दुनियाभर की महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर के मामले बढ़ते देखे जा रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के आंकड़ों के अनुसार, हर साल स्तन कैंसर के लगभग 23 से 24 लाख नए मामले सामने आते हैं और करीब 7 लाख मौतें होती हैं। कैंसर के गंभीर रूप लेने का बड़ा कारण समय पर बीमारी का पता न चल पाना है। अमीर देशों में बीमारी का पता चलने की दर ज्यादा है, लेकिन कम आय वाले इलाकों में शुरुआती पहचान और इलाज की सुविधाएं सीमित होने के कारण मौत का खतरा बहुत ज्यादा बना हुआ है।
Breast Cancer: क्या डियो लगाने से ब्रेस्ट कैंसर का खतरा बढ़ जाता है? सभी महिलाओं को जरूर जाननी चाहिए ये बात
दुनियाभर में ब्रेस्ट कैंसर महिलाओं में होने वाले सबसे आम कैंसरों में से एक है है। कुछ रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है डियो या एंटीपर्सपिरेंट के इस्तेमाल से ब्रेस्ट कैंसर होने का खतरा हो सकता है, क्या वास्तव में ऐसा होता है?
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सोशल मीडिया पर वायरल रील्स में कहा जा रहा है कि रोजाना इस्तेमाल किया जाने वाला डियोड्रेंट या एंटीपर्सपिरेंट ब्रेस्ट कैंसर की वजह बन सकता है? इसमें मौजूद कुछ ऐसे रसायन हो सकते हैं जिनके कारण कैंसर का जोखिम हो सकता है।
ब्रेस्ट कैंसर होता क्यों है?
इस बारे में जानने से पहले ये समझना जरूरी है कि कौन-कौन सी स्थितियां स्तन कैंसर का कारण बन सकती हैं?
- ब्रेस्ट कैंसर किसी एक वजह से नहीं होता। कई अलग-अलग कारक मिलकर इसका खतरा बढ़ा सकते हैं। उम्र बढ़ना इनमें एक महत्वपूर्ण कारण है।
- इसके अलावा परिवार में ब्रेस्ट या कुछ दूसरे कैंसर का इतिहास, कुछ आनुवंशिक बदलाव, हार्मोन से जुड़े कारक, मोटापा, धूम्रपान-शराब और शारीरिक गतिविधि की कमी खतरे को बढ़ाने वाली हो सकती है।
सोशल मीडिया पर क्या दावा किया जा रहा है?
दावा किया जा रहा है कि डियोड्रेंट या एंटीपर्सपिरेंट ( पसीने को रोकने वाला उत्पाद) इस्तेमाल करने से ब्रेस्ट कैंसर हो सकता है। इसमें कहा जाता रहा है कि एंटीपर्सपिरेंट पसीने को रोककर शरीर के लिम्फ नोड्स यानी शरीर की प्रतिरोधक क्षमता से जुड़े छोटे-छोटे अंगों को ब्लॉक कर देता है। इससे शरीर में विषैले पदार्थ जमा होते हैं और आगे चलकर ब्रेस्ट कैंसर हो जाता है।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि कई अन्य रिपोर्ट्स में डियोड्रेंट के इस्तेमाल को सेहत के लिए नुकसानदायक बताया जाता रहा है। तो क्या इससे ब्रेस्ट कैंसर हो सकता है?
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
वरिष्ठ कैंसर सर्जन डॉ अजयेश शर्मा कहते हैं, सबसे पहले ये समझना जरूरी है कि ब्रेस्ट कैंसर ब्रेस्ट की कोशिकाओं में बनता है, लिम्फ नोड्स में नहीं।
- लिम्फ नोड्स शरीर के इम्यून सिस्टम का हिस्सा होते हैं और संक्रमण से लड़ने में मदद करते हैं।
- अगर लिम्फ का प्रवाह रुक जाए तो शरीर के किसी हिस्से में सूजन यानी लिम्फेडेमा हो सकती है, लेकिन इससे कैंसर होने का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।
पिछले 20 से ज्यादा वर्षों में इस विषय पर कई शोध किए गए हैं। अलग-अलग अध्ययनों में 800 से लेकर 7,000 से ज्यादा महिलाओं को शामिल किया गया। इन अध्ययनों में लगातार यही सामने आया कि डियोड्रेंट या एंटीपर्सपिरेंट के इस्तेमाल से ब्रेस्ट कैंसर का खतरा बढ़ने का कोई स्पष्ट प्रमाण नहीं है।
अमेरिकन कैंसर सोसाइटी ने भी अध्ययन में बताया कि डियो या एंटीपर्सपिरेंट का इस्तेमाल ब्रेस्ट कैंसर का कारण नहीं बनता है।
ब्रेस्ट कैंसर के खतरे को कैसे कम करें?
डॉक्टर कहते हैं, भले ही डियो से ब्रेस्ट कैंसर का जोखिम न हो, पर लाइफस्टाइल की कई गलतियां इसका खतरा बढ़ाने वाली हो सकती हैं, इसलिए सभी महिलाओं को बचाव के लिए निरंतर प्रयास करते रहना चाहिए।
- वजन को कंट्रोल करें, ये बड़ा जोखिम कारक है।
- शराब और दूसरे नशीले पदार्थों से दूरी रखें।
- नियमित रूप से व्यायाम या शारीरिक गतिविधि करें।
- बच्चे को स्तनपान कराएं, क्योंकि स्तनपान से ब्रेस्ट कैंसर का जोखिम कुछ हद तक कम हो सकता है।
- शरीर में ब्रेस्ट से जुड़े किसी असामान्य बदलाव को नजरअंदाज न करें और समय रहते डॉक्टर से जांच कराएं।
- अगर आपकी मां या बहन जैसे करीबी रिश्तेदारों में किसी को ब्रेस्ट कैंसर रहा है, तो ऐसी महिलाओं को नियमित रूप से डॉक्टर से मिलते रहना चाहिए।
--------------
स्रोत:
Antiperspirants and Breast Cancer Risk
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।