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Jharkhand: 'सीबीआई जांच नहीं, जजों का पैनल चाहिए', JPSC-JSSC अभ्यर्थियों का अल्टीमेटम, विधानसभा घेराव का ऐलान

Tue, 04 Aug 2026 04:51 PM IST
आशुतोष प्रताप सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची Published by: आशुतोष प्रताप सिंह Updated Tue, 04 Aug 2026 04:51 PM IST
सार

झारखंड में जेपीएससी और अन्य भर्ती परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं के खिलाफ छात्रों का आंदोलन लगातार तेज हो रहा है। रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में धरना दे रहे अभ्यर्थियों ने अब सीबीआई के साथ-साथ झारखंड से बाहर के सेवानिवृत्त हाईकोर्ट न्यायाधीशों के स्वतंत्र पैनल से जांच की मांग की है।

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छात्रों ने 10 अगस्त के विधानसभा घेराव का किया ऐलान - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) और अन्य भर्ती परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं को लेकर रांची में चल रहा छात्र आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। पिछले एक सप्ताह से आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों ने अब सीबीआई जांच के साथ-साथ झारखंड से बाहर के सेवानिवृत्त हाईकोर्ट न्यायाधीशों के स्वतंत्र पैनल से जांच कराने की मांग उठाई है। छात्रों का आरोप है कि राज्य सरकार सीआईडी जांच के जरिए पूरे मामले पर पर्दा डालने की कोशिश कर रही है।
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29 जुलाई से जारी है अनिश्चितकालीन धरना

अभ्यर्थी 29 जुलाई से रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं। उनका कहना है कि भर्ती परीक्षाओं में हुई कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच के बिना आंदोलन समाप्त नहीं होगा। हजारीबाग के अभ्यर्थी विनय मेहता ने कहा कि अब उन्हें सीआईडी की जांच पर बिल्कुल भरोसा नहीं है। उन्होंने कहा कि पहले जेएसएससी-सीजीएल पेपर लीक मामले की जांच भी सीआईडी ने की थी। जांच एजेंसी ने खुद माना था कि 150 में से 135 प्रश्नों के उत्तर पहले ही लीक हो चुके थे और 120 प्रश्न परीक्षा के प्रश्नपत्र से पूरी तरह मेल खाते थे।
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विनय मेहता ने आरोप लगाया कि कई अभ्यर्थियों ने ईमेल और व्हाट्सएप के जरिए दस्तावेजी सबूत भी भेजे, लेकिन न तो शिकायतों की पुष्टि की गई और न ही उन पर कोई कार्रवाई हुई। उन्होंने कहा कि अब उनकी मांग है कि पूरे मामले की जांच या तो सीबीआई को सौंपी जाए या फिर झारखंड से बाहर के सेवानिवृत्त हाईकोर्ट न्यायाधीशों के स्वतंत्र पैनल को दी जाए।
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शिबू सोरेन को देंगे श्रद्धांजलि

आंदोलनकारी छात्रों ने बताया कि वे झारखंड आंदोलन के प्रमुख नेता और पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन की पहली पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि भी देंगे। पलामू के पवन गोस्वामी ने कहा, "दिशोम गुरु शिबू सोरेन हमारे प्रेरणास्रोत हैं। आज हम उनके आवास जाकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे।"

10 अगस्त को विधानसभा घेराव की चेतावनी

पवन गोस्वामी ने कहा कि फिलहाल आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण है, लेकिन यदि सरकार उनकी मांगों पर ध्यान नहीं देती है तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि 10 अगस्त को विधानसभा का घेराव किया जाएगा।

छात्र आंदोलन को मिल रहा विभिन्न संगठनों का समर्थन

पिछले कुछ दिनों में कई सामाजिक और छात्र संगठनों ने आंदोलन का समर्थन किया है। सोमवार को ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) की झारखंड इकाई ने अल्बर्ट एक्का चौक पर भर्ती घोटालों के खिलाफ प्रदर्शन किया और 7 अगस्त को विधानसभा मार्च का ऐलान किया। इस कार्यक्रम में आइसा की प्रदेश अध्यक्ष नेहा बोरा भी शामिल होंगी। रविवार को कॉकरोच जनता पार्टी ने भी आंदोलनरत छात्रों का समर्थन किया। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने वीडियो कॉल के माध्यम से आंदोलन के नेताओं से बातचीत कर उनका समर्थन जताया।

देवेंद्रनाथ महतो अनिश्चितकालीन अनशन पर

आंदोलन के प्रमुख नेताओं में शामिल देवेंद्रनाथ महतो रविवार रात से धरना स्थल पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं। वे भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच केंद्रीय एजेंसियों से कराने की मांग कर रहे हैं। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा कि अभ्यर्थी लंबे समय से निष्पक्ष और समान अवसर की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मामला केवल पेपर लीक तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्य में सरकारी नौकरियों की खरीद-फरोख्त का है।
 
बाबूलाल मरांडी ने पूरे मामले की सीबीआई जांच की मांग दोहराते हुए कहा कि जेएसएससी-सीजीएल पेपर लीक मामले में सीआईडी जांच का परिणाम सभी के सामने है। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट के निर्देश पर जेएसएससी ने फरवरी में कट-ऑफ अंक जारी किए थे। इसके बाद सामने आया कि चयनित अभ्यर्थियों के अंक कई असफल अभ्यर्थियों से भी कम थे। इससे स्पष्ट है कि भर्ती प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं हुईं।


मरांडी ने दावा किया कि 14वीं जेपीएससी संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा और उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा में भी इसी तरह की गड़बड़ियां हुई हैं। बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार सीआईडी जांच का सहारा लेकर पूरे मामले को दबाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि निष्पक्ष जांच के लिए सीबीआई जैसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराना ही सबसे उचित विकल्प होगा।
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