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Alert: केरल के बाद अब बंगाल में फैली ये संक्रामक बीमारी, 70% रोगियों की हो जाती है मौत

हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Tue, 13 Jan 2026 01:24 PM IST
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सार

  • पश्चिम बंगाल में दो संदिग्ध निपाह मामलों की पुष्टि हुई है।
  • निपाह वायरस एक जूनोटिक बीमारी है, जो न सिर्फ काफी तेजी से फैलती है बल्कि इससे संक्रमितों में मौत का खतरा भी अधिक देखा जाता रहा है। 

two cases of Nipah virus have been detected in West Bengal know why this virus is dangerous
निपाह वायरस के मामले (सांकेतिक) - फोटो : Adobe stock photos
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विस्तार
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बीते कुछ वर्षों के आंकड़े उठाकर देखें तो पता चलता है कि देश के विभिन्न हिस्सों में संक्रामक बीमारियों का प्रकोप तेजी से बढ़ा है। फ्लू का संक्रमण हो या फिर ब्रेन ईटिंग अमीबा के मामले, पिछले साल कई तरह के संक्रामक रोग अक्सर सुर्खियों में रहे। जुलाई-अगस्त 2025 में दक्षिणी राज्य केरल में निपाह वायरस के मामलों ने खूब परेशान किया। खबरों के मुताबिक अब पश्चिम बंगाल में भी निपाह का संक्रमण सामने आया है, जिसने स्वास्थ्य विशेषज्ञों को अलर्ट कर दिया है।

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हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पश्चिम बंगाल में दो संदिग्ध निपाह मामलों की पुष्टि हुई। इसके तुरंत बाद केंद्र सरकार ने एक संयुक्त टीम को रवाना कर दिया। टीम राज्य सरकार के साथ मिलकर निगरानी, सैंपल जांच, संक्रमण रोकथाम और केस मैनेजमेंट में सहयोग करेगी।
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निपाह संक्रमण को कई मामलों में काफी खतरनाक माना जाता है, आइए इसका कारण जान लेते हैं।

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चमगादड़ों से फैलता है निपाह वायरस - फोटो : Adobe Stock

मेडिकल स्टाफ हैं दोनों संक्रमित

फिलहाल पश्चिम बंगाल की बात करें तो मीडिया रिपोर्ट्स के मताबिक दोनों प्रभावित एक प्राइवेट अस्पताल के मेडिकल स्टाफ हैं। दोनों की उम्र 22 से 25 साल के बीच है। मुख्य सचिव ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग ने कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग शुरू कर दी है। अधिकारी इस बात की जांच कर रहे हैं कि दोनों व्यक्तियों को वायरस का संक्रमण कैसे हुआ और कौन से लोग उनके संपर्क में आए थे।

स्वास्थ्य मंत्रालय ने निपाह वायरस को लेकर पहले से जारी दिशानिर्देशों को फिर जारी करते हुए पश्चिम बंगाल और आसपास के राज्यों को अलर्ट पर रहने के लिए कहा है। 

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निपाह वायरस और इसके जोखिम - फोटो : Adobe Stock Photos

निपाह संक्रमण आखिर होता क्या है?

निपाह वायरस एक जूनोटिक बीमारी है, जो न सिर्फ काफी तेजी से फैलती है बल्कि इससे संक्रमितों में मौत का खतरा भी अधिक देखा जाता रहा है। जूनोटिक रोग उन संक्रामक बीमारियों को कहा जाता है जो जानवरों से इंसानों में फैलती हैं। ये वायरस, बैक्टीरिया, परजीवी या कवक जैसे सूक्ष्मजीवों के कारण होती हैं।  ये वायरस मुख्य रूप से चमगादड़ों के संपर्क से फैलता है।

  • कुछ मामलों में सुअर, बकरी, घोड़े जैसे अन्य जानवरों के माध्यम से भी इसका संक्रमण हो सकता है।
  • संक्रमित जानवरों के संपर्क में रहने वालों में इस संक्रमण का खतरा अधिक देखा जाता है। 
  • संक्रमित जानवर के शारीरिक तरल पदार्थ (रक्त, मल, पेशाब या लार) के माध्य से इसका संक्रमण इंसानों को हो सकता है।
  • ये संक्रमण एक से दूसरे व्यक्ति में भी तेजी से फैलता है जिससे कम समय में इससे अधिक से अधिक लोगों के शिकार होने का खतरा रहता है।
  • इस संक्रमण के कारण मौत का भी खतरा अधिक होता है। इसका मृत्युदर 40-75 फीसदी के बीच देखा जाता रहा है।

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निपाह संक्रमितों को हो सकता है एन्सेफलाइटिस - फोटो : Adobe Stock Photos

संक्रमितों में एन्सेफलाइटिस का भी रहता है खतरा

निपाह वायरस इसलिए भी काफी खतरनाक माना जाता रहा है क्योंकि इससे दिमाग में गंभीर सूजन होने का जोखिम रहता है जिसे एन्सेफलाइटिस कहते हैं। इसके कारण बुखार, सिरदर्द, कन्फ्यूजन, दौरे पड़ने और गंभीर न्यूरोलॉजिकल क्षति का भी जोखिम रहता है। यही कारण है कि संक्रमितों को त्वरित रूप से उपचार उपलब्ध कराना जरूरी हो जाता है।

  • निपाह संक्रमितों को शुरुआत में फ्लू जैसे लक्षण होते हैं। इसमें में खांसी और गले में खराश से लेकर तेजी से सांस लेने, बुखार-मतली और उल्टी जैसी गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्याएं हो सकती हैं।
  • ये वायरस फेफड़ों और मस्तिष्क को भी अटैक कर सकता है। 



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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