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Jharkhand: झारखंड में हिंसक हो रहे युवा! NCRB रिपोर्ट में हत्या को लेकर चौंकाने वाला खुलासा

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची Published by: राँची ब्यूरो Updated Sat, 09 May 2026 12:28 PM IST
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सार

Jharkhand: झारखंड में हत्या के मामलों में मामूली कमी के बावजूद युवाओं में बढ़ती हिंसक प्रवृत्ति चिंता का विषय बन गई है। एनसीआरबी रिपोर्ट के अनुसार, 18 से 30 वर्ष आयु वर्ग सबसे ज्यादा हत्या का शिकार हुआ है। जमीन विवाद, व्यक्तिगत दुश्मनी, प्रेम प्रसंग और अंधविश्वास हत्या के प्रमुख कारण बनकर सामने आए हैं।

Rising youth violence in Jharkhand a cause of concern, with murder cases raising concerns.
अपराध - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

झारखंड में हत्या के मामलों में पिछले कुछ वर्षों के दौरान मामूली कमी जरूर दर्ज की गई है, लेकिन युवाओं में बढ़ती हिंसक प्रवृत्ति अब गंभीर चिंता का विषय बनती जा रही है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (एनसीआरबी) की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में सबसे अधिक हत्या के शिकार 18 से 30 वर्ष आयु वर्ग के युवा हुए हैं। व्यक्तिगत दुश्मनी, प्रेम प्रसंग, जमीन और संपत्ति विवाद जैसे कारण इस बढ़ती हिंसा के पीछे प्रमुख वजह बनकर सामने आए हैं।

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हत्या के आंकड़ों में मामूली कमी, लेकिन चिंता बरकरार
आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2022 में झारखंड में हत्या के 1550 मामले दर्ज किए गए थे। वर्ष 2023 में यह संख्या घटकर 1467 हो गई, जबकि वर्ष 2024 में 1472 हत्या के मामले सामने आए। हालांकि कुल मामलों में थोड़ी कमी दिखाई दे रही है, लेकिन युवाओं में बढ़ती आक्रामकता समाज और प्रशासन दोनों के लिए चिंता का कारण बन गई है।
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सबसे ज्यादा प्रभावित 18 से 30 वर्ष आयु वर्ग
रिपोर्ट बताती है कि 18 से 30 वर्ष आयु वर्ग सबसे अधिक प्रभावित रहा। इस वर्ग में सैकड़ों युवाओं की हत्या दर्ज की गई। वहीं कम उम्र के बच्चे भी इस अपराध से अछूते नहीं रहे। छह वर्ष से कम आयु के बच्चों और किशोरों की हत्या के मामले भी सामने आए हैं, जो समाज में बढ़ती असहिष्णुता को दर्शाता है।

जमीन विवाद और दुश्मनी बने हत्या के बड़े कारण
हत्या के कारणों में सबसे अधिक मामले व्यक्तिगत दुश्मनी और जमीन-संपत्ति विवाद से जुड़े पाए गए। व्यक्तिगत दुश्मनी में 284 लोगों की हत्या हुई, जबकि जमीन और संपत्ति विवाद में 720 लोगों ने जान गंवाई। प्रेम प्रसंग, पारिवारिक विवाद और अवैध संबंधों को लेकर भी कई हत्याएं हुईं। वहीं डायन बताकर महिलाओं की हत्या आज भी समाज में फैले अंधविश्वास की भयावह तस्वीर पेश करती है।

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युवाओं में बढ़ती हिंसा पर उठे गंभीर सवाल
एनसीआरबी की यह रिपोर्ट कई सवाल खड़े करती है। आखिर क्यों युवा छोटी-छोटी बातों पर हिंसक हो रहे हैं? क्या मानसिक दबाव, सोशल मीडिया का प्रभाव और घटती सहनशीलता उन्हें अपराध की ओर धकेल रही है? यह स्थिति समाज के लिए गंभीर चेतावनी मानी जा रही है।

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