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Jharkhand News: रांची स्वास्थ्य विभाग में 26 करोड़ का घोटाला उजागर, बिना टेंडर खरीद पर उठे सवाल; जांच के आदेश
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
Published by: राँची ब्यूरो
Updated Tue, 05 May 2026 05:47 PM IST
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सार
Jharkhand News: रांची स्वास्थ्य विभाग में 26 करोड़ के कथित घोटाले का खुलासा हुआ है। बिना टेंडर खरीद और रिकॉर्ड में गड़बड़ी सामने आई है। मुख्यमंत्री ने जांच के आदेश दिए हैं, जबकि विपक्ष ने इसे बड़ा भ्रष्टाचार बताया है। पढ़ें पूरी खबर...
सदर अस्पताल रांची
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
झारखंड की राजधानी रांची में स्वास्थ्य विभाग से जुड़ा करीब 26 करोड़ रुपये का कथित घोटाला सामने आने के बाद प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की जांच में कई गंभीर अनियमितताओं के संकेत मिले हैं।
बिना टेंडर हुई खरीदारी
आरोप है कि रांची के 13 स्वास्थ्य उपकेंद्रों में दवाओं और चिकित्सा उपकरणों की खरीद बिना निर्धारित टेंडर प्रक्रिया के की गई। बताया जा रहा है कि कोटेशन के आधार पर लगभग 9 कंपनियों को काम दिया गया, जिससे नियमों की अनदेखी और पक्षपात की आशंका जताई जा रही है।
रिकॉर्ड में गड़बड़ी से बढ़ा संदेह
जांच में यह भी सामने आया कि प्रसव के बाद महिलाओं को मिलने वाली 1400 रुपये की प्रोत्साहन राशि के रिकॉर्ड में गड़बड़ी है। कई मामलों में महिलाओं की जगह पुरुषों के नाम दर्ज पाए गए, जिससे फर्जीवाड़े की आशंका और गहरा गई है। पिछले वर्ष करीब 5700 मामलों का रिकॉर्ड अब जांच के घेरे में है।
दस्तावेज नहीं देने से बढ़ी शंका
जब अधिकारियों से संबंधित दस्तावेज मांगे गए, तो निर्धारित समय सीमा में उन्हें उपलब्ध नहीं कराया गया। इससे यह संदेह और मजबूत हुआ है कि या तो खरीद प्रक्रिया में गंभीर गड़बड़ी हुई है या कागजों पर ही खर्च दिखाया गया है।
ये भी पढ़ें- Bihar: पूर्णिया कोर्ट स्टेशन के पास कार्टन में मिला नवजात का शव, इलाके में फैली सनसनी; जांच में जुटी पुलिस
सरकार ने दिए जांच के आदेश
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सभी जिलों में जांच के आदेश दिए हैं। वहीं भाजपा नेता नवीन जायसवाल ने उच्च स्तरीय जांच की मांग करते हुए इसे बड़ा घोटाला बताया है।
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बिना टेंडर हुई खरीदारी
आरोप है कि रांची के 13 स्वास्थ्य उपकेंद्रों में दवाओं और चिकित्सा उपकरणों की खरीद बिना निर्धारित टेंडर प्रक्रिया के की गई। बताया जा रहा है कि कोटेशन के आधार पर लगभग 9 कंपनियों को काम दिया गया, जिससे नियमों की अनदेखी और पक्षपात की आशंका जताई जा रही है।
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रिकॉर्ड में गड़बड़ी से बढ़ा संदेह
जांच में यह भी सामने आया कि प्रसव के बाद महिलाओं को मिलने वाली 1400 रुपये की प्रोत्साहन राशि के रिकॉर्ड में गड़बड़ी है। कई मामलों में महिलाओं की जगह पुरुषों के नाम दर्ज पाए गए, जिससे फर्जीवाड़े की आशंका और गहरा गई है। पिछले वर्ष करीब 5700 मामलों का रिकॉर्ड अब जांच के घेरे में है।
दस्तावेज नहीं देने से बढ़ी शंका
जब अधिकारियों से संबंधित दस्तावेज मांगे गए, तो निर्धारित समय सीमा में उन्हें उपलब्ध नहीं कराया गया। इससे यह संदेह और मजबूत हुआ है कि या तो खरीद प्रक्रिया में गंभीर गड़बड़ी हुई है या कागजों पर ही खर्च दिखाया गया है।
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सरकार ने दिए जांच के आदेश
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सभी जिलों में जांच के आदेश दिए हैं। वहीं भाजपा नेता नवीन जायसवाल ने उच्च स्तरीय जांच की मांग करते हुए इसे बड़ा घोटाला बताया है।