Makar Sankranti 2026: मकर संक्रांति पर दही-चूड़ा का महत्व, क्यों खाया जाता है और सेहत को क्या फायदे मिलते हैं?
Makar Sankranti 2026: मकर संक्रांति के मौके पर यूपी बिहार के कुछ क्षेत्रों में दही-चूड़ा खाने की परंपरा है। इसका सांस्कृतिक और वैज्ञानिक महत्व है। आइए जानते हैं क्यों संक्रांति में दही चूड़ा खाया जाता है।
विस्तार
Dahi Chura Significance on Sankranti : मकर संक्रांति भारत के उन पर्वों में है, जहां आस्था, मौसम और खान-पान तीनों एक साथ बदलते हैं। जैसे ही सूर्य उत्तरायण होता है, ठंड की तीव्रता के बीच शरीर को ऊर्जा और संतुलन की जरूरत पड़ती है। इसी आवश्यकता की पूर्ति दही-चूड़ा से होती है। दही-चूड़ा एक ऐसा पारंपरिक आहार है जो दिखने में सादा होता है लेकिन अपने भीतर गहरा सांस्कृतिक और वैज्ञानिक अर्थ समेटे हुए है।
खासकर बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश और झारखंड में मकर संक्रांति की सुबह दही-चूड़ा के बिना अधूरी मानी जाती है। यह केवल भोजन नहीं, बल्कि प्रकृति के साथ तालमेल बैठाने की सदियों पुरानी समझ है, जो आज भी उतनी ही प्रासंगिक है। आइए जानते हैं मकर संक्रांति में दही चूड़ा खाने क्यों खाया जाता है, इसके फायदे और महत्व।
मकर संक्रांति 2026 कब है?
वर्ष 2026 में मकर संक्रांति 14 जनवरी व कुछ जगहों पर 15 जनवरी 2026 को मनाई जा रही है। इसी दिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है और उत्तरायण की शुरुआत होती है।
मकर संक्रांति पर दही-चूड़ा क्यों खाया जाता है?
दही-चूड़ा ठंड के मौसम में शरीर को अंदर से संतुलित रखने का पारंपरिक उपाय है।
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चूड़ा (पोहे) हल्का, सुपाच्य और तुरंत ऊर्जा देने वाला होता है
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दही शरीर की गर्मी को नियंत्रित करता है और पाचन सुधारता है
सूर्य उत्तरायण होते समय शरीर में पित्त बढ़ने लगता है, ऐसे में दही-चूड़ा इस असंतुलन को प्राकृतिक रूप से संभालता है।
दही-चूड़ा का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
- ग्रामीण भारत में दही-चूड़ा को समृद्धि और शुभता का प्रतीक माना जाता है।
- मकर संक्रांति के दिन इसे गुड़, तिल, मूंगफली और कभी-कभी फल के साथ खाया जाता है, जो जीवन में मिठास और स्थायित्व का संकेत है।
- नई फसल का पहला अन्न देवताओं को अर्पित कर फिर परिवार में बांटना, यही इसकी आत्मा है।
दही-चूड़ा खाने के स्वास्थ्य लाभ
- पाचन तंत्र को मजबूत करता है
- सर्दियों में शरीर को तुरंत ऊर्जा देता है
- आंतों के अच्छे बैक्टीरिया बढ़ाता है
- एसिडिटी और गैस की समस्या से राहत
- वजन संतुलन में सहायक
- आधुनिक न्यूट्रिशन भी मानता है कि दही और चावल आधारित आहार प्रोबायोटिक और कार्बोहाइड्रेट का आदर्श संतुलन है।