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Jharkhand: सावन की पहली सुबह बाबा बैद्यनाथ धाम में उमड़ा आस्था का सैलाब, 105 किमी तक बोल बम से गूंजा कांवर पथ
Thu, 30 Jul 2026 12:16 PM IST
राँची ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
Published by: राँची ब्यूरो
Updated Thu, 30 Jul 2026 12:16 PM IST
सार
Jharkhand News: सावन माह की शुरुआत के साथ झारखंड के विश्व प्रसिद्ध बाबा बैद्यनाथ धाम में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। बिहार के सुल्तानगंज से देवघर तक 105 किलोमीटर लंबे कांवर पथ पर लाखों कांवड़िए जल लेकर पहुंचे। इस बार श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए एआई निगरानी, ड्रोन और फेसियल रिकग्निशन कैमरों की व्यवस्था की गई है।
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बाबा बैद्यनाथ धाम में उमड़ा आस्था का सैलाब
- फोटो : IANS
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विस्तार
सावन माह की शुरुआत के साथ ही झारखंड के विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग बाबा बैद्यनाथ धाम में गुरुवार को श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। बिहार के सुल्तानगंज स्थित उत्तरवाहिनी गंगा से लेकर देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ मंदिर तक करीब 105 किलोमीटर लंबे कांवर पथ पर गेरुआ वस्त्रधारी कांवड़ियों की लंबी कतारें नजर आईं। पूरा इलाका "बोल बम" और "हर-हर महादेव" के जयघोष से गूंज उठा।
वैदिक मंत्रोच्चार के बीच शुरू हुआ जलार्पण
श्रावणी मेले का औपचारिक शुभारंभ बुधवार को बिहार-झारखंड सीमा स्थित दुम्मा प्रवेश द्वार पर वैदिक मंत्रोच्चार और विशेष पूजा के साथ हुआ था। गुरुवार सुबह चार बजे बाबा बैद्यनाथ मंदिर के पट खोले गए। इसके बाद गर्भगृह का पारंपरिक विधि-विधान से शुद्धिकरण किया गया और सरदारी पूजा संपन्न हुई। पूजा के बाद आम श्रद्धालुओं के लिए जलार्पण की व्यवस्था शुरू कर दी गई। पहले ही दिन मंदिर परिसर, शिवगंगा, दुम्मा प्रवेश द्वार और पूरे कांवर पथ पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली।
ज्योतिर्लिंग और शक्तिपीठ का अद्भुत संगम
धार्मिक मान्यता के अनुसार, बाबा बैद्यनाथ धाम देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में शामिल है। यह दुनिया का एकमात्र ऐसा तीर्थस्थल माना जाता है, जहां ज्योतिर्लिंग और शक्तिपीठ एक ही परिसर में स्थित हैं। परंपरा के अनुसार श्रद्धालु सुल्तानगंज से उत्तरवाहिनी गंगा का जल कांवर में भरकर 105 किलोमीटर की पैदल यात्रा पूरी करने के बाद बाबा बैद्यनाथ का जलाभिषेक करते हैं। इसके बाद दुमका जिले के बासुकीनाथ धाम में पूजा-अर्चना के साथ उनकी कांवर यात्रा पूर्ण मानी जाती है।
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यह भी पढ़ें: भाजपा ने जन सुराज पर लगाया फर्जी मतदान की कोशिश का आरोप, प्रशासन से क्या मांग कर दी?
AI, ड्रोन और 11,500 जवानों की निगरानी
भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा को देखते हुए इस बार प्रशासन ने कई नई व्यवस्थाएं लागू की हैं। पूरे सावन महीने स्पर्श पूजा पर रोक रहेगी और श्रद्धालु आधुनिक अरघा प्रणाली के माध्यम से ही जल अर्पित करेंगे। वीआईपी, वीवीआईपी और आउट-ऑफ-टर्न दर्शन की सुविधा भी बंद कर दी गई है ताकि सभी श्रद्धालुओं को समान अवसर मिल सके। सुरक्षा के लिए पहली बार एआई आधारित निगरानी, फेसियल रिकग्निशन कैमरे और ड्रोन तैनात किए गए हैं। पूरे मेला क्षेत्र में 11,500 से अधिक पुलिसकर्मी, सीआरपीएफ और झारखंड जगुआर के जवान सुरक्षा व्यवस्था संभाल रहे हैं। वहीं, शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए क्यूआर कोड आधारित शिकायत प्रणाली भी लागू की गई है।
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वैदिक मंत्रोच्चार के बीच शुरू हुआ जलार्पण
श्रावणी मेले का औपचारिक शुभारंभ बुधवार को बिहार-झारखंड सीमा स्थित दुम्मा प्रवेश द्वार पर वैदिक मंत्रोच्चार और विशेष पूजा के साथ हुआ था। गुरुवार सुबह चार बजे बाबा बैद्यनाथ मंदिर के पट खोले गए। इसके बाद गर्भगृह का पारंपरिक विधि-विधान से शुद्धिकरण किया गया और सरदारी पूजा संपन्न हुई। पूजा के बाद आम श्रद्धालुओं के लिए जलार्पण की व्यवस्था शुरू कर दी गई। पहले ही दिन मंदिर परिसर, शिवगंगा, दुम्मा प्रवेश द्वार और पूरे कांवर पथ पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली।
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ज्योतिर्लिंग और शक्तिपीठ का अद्भुत संगम
धार्मिक मान्यता के अनुसार, बाबा बैद्यनाथ धाम देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में शामिल है। यह दुनिया का एकमात्र ऐसा तीर्थस्थल माना जाता है, जहां ज्योतिर्लिंग और शक्तिपीठ एक ही परिसर में स्थित हैं। परंपरा के अनुसार श्रद्धालु सुल्तानगंज से उत्तरवाहिनी गंगा का जल कांवर में भरकर 105 किलोमीटर की पैदल यात्रा पूरी करने के बाद बाबा बैद्यनाथ का जलाभिषेक करते हैं। इसके बाद दुमका जिले के बासुकीनाथ धाम में पूजा-अर्चना के साथ उनकी कांवर यात्रा पूर्ण मानी जाती है।
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AI, ड्रोन और 11,500 जवानों की निगरानी
भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा को देखते हुए इस बार प्रशासन ने कई नई व्यवस्थाएं लागू की हैं। पूरे सावन महीने स्पर्श पूजा पर रोक रहेगी और श्रद्धालु आधुनिक अरघा प्रणाली के माध्यम से ही जल अर्पित करेंगे। वीआईपी, वीवीआईपी और आउट-ऑफ-टर्न दर्शन की सुविधा भी बंद कर दी गई है ताकि सभी श्रद्धालुओं को समान अवसर मिल सके। सुरक्षा के लिए पहली बार एआई आधारित निगरानी, फेसियल रिकग्निशन कैमरे और ड्रोन तैनात किए गए हैं। पूरे मेला क्षेत्र में 11,500 से अधिक पुलिसकर्मी, सीआरपीएफ और झारखंड जगुआर के जवान सुरक्षा व्यवस्था संभाल रहे हैं। वहीं, शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए क्यूआर कोड आधारित शिकायत प्रणाली भी लागू की गई है।