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झारखंड के आंदोलनकारियों का अनशन समाप्त: CBI जांच क्यों नहीं करा रही सरकार, मंत्री दीपिका पांडे के तर्क क्या?

Tue, 18 Aug 2026 02:50 AM IST
ज्योति भास्कर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची। Published by: ज्योति भास्कर Updated Tue, 18 Aug 2026 02:50 AM IST
सार

झारखंड में छात्र आंदोलनकारियों का अनशन समाप्त हो चुका है। फिलहाल मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने जेपीएससी और जेएसएससी में गड़बड़ी पर CBI से जांच कराने का एलान नहीं किया है। सरकार सीबीआई से जांच क्यों नहीं करा रही है? राज्य सरकार में मंत्री दीपिका पांडे ने क्या तर्क दिए? जानिए इस खबर में

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Why No CBI Probe in JPSC JSSC Jharkhand CM Hemant Soren Ranchi Student Protest Minister Dipika Pandey Singh
झारखंड सरकार में मंत्री दीपिका पांडे - फोटो : एएनआई वीडियो ग्रैब

विस्तार

झारखंड सरकार में मंत्री दीपिका पांडे सिंह ने छात्र नेताओं का अनशन समाप्त करवाने के बाद मीडिया से कहा, झारखंड में शुरू हुए महत्वपूर्ण छात्र आंदोलन, विशेष रूप से सुधारों से संबंधित आंदोलन के प्रति सरकार हमेशा से संवेदनशील रही है। मुख्यमंत्री आंदोलन की गतिविधियों पर कड़ी नजर रख रहे हैं और राहुल गांधी ने भी लगातार छात्रों के हितों की वकालत की है।
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निष्पक्ष जांच का वादा, IAS अमिताभ कौशल की समिति क्या करेगी?
बकौल दीपिका पांडे सिंह, 'आज हम आंदोलनकारियों को धन्यवाद देना चाहते हैं। आपने राज्य और छात्रों दोनों के हित में शांतिपूर्ण और रचनात्मक तरीके से जो आंदोलन चलाया, वह अब अत्यंत गरिमापूर्ण ढंग से समाप्त हो रहा है। सरकार ने आपकी सभी मांगों को मान लिया है और हम आपको विश्वास दिलाते हैं कि जांच निष्पक्ष होगी; किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा...  मुख्यमंत्री ने आईएएस अधिकारी अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में एक समिति के गठन की घोषणा पहले ही कर दी है। सभी हितधारकों से परामर्श के बाद झारखंड के छात्रों की तरफ से प्रस्तावित सुधारों का मसौदा तैयार किया जाएगा। इससे एक ऐसा मॉडल बनेगा जिसका पूरा देश अनुकरण करेगा।'
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क्या जिद पर अड़े हैं आंदोलनकारी, मंत्री ने हठधर्मिता का जिक्र क्यों किया?
उन्होंने कहा, सरकार ने छात्र आंदोलनकारियों की तरफ से उठाए गए सभी बिंदुओं को स्वीकार कर लिया है; हालांकि, हठधर्मिता की भी एक सीमा होती है—मांगें ऐसी होनी चाहिए जिन्हें सरकार वास्तव में पूरा कर सके। इस छात्र आंदोलन से पहले ही देवेंद्र महतो ने सीआईडी जांच का प्रस्ताव रखा था। सरकार ने निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए कार्रवाई शुरू कर दी थी।
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झारखंड सरकार सीबीआई जांच के सवाल पर क्या बोली?
केंद्रीय एजेंसी से जांच के सवाल पर दीपिका पांडे ने कहा, केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) परिणाम देने में विफल रही है; उसके पास पेपर लीक से संबंधित 17 मामले लंबित हैं। 2015 से देश भर में पेपर लीक और हेराफेरी की 152 घटनाएं हुई हैं, फिर भी न तो केंद्र सरकार और न ही केंद्रीय एजेंसियों ने इन मामलों में कोई ठोस परिणाम हासिल किया है। इसलिए, सीआईडी जांच के संबंध में, हमने एक समय सीमा निर्धारित की है: 90 दिनों के भीतर आरोप पत्र दाखिल किया जाना चाहिए और शीघ्र निर्णय के लिए मामले की त्वरित सुनवाई भी होनी चाहिए।
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