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Jharkhand News: जनगणना में सरना धर्म कॉलम नहीं होने पर भड़के आदिवासी संगठन, बोले- पहचान मिटाने की साजिश
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
Published by: राँची ब्यूरो
Updated Sat, 09 May 2026 09:24 PM IST
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सार
Jharkhand News: रांची में आदिवासी संगठनों ने जनगणना में सरना धर्म कॉलम शामिल नहीं किए जाने पर नाराजगी जताई। नेताओं ने इसे आदिवासी पहचान पर हमला बताते हुए केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए और आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी। पढ़ें पूरी खबर...
प्रेस कॉन्फ्रेंस में जानकारी देते आदिवासी संगठन
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
रांची में आगामी जनगणना में सरना धर्म कॉलम शामिल नहीं किए जाने को लेकर आदिवासी संगठनों में गहरा आक्रोश देखने को मिला। शनिवार को करमटोली केंद्रीय धूमकुड़िया सभागार में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में विभिन्न आदिवासी संगठनों के नेताओं ने केंद्र सरकार पर आदिवासी पहचान को कमजोर करने का आरोप लगाया।
आदिवासी जन परिषद के प्रेम शाही मुंडा, पूर्व मंत्री गीताश्री उरांव और देवकुमार धान ने संयुक्त रूप से कहा कि आदिवासी समाज की अपनी अलग धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान है, जिसे जनगणना में अलग मान्यता मिलनी चाहिए।
‘सरना धर्म आदिवासी अस्तित्व का प्रतीक’
नेताओं ने कहा कि सरना धर्म केवल आस्था का विषय नहीं, बल्कि आदिवासी अस्तित्व, परंपरा और संस्कृति का प्रतीक है। उनका कहना था कि जनगणना में अलग कॉलम नहीं देना आदिवासी समाज की पहचान को कमजोर करने जैसा है।
सरना धर्म कोड की मांग को लेकर चरणबद्ध आंदोलन
पूर्व मंत्री गीताश्री उरांव ने कहा कि सरना धर्म कोड की मांग को लेकर देशभर में चरणबद्ध आंदोलन चलाया जा रहा है। इसी क्रम में 16 मई को महाराष्ट्र के नासिक में बड़ा आंदोलन आयोजित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि वर्ष 2011 की जनगणना में आदिवासियों को अलग कॉलम का विकल्प दिया गया था, लेकिन अब उसे हटाना आदिवासी समाज की पहचान पर सीधा हमला है।
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‘आदिवासियों की अलग धार्मिक परंपरा’
आदिवासी जन परिषद के प्रेम शाही मुंडा ने कहा कि आदिवासी समाज न हिंदू है, न मुस्लिम, न सिख और न ईसाई, बल्कि उनकी अपनी विशिष्ट धार्मिक परंपरा और मान्यताएं हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार आदिवासियों को हिंदू बताकर उनकी मूल पहचान समाप्त करने की कोशिश कर रही है। साथ ही कहा कि आदिवासी इस देश के मूल निवासी हैं और उन्हें अपने अस्तित्व की रक्षा के लिए लगातार संघर्ष करना पड़ रहा है।
आंदोलन तेज करने की चेतावनी
संगठनों ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि आगामी जनगणना में सरना धर्म कॉलम शामिल नहीं किया गया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
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आदिवासी जन परिषद के प्रेम शाही मुंडा, पूर्व मंत्री गीताश्री उरांव और देवकुमार धान ने संयुक्त रूप से कहा कि आदिवासी समाज की अपनी अलग धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान है, जिसे जनगणना में अलग मान्यता मिलनी चाहिए।
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‘सरना धर्म आदिवासी अस्तित्व का प्रतीक’
नेताओं ने कहा कि सरना धर्म केवल आस्था का विषय नहीं, बल्कि आदिवासी अस्तित्व, परंपरा और संस्कृति का प्रतीक है। उनका कहना था कि जनगणना में अलग कॉलम नहीं देना आदिवासी समाज की पहचान को कमजोर करने जैसा है।
सरना धर्म कोड की मांग को लेकर चरणबद्ध आंदोलन
पूर्व मंत्री गीताश्री उरांव ने कहा कि सरना धर्म कोड की मांग को लेकर देशभर में चरणबद्ध आंदोलन चलाया जा रहा है। इसी क्रम में 16 मई को महाराष्ट्र के नासिक में बड़ा आंदोलन आयोजित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि वर्ष 2011 की जनगणना में आदिवासियों को अलग कॉलम का विकल्प दिया गया था, लेकिन अब उसे हटाना आदिवासी समाज की पहचान पर सीधा हमला है।
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‘आदिवासियों की अलग धार्मिक परंपरा’
आदिवासी जन परिषद के प्रेम शाही मुंडा ने कहा कि आदिवासी समाज न हिंदू है, न मुस्लिम, न सिख और न ईसाई, बल्कि उनकी अपनी विशिष्ट धार्मिक परंपरा और मान्यताएं हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार आदिवासियों को हिंदू बताकर उनकी मूल पहचान समाप्त करने की कोशिश कर रही है। साथ ही कहा कि आदिवासी इस देश के मूल निवासी हैं और उन्हें अपने अस्तित्व की रक्षा के लिए लगातार संघर्ष करना पड़ रहा है।
आंदोलन तेज करने की चेतावनी
संगठनों ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि आगामी जनगणना में सरना धर्म कॉलम शामिल नहीं किया गया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।