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Coronavirus Vaccine: कोरोना वैक्सीन के 'कोवाक्स प्लान' में शामिल हुए 172 देश, 18 सितंबर है आखिरी तारीख
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: सोनू शर्मा
Updated Thu, 17 Sep 2020 10:38 PM IST
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कोरोना वैक्सीन जल्द से जल्द बाजार में आ जाए और लोगों की जान बचाए, इसको लेकर दुनियाभर के वैज्ञानिक प्रयास कर रहे हैं। हालांकि रूस और चीन तो पहले से ही अपने लोगों को वैक्सीन दे रहे हैं और अमेरिका और ब्रिटेन जैसे विकसित देशों में वैक्सीन के आपातकालीन इस्तेमाल को लेकर विचार किया जा रहा है। ऐसा माना जा रहा है कि नवंबर तक अमेरिका में वैक्सीन उपलब्ध हो भी जाएगी, लेकिन बाकी देशों का क्या? कुछ दिन पहले इसी से संबंधित एक सवाल उठा था कि क्या अमीर और ताकतवर देशों को पहले वैक्सीन मिल जाएगी और कम आय वाले देश पिछड़ जाएंगे। इसी असमंजस को खत्म करने के लिए एक प्लान बनाया गया है, जिसे 'कोवाक्स प्लान' या 'कोवाक्स फैसिलिटी' नाम दिया गया है। इसका संचालन विश्व स्वास्थ्य संगठन, गावी और सीईपीआई नामक संस्था मिलकर कर रहे हैं।
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रिपोर्ट्स के मुताबिक, 'कोवाक्स प्लान' से अब तक 172 देश जुड़ चुके हैं। इनमें से 92 देश निम्न और मध्यम आय वाले हैं जबकि बाकी 80 संभावित स्व-वित्तपोषित देश हैं। अमेरिका इस वैश्विक पहल का हिस्सा नहीं है। उसने वैक्सीन की खरीद के लिए अलग से कई समझौते किए हुए हैं।
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दरअसल, विश्व स्वास्थ्य संगठन, गावी और सीईपीआई का समन्वित समूह कोवाक्स प्लान में शामिल सभी देशों को इस विचार पर सहमत करने की कोशिश कर रहा है कि कोरोना वायरस से सबसे ज्यादा खतरे में समझे जाने वाले लोगों को पहले वैक्सीन दी जाए। इस समूह का ये भी कहना है कि सभी लोगों को वैक्सीन मिलनी चाहिए और उचित कीमत पर मिलनी चाहिए।
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हाल ही में एक रिपोर्ट आई थी, जिसमें यह बताया गया था कि जितने भी समृद्ध देश कोवाक्स प्लान में शामिल हुए हैं, वो अपने बजट से करीब 90 देशों को कोरोना की वैक्सीन खरीदने में मदद करेंगे। गावी वैक्सीन एलायंस के एक वरिष्ठ अधिकारी सेथ बर्कले का कहना है कि इस समूह का सबसे बड़ा मकसद यही है कि जो देश वैक्सीन नहीं खरीद सकते, उन तक भी इसे आसानी से उचित कीमत पर पहुंचाया जाए, ताकि लोगों की जान बचाई जा सके।
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'कोवाक्स प्लान' में शामिल होने की समय सीमा 18 सितंबर तय की गई है। हाल ही में विश्व स्वास्थ्य संगठन की मुख्य वैज्ञानिक सौम्या स्वामीनाथन ने एक बयान में कहा है कि 2021 के अंत तक वैक्सीन की दो अरब खुराक हासिल कर लेने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि उसे सभी देशों तक पहुंचाया जा सके।
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