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Jharkhand: आदिवासी समूहों से संवाद में भागवत का ‘विविधता में एकता’ पर रहा जोर, पेसा नियमों को लेकर जताई आपत्ति

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची Published by: हिमांशु प्रियदर्शी Updated Sat, 24 Jan 2026 08:32 PM IST
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सार

Ranchi News: रांची में आदिवासी समूहों से संवाद के दौरान आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने ‘विविधता में एकता’ का संदेश दिया। बैठक में पेसा नियमों, धार्मिक रूपांतरण और आदिवासी अधिकारों से जुड़े मुद्दे उठे, जिसमें कई प्रमुख आदिवासी नेता शामिल हुए।

Mohan Bhagwat emphasizes unity in diversity in dialogue with tribal groups expresses objection to PESA rules
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत - फोटो : अमर उजाला डिजिटल
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विस्तार
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने शनिवार को रांची में आदिवासी समूहों के साथ बंद कमरे में हुई बातचीत के दौरान ‘विविधता में एकता’ के महत्व को रेखांकित किया। कार्यक्रम में शामिल एक प्रतिभागी के अनुसार, इस संवाद में विभिन्न समुदायों से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।

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आदिवासी प्रतिनिधियों ने उठाए अहम सवाल
बैठक के दौरान आदिवासी समूहों के प्रतिनिधियों ने धार्मिक रूपांतरण, पेसा नियमों में कथित खामियों और डीलिस्टिंग जैसे विषयों को सामने रखा। मोहन भागवत ने सभी पक्षों की बातों को ध्यानपूर्वक सुना और संवाद के अंत में अपने विचार साझा किए।
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कार्यक्रम में शामिल कांग्रेस विधायक रमेश्वर उरांव की पुत्री नीशा उरांव ने संवाद के बाद मीडिया से कहा कि अपने समापन वक्तव्य में मोहन भागवत ने कहा कि भारतीय परंपरा और धर्म ‘विविधता में एकता’ सिखाते हैं। उन्होंने कहा कि रास्ते अलग हो सकते हैं, लेकिन मंजिल एक है और भारतीय धर्म सभी मार्गों को मान्यता देता है।
 
पेसा नियमों को लेकर आपत्ति दर्ज
नीशा उरांव ने बताया कि उन्होंने पेसा नियमों में कथित खामियों का मुद्दा मोहन भागवत के समक्ष रखा। उन्होंने कहा कि नियमों में प्रथागत कानूनों, सामाजिक और धार्मिक परंपराओं का उल्लेख नहीं है, जबकि यही इस अधिनियम का मूल है। उनके अनुसार, यह खामी आदिवासी समुदायों के लिए नुकसानदेह साबित हो सकती है।

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पेसा अधिनियम की पृष्ठभूमि
पेसा अधिनियम, जो अनुसूचित क्षेत्रों में आदिवासी समुदायों के अधिकारों को मान्यता देता है, वर्ष 1996 में लागू किया गया था। झारखंड सरकार ने मंत्रिमंडल की 23 दिसंबर 2025 की मंजूरी के बाद 2 जनवरी को इसके नियमों को अधिसूचित किया।
 
पांच घंटे चली बैठक में कई नेता शामिल
करीब साढ़े दस बजे शुरू हुई यह बैठक लगभग पांच घंटे तक चली। इसमें पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा और चंपई सोरेन, पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी सहित कई आदिवासी नेता मौजूद रहे। मोहन भागवत झारखंड के दो दिवसीय दौरे पर हैं। इससे पहले शुक्रवार को उन्होंने संघ के राज्य नेतृत्व के साथ भी बैठक की थी।

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