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Jharkhand: मिसिर बेसरा के बाद अब असीम मंडल पर शिकंजा! झारखंड के बड़े इनामी माओवादी की तलाश तेज
Thu, 30 Jul 2026 10:21 AM IST
राँची ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
Published by: राँची ब्यूरो
Updated Thu, 30 Jul 2026 10:21 AM IST
सार
Jharkhand News: झारखंड में माओवाद के खिलाफ अभियान के तहत शीर्ष माओवादी मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी के बाद अब पुलिस ने बड़े इनामी माओवादी असीम मंडल पर फोकस कर दिया है। डीजीपी तदाशा मिश्रा ने कहा कि बंगाल सीमा से सटे इलाकों में लगातार अभियान चल रहा है। पुलिस को उम्मीद है कि मिसिर बेसरा से पूछताछ में मिले सुराग असीम मंडल तक पहुंचने में मददगार साबित होंगे।
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पुलिस मुख्यालय में शीर्ष माओवादी मिसिर बेसरा
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
झारखंड को माओवाद मुक्त बनाने के अभियान में पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बल लगातार कार्रवाई कर रहे हैं। माओवादियों के खिलाफ ऑपरेशन तेज करने के साथ ही उन्हें आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने का अवसर भी दिया जा रहा है। इसी अभियान के तहत शीर्ष माओवादी नेता मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी के बाद अब पुलिस की नजर राज्य के एक अन्य बड़े इनामी माओवादी असीम मंडल पर टिक गई है। सुरक्षा एजेंसियां उसकी गिरफ्तारी के लिए सीमावर्ती इलाकों में लगातार अभियान चला रही हैं।
मिसिर बेसरा से पूछताछ में जुटी पुलिस
पुलिस के अनुसार, असीम मंडल झारखंड-बिहार के सीमावर्ती क्षेत्रों में लंबे समय से सक्रिय रहा है और उसका छत्तीसगढ़ में भी आना-जाना रहा है। जांच एजेंसियां अब मिसिर बेसरा से पूछताछ कर माओवादी संगठन के नेटवर्क, सहयोगियों और असीम मंडल के ठिकानों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां जुटाने की कोशिश कर रही हैं। अधिकारियों को उम्मीद है कि पूछताछ से मिले इनपुट आगे की कार्रवाई में अहम साबित होंगे।
डीजीपी ने माओवादियों से की आत्मसमर्पण की अपील
डीजीपी तदाशा मिश्रा ने कहा कि राज्य में अब बचे बड़े इनामी माओवादियों में असीम मंडल प्रमुख है। उसकी तलाश में पश्चिम बंगाल सीमा से सटे इलाकों में लगातार सर्च ऑपरेशन चलाए जा रहे हैं। उन्होंने शेष माओवादियों से हिंसा का रास्ता छोड़कर आत्मसमर्पण करने और समाज की मुख्यधारा में लौटने की अपील भी की। वहीं, मिसिर बेसरा और उसके सहयोगियों पर घोषित इनाम की राशि अभियान में शामिल पुलिस अधिकारियों, जवानों और गुप्तचरों को नियमानुसार दी जाएगी।
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यह भी पढ़ें: बांकीपुर विधानसभा सीट पर मतदान जारी, भाजपा सांसद ने क्या दावा किया? देखें अपडेट
लगातार कमजोर पड़ रहा माओवादी नेटवर्क
झारखंड में पिछले कुछ महीनों के दौरान माओवादी संगठन को लगातार झटके लगे हैं। 21 मई 2026 को 27 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया था, जिनमें सात सब-जोनल कमांडर, सात एरिया कमेटी सदस्य और 13 दस्ता सदस्य शामिल थे। इसके बाद 13 जुलाई को ₹20 लाख के इनामी माओवादी रवींद्र गंझू और 17 जुलाई को ₹25 लाख के इनामी अजय महतो उर्फ टाइगर को गिरफ्तार किया गया। वहीं 28 जुलाई को 16 माओवादियों ने हथियारों के साथ आत्मसमर्पण किया। पुलिस का दावा है कि लगातार गिरफ्तारी, आत्मसमर्पण और अभियान के कारण राज्य में माओवादी संगठन काफी कमजोर हुआ है और अब असीम मंडल की गिरफ्तारी इस अभियान की अगली बड़ी कड़ी मानी जा रही है।
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मिसिर बेसरा से पूछताछ में जुटी पुलिस
पुलिस के अनुसार, असीम मंडल झारखंड-बिहार के सीमावर्ती क्षेत्रों में लंबे समय से सक्रिय रहा है और उसका छत्तीसगढ़ में भी आना-जाना रहा है। जांच एजेंसियां अब मिसिर बेसरा से पूछताछ कर माओवादी संगठन के नेटवर्क, सहयोगियों और असीम मंडल के ठिकानों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां जुटाने की कोशिश कर रही हैं। अधिकारियों को उम्मीद है कि पूछताछ से मिले इनपुट आगे की कार्रवाई में अहम साबित होंगे।
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डीजीपी ने माओवादियों से की आत्मसमर्पण की अपील
डीजीपी तदाशा मिश्रा ने कहा कि राज्य में अब बचे बड़े इनामी माओवादियों में असीम मंडल प्रमुख है। उसकी तलाश में पश्चिम बंगाल सीमा से सटे इलाकों में लगातार सर्च ऑपरेशन चलाए जा रहे हैं। उन्होंने शेष माओवादियों से हिंसा का रास्ता छोड़कर आत्मसमर्पण करने और समाज की मुख्यधारा में लौटने की अपील भी की। वहीं, मिसिर बेसरा और उसके सहयोगियों पर घोषित इनाम की राशि अभियान में शामिल पुलिस अधिकारियों, जवानों और गुप्तचरों को नियमानुसार दी जाएगी।
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लगातार कमजोर पड़ रहा माओवादी नेटवर्क
झारखंड में पिछले कुछ महीनों के दौरान माओवादी संगठन को लगातार झटके लगे हैं। 21 मई 2026 को 27 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया था, जिनमें सात सब-जोनल कमांडर, सात एरिया कमेटी सदस्य और 13 दस्ता सदस्य शामिल थे। इसके बाद 13 जुलाई को ₹20 लाख के इनामी माओवादी रवींद्र गंझू और 17 जुलाई को ₹25 लाख के इनामी अजय महतो उर्फ टाइगर को गिरफ्तार किया गया। वहीं 28 जुलाई को 16 माओवादियों ने हथियारों के साथ आत्मसमर्पण किया। पुलिस का दावा है कि लगातार गिरफ्तारी, आत्मसमर्पण और अभियान के कारण राज्य में माओवादी संगठन काफी कमजोर हुआ है और अब असीम मंडल की गिरफ्तारी इस अभियान की अगली बड़ी कड़ी मानी जा रही है।