Hereditary Diabetes Risk: आजकल की जीवनशैली में डायबिटीज, हाई बीपी और थायराइड जैसी बीमारियां घर-घर की कहानी बन गई हैं। विशेष रूप से अगर आपके माता-पिता इन बीमारियों से जूझ रहे हैं, तो आपके लिए जोखिम और भी बढ़ जाता है। प्रसिद्ध डॉक्टर मल्हार गणला ने इसी विषय पर सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया है उन्होंने बताया है कि जेनेटिक रिस्क वाले लोगों के लिए 'प्रोटीन पाउडर' एक दवा की तरह काम कर सकता है, उन्हें इसका सेवन जरूर करना चाहिए।
Doctor Tips: माता-पिता हैं डायबिटिक तो जरूर बरतें ये सावधानियां, वरना आप भी हो सकते हैं शिकार
Diabetes Prevention Tips: अक्सर ऐसा देखने को मिलता है कि जिसके परिवार में किसी को भी पहले से डायबिटीज की समस्या होती है, उनके आने वाले जनरेशन वाले लोग अगर सावधानी न बरतें तो बहुत कम उम्र में ही डायबिटीज के शिकार हो जाते हैं। डॉक्टर ने इस लेख में इसी से बचने कुछ तरीके बताए हैं, जिसे आपको भी जानना चाहिए।
शाकाहारी स्रोतों का 'कैलोरी लोड' और प्रोटीन की कमी
डॉक्टर मल्हार के अनुसार, शाकाहारी भोजन से 80 ग्राम प्रोटीन का लक्ष्य पूरा करना बहुत मुश्किल है। अगर आप डाइट से अतिरिक्त 40 ग्राम प्रोटीन ढूंढते हैं, तो उसके साथ मिलने वाला कैलोरी लोड आपके शरीर को फैट के रूप में जमा होने लगते हैं।
उदाहरण के लिए, 40 ग्राम प्रोटीन 'व्हे आइसोलेट' से लेने पर मात्र 160 कैलोरी मिलती है, लेकिन वही मात्रा अगर आप दाल, डेयरी, ड्राई फ्रुट्स, सोया से लेंगे तो पर लगभग 570 कैलोरी आपके शरीर में जमा होता है। यह 500 एक्स्ट्रा कैलोरी आपके शरीर में फैट के रूप में इकट्ठा होता है और हर दिन शरीर पर बोझ बनकर मेटाबॉलिक बीमारियों को जन्म देती है।
प्रोटीन पाउडर बनाम प्राकृतिक स्रोत
डॉक्टर मल्हार ने आंकड़ों के जरिए समझाया है कि व्हे आइसोलेट प्रोटीन का सबसे प्रभावी स्रोत है क्योंकि इसमें प्रति ग्राम प्रोटीन पर केवल 4 कैलोरी होती है। इसके विपरीत, चना, फलियां और डेयरी उत्पादों में प्रोटीन के साथ कार्बोहाइड्रेट और फैट का भारी मिश्रण होता है।
जहां दालों में 100 कैलोरी में सिर्फ 7 ग्राम प्रोटीन मिलता है, वहीं मेवे बहुत कैलोरी डेंस होते हैं। शाकाहारी स्रोतों से प्रोटीन पूरा करने की कोशिश में हम अनजाने में मोटापे और शुगर को न्योता दे देते हैं।
डॉक्टर का कहना है कि अगर आप मांसाहारी हैं, तो जिस दिन आप चिकन या मछली खाते हैं, उस दिन सप्लीमेंट की जरूरत नहीं पड़ती क्योंकि नॉन-वेज में प्रोटीन डेंसिटी ज्यादा होती है। लेकिन शुद्ध शाकाहारियों के लिए स्थिति चुनौतीपूर्ण है।
वेजीटेरियन डाइट में प्रोटीन के साथ कार्ब्स का आना अनिवार्य है, जिसे 30 की उम्र के बाद शरीर संभाल नहीं पाता। इसलिए अस्पताल में भर्ती होने का इंतजार करने के बजाय अभी से 30-40 ग्राम प्रोटीन सप्लीमेंट के जरिए लेना शुरू करना एक समझदारी भरा कदम है।
क्या करें?
यह समझना जरूरी है कि प्रोटीन केवल बॉडी बनाने के लिए नहीं, बल्कि शरीर के सुचारू कामकाज और बीमारियों से बचाव के लिए जरूरी है। डॉक्टर मल्हार की सलाह स्पष्ट है कि अगर आपके परिवार में मेटाबॉलिक बीमारियों का इतिहास है, तो प्रोटीन की कमी को नजरअंदाज न करें।
आइसोलेटेड प्रोटीन सोर्स आपकी डाइट को संतुलित रखते हैं और अतिरिक्त कैलोरी के बोझ से बचाते हैं। अपनी सेहत के प्रति जागरूक बनें और उम्र के तीसरे दशक में ही सही सप्लीमेंट का चुनाव कर खुद को सुरक्षित करें।
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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