Jharkhand: बोकारो में सरकारी खाते से 6 करोड़ का खेल, रिटायर्ड हवलदार बना फर्जी निकासी का जरिया, ऐसे खुला राज
Jharkhand: झारखंड के बोकारो जिले में कोषागार के वेतन वितरण खाते से 6 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध निकासी का मामला सामने आया है, जिसमें पुलिस विभाग के एक लेखाकार की संलिप्तता पाई गई है।
विस्तार
झारखंड के बोकारो जिले से एक बड़ा घोटाला सामने आया है, जहां कोषागार के वेतन वितरण खाते से 6 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध निकासी की गई। अधिकारियों के अनुसार, यह रकम पुलिस विभाग के एक लेखाकार द्वारा कथित रूप से निकाली गई है, जिससे प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है।
'आरोपी ने की 6 करोड़ से ज्यादा की निकासी'
बोकारो के उपायुक्त अजय नाथ झा ने बताया कि शुरुआत में इस घोटाले की राशि 4.29 करोड़ रुपये आंकी गई थी, लेकिन ताजा जांच में यह बढ़कर 6 करोड़ रुपये से अधिक हो गई है। उन्होंने कहा, 'अब तक की जांच में सामने आया है कि आरोपी लेखाकार ने राम नरेश सिंह, उपेंद्र सिंह, एस कुमार समेत कई अन्य लोगों के नाम पर 6 करोड़ रुपये से ज्यादा की निकासी की है।' मामले की गंभीरता को देखते हुए अपर समाहर्ता की अध्यक्षता में चार सदस्यीय जांच टीम गठित की गई है।
राज्य स्तर पर भी की जा रही मामले की जांच
उपायुक्त ने यह भी स्पष्ट किया कि इस पूरे मामले की जांच राज्य स्तर पर भी की जा रही है। उन्होंने कहा, 'कोषागार से अवैध निकासी का मामला बेहद गंभीर है और इसे जीरो टॉलरेंस नीति के तहत लिया गया है। जांच जारी है और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।' इस मामले में आरोपी कौशल कुमार पांडे को मंगलवार को गिरफ्तार कर लिया गया। उसके खिलाफ कोषागार पदाधिकारी गुलाब चंद उरांव ने बोकारो स्टील सिटी थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई थी।
कैसे सामने आया था मामला?
बताया जा रहा है कि शुरुआत में यह मामला एक उपनिरीक्षक के वेतन मद से 3.15 करोड़ रुपये की निकासी के रूप में सामने आया था। इसके बाद जब ड्राइंग एंड डिस्बर्सिंग ऑफिसर (डीडीओ) स्तर पर ई-कुबेर बिल मैनेजमेंट सिस्टम की जांच की गई, तो बड़ा खुलासा हुआ। जांच में सामने आया कि नवंबर 2023 से मार्च 2026 के बीच 25 महीनों में 63 बार फर्जी निकासी कर कुल 4.29 करोड़ रुपये निकाले गए।
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आरोपी ने जुर्म कबूला
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह निकासी हवलदार उपेंद्र सिंह के नाम पर की गई, जो जुलाई 2016 में ही सेवानिवृत्त हो चुके थे। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी ने पोर्टल में हेरफेर करते हुए हवलदार की जन्मतिथि और बैंक खाता संख्या में बदलाव किया और लंबे समय तक इस फर्जीवाड़े को अंजाम देता रहा। पूछताछ में आरोपी ने इस पूरे मामले को स्वीकार भी कर लिया है।
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