार
झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले में सुबर्णरेखा नदी के किनारे द्वितीय विश्व युद्ध काल का संदिग्ध जिंदा बम मिलने से हड़कंप मच गया। BDDS टीम ने जांच में इसे सक्रिय और अत्यंत शक्तिशाली बताया, जिसे सामान्य प्रक्रिया से निष्क्रिय करना संभव नहीं है।
झारखंड में मिला द्वितीय विश्व युद्ध का जिंदा बम
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के बहरागोड़ा क्षेत्र में सुबर्णरेखा नदी के किनारे बालू खनन के दौरान एक बड़ा और खतरनाक विस्फोटक मिलने से हड़कंप मच गया। करीब 250 किलो वजनी सिलेंडरनुमा इस बम को ग्रामीणों ने देखा और तुरंत इसकी सूचना पुलिस को दी।
स्थानीय पुलिस और सेना ने मौके पर पहुंचकर इस बम को अपने कब्जे में लिया और जांच के बाद इसे सुरक्षित तरीके से निष्क्रिय कर दिया। राहत की बात यह रही कि पूरे ऑपरेशन के दौरान किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई।
‘Made in America’ और AN-M64 की मार्किंग
बरामद बम पर ‘AN-M64’ और ‘Made in America’ अंकित था। शुरुआती जांच में इसका वजन करीब 500 पाउंड यानी 227 से 250 किलोग्राम बताया जा रहा है। यह बम अत्यंत विनाशकारी श्रेणी का माना जाता है, जिसका उपयोग युद्ध में किया जाता रहा है। विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि यह कोई साधारण विस्फोटक नहीं, बल्कि हाई-इम्पैक्ट बम है, जो बड़े इलाके को भारी नुकसान पहुंचा सकता था।
द्वितीय विश्व युद्ध का हो सकता है बम
विशेषज्ञ इस बम को द्वितीय विश्व युद्ध के समय का मान रहे हैं, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि यह बम यहां तक कैसे पहुंचा और कितने समय से जमीन के नीचे दबा हुआ था। पूर्वी सिंहभूम (ग्रामीण) के एसपी ऋषव गर्ग ने बताया कि रांची से आई बम डिटेक्शन एंड डिस्पोजल स्क्वाड (BDDS) ने मौके का निरीक्षण किया और पाया कि यह विस्फोटक ‘एक्टिव’ और काफी भारी है। उन्होंने कहा, “BDDS टीम आम तौर पर आईईडी और छोटे विस्फोटकों को संभालने के लिए प्रशिक्षित होती है, लेकिन इस पुराने बम को निष्क्रिय करने के लिए भारतीय सेना की विशेषज्ञता की जरूरत पड़ी।”
पढ़ें- Jharkhand: रामनवमी से पहले हजारीबाग में हाई अलर्ट, डीजीपी तदाशा मिश्रा ने खुद संभाली सुरक्षा व्यवस्था की कमान
सेना से ली गई मदद
एसएसपी पीयूष पांडेय ने सेना को पत्र लिखकर उसके बम निष्क्रिय दस्ते से सहायता मांगी थी। अधिकारियों के अनुसार, इस बम को सामान्य प्रक्रिया से निष्क्रिय करना संभव नहीं था, इसलिए उन्नत तकनीकी विशेषज्ञता की आवश्यकता पड़ी। बहरागोड़ा थाना प्रभारी शंकर प्रसाद कुशवाहा ने बताया कि जिस स्थान पर बम मिला था, वहां की पूरी घेराबंदी कर दी गई थी। ग्रामीणों को उस वस्तु के पास न जाने और किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ न करने की सख्त चेतावनी दी गई थी।
बालू खनन के दौरान हुआ था खुलासा
पुलिस सूत्रों के अनुसार, यह बम पानीपाड़ा-नगुडसाई क्षेत्र में सुबर्णरेखा नदी किनारे बालू खनन के दौरान मिला। इसका आकार गैस सिलेंडर जैसा था, जिससे शुरुआत में लोग भ्रमित हो गए थे।
बम पर ‘AN-M64 500 lb… American… unexploded’ जैसे निशान भी पाए गए हैं, जिससे यह आशंका और मजबूत हो गई है कि यह अमेरिका निर्मित पुराना बम है। फिलहाल जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि यह बम यहां कैसे पहुंचा और क्या इलाके में ऐसे और विस्फोटक छिपे हो सकते हैं।
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स्थानीय पुलिस और सेना ने मौके पर पहुंचकर इस बम को अपने कब्जे में लिया और जांच के बाद इसे सुरक्षित तरीके से निष्क्रिय कर दिया। राहत की बात यह रही कि पूरे ऑपरेशन के दौरान किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई।
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‘Made in America’ और AN-M64 की मार्किंग
बरामद बम पर ‘AN-M64’ और ‘Made in America’ अंकित था। शुरुआती जांच में इसका वजन करीब 500 पाउंड यानी 227 से 250 किलोग्राम बताया जा रहा है। यह बम अत्यंत विनाशकारी श्रेणी का माना जाता है, जिसका उपयोग युद्ध में किया जाता रहा है। विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि यह कोई साधारण विस्फोटक नहीं, बल्कि हाई-इम्पैक्ट बम है, जो बड़े इलाके को भारी नुकसान पहुंचा सकता था।
द्वितीय विश्व युद्ध का हो सकता है बम
विशेषज्ञ इस बम को द्वितीय विश्व युद्ध के समय का मान रहे हैं, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि यह बम यहां तक कैसे पहुंचा और कितने समय से जमीन के नीचे दबा हुआ था। पूर्वी सिंहभूम (ग्रामीण) के एसपी ऋषव गर्ग ने बताया कि रांची से आई बम डिटेक्शन एंड डिस्पोजल स्क्वाड (BDDS) ने मौके का निरीक्षण किया और पाया कि यह विस्फोटक ‘एक्टिव’ और काफी भारी है। उन्होंने कहा, “BDDS टीम आम तौर पर आईईडी और छोटे विस्फोटकों को संभालने के लिए प्रशिक्षित होती है, लेकिन इस पुराने बम को निष्क्रिय करने के लिए भारतीय सेना की विशेषज्ञता की जरूरत पड़ी।”
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सेना से ली गई मदद
एसएसपी पीयूष पांडेय ने सेना को पत्र लिखकर उसके बम निष्क्रिय दस्ते से सहायता मांगी थी। अधिकारियों के अनुसार, इस बम को सामान्य प्रक्रिया से निष्क्रिय करना संभव नहीं था, इसलिए उन्नत तकनीकी विशेषज्ञता की आवश्यकता पड़ी। बहरागोड़ा थाना प्रभारी शंकर प्रसाद कुशवाहा ने बताया कि जिस स्थान पर बम मिला था, वहां की पूरी घेराबंदी कर दी गई थी। ग्रामीणों को उस वस्तु के पास न जाने और किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ न करने की सख्त चेतावनी दी गई थी।
बालू खनन के दौरान हुआ था खुलासा
पुलिस सूत्रों के अनुसार, यह बम पानीपाड़ा-नगुडसाई क्षेत्र में सुबर्णरेखा नदी किनारे बालू खनन के दौरान मिला। इसका आकार गैस सिलेंडर जैसा था, जिससे शुरुआत में लोग भ्रमित हो गए थे।
बम पर ‘AN-M64 500 lb… American… unexploded’ जैसे निशान भी पाए गए हैं, जिससे यह आशंका और मजबूत हो गई है कि यह अमेरिका निर्मित पुराना बम है। फिलहाल जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि यह बम यहां कैसे पहुंचा और क्या इलाके में ऐसे और विस्फोटक छिपे हो सकते हैं।