Study Alert: फसलों को बचाने वाले कीटनाशक बिगाड़ रहे इंसानी सेहत, ब्रेन-नसों की सबसे गंभीर बीमारी का खतरा
दुनिया के कई देशों ने कुछ कीटनाशकों पर पहले ही प्रतिबंध लगा दिया है, क्योंकि वे मस्तिष्क, तंत्रिका तंत्र या अन्य गंभीर बीमारियों के खतरे से जुड़े पाए गए हैं। वैज्ञानिकों ने इससे होने वाले जोखिमों को लेकर सभी लोगों को अलर्ट किया है।
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अच्छी सेहत के लिए स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को नियमित रूप से मौसमी फल-सब्जियों और पौष्टिकता वाली चीजों के सेवन की सलाह देते हैं। फल-सब्जियों से हमें शरीर के लिए जरूरी विटामिन्स और एंटीऑक्सीडेंट्स प्राप्त होते हैं, जो कई तरह की क्रॉनिक बीमारियों से बचाने में मदद कर सकते हैं। पर सवाल ये है कि क्या हमारी थाली में रोज आने वाली सब्जियां और फल पूरी तरह सुरक्षित हैं? क्या वास्तव में इससे सेहत को फायदा हो रहा है या फिर नुकसान?
ये सवाल इसलिए खड़े हो रहे हैं क्योंकि कई अध्ययन लगातार इस बात को लेकर चिंता जताते रहे हैं कि खेतों में फसलों को कीड़ों से बचाने के लिए इस्तेमाल होने वाले कीटनाशक असल में इंसानी सेहत के लिए मुश्किलें खड़ी करने वाले हो सकते हैं। इसी से संबंधित एक हालिया रिपोर्ट में विशेषज्ञों ने चिंता जताई है कि कीटनाशक यानी पेस्टिसाइड इंसानों के दिमाग और नसों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। इससे सबसे खतरनाक तंत्रिका संबंधी बीमारियों में से एक एमियोट्रोफिक लेटरल स्क्लेरोसिस (एएलएस) का जोखिम बढ़ता जा रहा है।
एमियोट्रोफिक लेटरल स्क्लेरोसिस तंत्रिका तंत्र की गंभीर बीमारी है। यह मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी की उन तंत्रिका कोशिकाओं (मोटर न्यूरॉन्स) को नष्ट करती है जो शरीर की मांसपेशियों को नियंत्रित करती हैं। समय के साथ यह बीमारी और बढ़ती जाती है, जिससे चलना, बोलना, खाना और सांस लेना भी कठिन हो जाता है।
तो क्या जिन फलों-सब्जियों को आप हेल्दी मानकर खाते आ रहे हैं वही हमारी सेहत के लिए खतरा साबित हो रहे हैं?
कीटनाशकों का इस्तेमाल, सेहत के लिए खतरा
हालिया अध्ययन की सबसे अहम बात यह है कि इसमें पाया गया कि जो लोग अपने काम के दौरान लंबे समय तक कीटनाशकों के संपर्क में रहते हैं, उनमें एएलएस होने का खतरा सामान्य लोगों की तुलना में काफी अधिक हो सकता है। खासकर किसान, खेतों में दवा छिड़कने वाले मजदूर और कृषि क्षेत्र से जुड़े लोगों को इसके जोखिमों को लेकर सबसे ज्यादा सावधानी बरतते रहने की सलाह दी गई है।
विशेषज्ञों की टीम ने कहा, फलों, सब्जियों और दूसरी फसलों पर छिड़के जाने वाले कीटनाशकों के संपर्क में आना मोटर न्यूरॉन डिजीज, एमियोट्रोफिक लेटरल स्क्लेरोसिस का खतरा 70 फीसदी तक बढ़ाने वाला हो सकता है।
- इसका असर इतना गंभीर हो सकता है कि मरीज की मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं।
- समय के साथ चलने-फिरने, बोलने में कठिनाई आती है और कई बार सोचने-समझने व व्यवहार में भी बदलाव दिखाई देने लगते हैं।
- धीरे-धीरे मरीज अपनी रोजमर्रा की आदतों पर कंट्रोल खोने लगता है।
एमियोट्रोफिक लेटरल स्क्लेरोसिस हो सकता है बेहद खतरनाक
स्वास्थ्य विशेषज्ञ चिंता जताते रहे हैं कि एमियोट्रोफिक लेटरल स्क्लेरोसिस के शिकार लगभग 20 प्रतिशत मरीज ही पांच साल या उससे अधिक समय तक जीवित रह पाते हैं। कई मरीजों में बीमारी के बाद जीवनकाल दो साल तक का ही हो सकता है।
वैज्ञानिक अभी तक इस बीमारी की सटीक वजह का पता नहीं लगा पाए हैं। हालांकि कनाडा के क्यूबेक स्थित रॉबर्ट सॉवे इंस्टीट्यूट फॉर रिसर्च के वैज्ञानिकों ने अब इस दिशा में बड़ी जानकारी दी है।
- शोधकर्ताओं ने लगभग 800 अध्ययनों की समीक्षा की। इनमें एएलएस या अन्य प्रकार की मोटर न्यूरॉन डिजीज से जुड़े 2,000 से अधिक लोगों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया।
- विश्लेषण में पाया गया कि जिन लोगों का अपने कार्यस्थल पर कीटनाशकों से संपर्क रहा, उनमें एएलएस होने का जोखिम सामान्य लोगों की तुलना में लगभग 60 प्रतिशत अधिक था।
गौरतलब है कि ये कोई पहली बार नहीं है जब वैज्ञानिकों ने कीटनाशकों के कारण होने वाले खतरे को लेकर अलर्ट किया है। इससे पहले ब्रिटेन में क्लोरपाइरीफॉस नामक कीटनाशक पर 2016 में प्रतिबंध लगा दिया गया था। अध्ययन में प्रमाण मिले थे कि यह गर्भ में पल रहे शिशु और छोटे बच्चों के मस्तिष्क के विकास को नुकसान पहुंचा सकता है। इसी तरह पैराक्वाट नामक खरपतवारनाशक पर भी कई देशों में प्रतिबंध लगाया गया, क्योंकि इससे पार्किंसन रोग के मामलों के बढ़ने की आशंका जताई गई थी।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
इंग्लैंड स्थित शेफील्ड विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ मेडिसिन एंड पॉपुलेशन हेल्थ में क्लिनिकल लेक्चरर डॉ. जोनाथन कूपर-नॉक कहते हैं, इस अध्ययन की सबसे बड़ी बात यह है कि इसमें 11 अलग-अलग अध्ययनों और 2,000 से ज्यादा मोटर न्यूरॉन डिजीज मरीजों के आंकड़ों को शामिल किया गया है। इसलिए इसके निष्कर्ष महत्वपूर्ण हैं।
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यह पुराने आंकड़ों पर आधारित अध्ययन है, जिसमें कीटनाशकों के संपर्क का प्रत्यक्ष तरीके से मापन नहीं किया गया है। इसलिए यह निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता कि बीमारी का कारण केवल कीटनाशक ही हैं या फिर कोई दूसरा ऐसा कारक भी हो सकता है।
हालांकि फिर भी ये चिंता का विषय है कि दुनियाभर में कीटनाशकों का इस्तेमाल बढ़ रहा है और हम जाने-अनजाने इससे होने वाले जोखिमों की चपेट में आते जा रहे हैं।
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स्रोत:
Occupational exposure to pesticides increases the risk of amyotrophic lateral sclerosis: a systematic review and meta-analysis
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