जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने शुक्रवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, वह लंबे समय से आंत से जुड़ी बीमारी अल्सरेटिव कोलाइटिस से जूझ रहे हैं। वह नहीं चाहते थे कि उनकी खराब सेहत की वजह से सरकार के कामकाज पर किसी तरह का असर पड़े। आपको बता दें कि इसी बीमारी के चलते उन्होंने साल 2007 में भी पहली बार प्रधानमंत्री बनने के एक साल बाद इस्तीफा दिया था। बताया जा रहा है कि नियमित इलाज के जरिए वह अपनी बीमारी को नियंत्रण में रखते हैं। आइए जानते हैं यह बीमारी कितनी गंभीर है और इसके कारण, लक्षण और बचाव के उपाय क्या हैं।
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क्या है अल्सरेटिव कोलाइटिस बीमारी, जिससे जूझ रहे हैं जापानी प्रधानमंत्री? जानिए इसके कारण, लक्षण और बचाव के उपाय
Fri, 28 Aug 2020 04:48 PM IST
सोनू शर्मा
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: सोनू शर्मा
Updated Fri, 28 Aug 2020 04:48 PM IST
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जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे को कौन सी बीमारी है?
- फोटो : Pixabay/Facebook/Prime Minister's Office of Japan
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क्या है अल्सरेटिव कोलाइटिस?
- अल्सरेटिव कोलाइटिस को सूजन आंत्र रोग के रूप में वर्गीकृत किया गया है। यह आमतौर पर तब होता है जब पाचन तंत्र में मौजूद बैक्टीरिया, जैसे- शरीर के कुछ रोगाणुओं के खिलाफ शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली अति सक्रिय हो जाती है। इस बीमारी की शुरुआत मलाशय में होती है और फिर यह बड़ी आंत में फैलती है। यह बड़ी आंत की अंदरूनी परत के भीतर सूजन और दर्दनाक अल्सर का कारण बनती है। इस बीमारी को खूनी दस्त भी कहा जाता है।
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अल्सरेटिव कोलाइटिस के सामान्य और शुरुआती लक्षण
- मल में खून
- दस्त, बुखार
- भूख में कमी और मतली
- कुपोषण और वजन घटाना
- पेट में दर्द और पेट की आवाज में वृद्धि
- जोड़ों में दर्द और सूजन
- मुंह में छाले पड़ना और त्वचा संबंधी समस्याएं
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अल्सरेटिव कोलाइटिस के कारण
- वैसे तो इस बीमारी का सटीक कारण अब तक स्पष्ट नहीं हो पाया है, लेकिन कई विशेषज्ञ तनाव को इस बीमारी के प्रमुख कारणों में से एक मानते हैं। हालांकि कई रिपोर्ट्स से पता चलता है कि यह एक ऑटोइम्यून डिसऑर्डर है। इस डिसऑर्डर में शरीर अपनी प्रतिरक्षा प्रणाली और शरीर की स्वस्थ्य कोशिकाओं पर ही हमला करने लगता है, लेकिन फिर भी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि अल्सरेटिव कोलाइटिस में प्रतिरक्षा प्रणाली सिर्फ बड़ी आंत और अन्य अंगों पर हमला करके प्रतिक्रिया क्यों करती है। इसके अलावा इस बीमारी को आनुवांशिक भी बताया जाता है।
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अल्सरेटिव कोलाइटिस से बचाव के उपाय
- विशेषज्ञों के मुताबिक, अल्सरेटिव कोलाइटिस से बचा तो नहीं जा सकता है, लेकिन इसके साइड-इफेक्ट्स को कम जरूर किया जा सकता है। इस बीमारी से पीड़ित मरीजों को भरपूर मात्रा में पानी का सेवन करना चाहिए और मल्टीविटामिन्स लेनी चाहिए। इससे पोषण अवशोषण में सुधार होता है। इसके अलावा मरीजों को उचित भोजन प्रबंधन के लिए आहार विशेषज्ञों से परामर्श जरूर लेना चाहिए, क्योंकि यह पेट से जुड़ी बीमारी है।