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Doctor Tips: माता-पिता हैं डायबिटिक तो जरूर बरतें ये सावधानियां, वरना आप भी हो सकते हैं शिकार

हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिखर बरनवाल Updated Tue, 13 Jan 2026 02:47 PM IST
सार

Diabetes Prevention Tips: अक्सर ऐसा देखने को मिलता है कि जिसके परिवार में किसी को भी पहले से डायबिटीज की समस्या होती है, उनके आने वाले जनरेशन वाले लोग अगर सावधानी न बरतें तो बहुत कम उम्र में ही डायबिटीज के शिकार हो जाते हैं। डॉक्टर ने इस लेख में इसी से बचने कुछ तरीके बताए हैं, जिसे आपको भी जानना चाहिए।

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Health Tips: Parents Have Diabetes Precautions for Child Son and Daughter Early Preventions
डायबिटीज - फोटो : Amar Ujala

Hereditary Diabetes Risk: आजकल की जीवनशैली में डायबिटीज, हाई बीपी और थायराइड जैसी बीमारियां घर-घर की कहानी बन गई हैं। विशेष रूप से अगर आपके माता-पिता इन बीमारियों से जूझ रहे हैं, तो आपके लिए जोखिम और भी बढ़ जाता है। प्रसिद्ध डॉक्टर मल्हार गणला ने इसी विषय पर सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया है उन्होंने बताया है कि जेनेटिक रिस्क वाले लोगों के लिए 'प्रोटीन पाउडर' एक दवा की तरह काम कर सकता है, उन्हें इसका सेवन जरूर करना चाहिए। 



अक्सर लोग प्रोटीन सप्लीमेंट को 'आर्टिफिशियल' कहकर इससे परहेज करते हैं, लेकिन डॉक्टर मल्हार का तर्क है कि 30 की उम्र के बाद जिन दवाओं को आप मजबूरी में खाएंगे, वे भी आर्टिफिशिय ही होती हैं और फैक्ट्रियों में ही बनती हैं। 

हमारे शरीर को रोजाना लगभग 80 ग्राम प्रोटीन की जरूरत होती है, जिसमें से केवल 40 ग्राम ही हम प्राकृतिक डाइट से ले पाते हैं। शेष 40 ग्राम की कमी को पूरा करने के चक्कर में शाकाहारी लोग अक्सर दाल, पनीर और मेवे ज्यादा खाने लगते हैं, जिससे शरीर में अतिरिक्त कैलोरीज का बोझ बढ़ जाता है। यही अतिरिक्त कैलोरी फैट बनकर इंसुलिन रेजिस्टेंस पैदा करती है और जो आपको डायबिटीज की ओर धकेल देती है।

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प्रोटीन - फोटो : Adobe Stock

शाकाहारी स्रोतों का 'कैलोरी लोड' और प्रोटीन की कमी
डॉक्टर मल्हार के अनुसार, शाकाहारी भोजन से 80 ग्राम प्रोटीन का लक्ष्य पूरा करना बहुत मुश्किल है। अगर आप डाइट से अतिरिक्त 40 ग्राम प्रोटीन ढूंढते हैं, तो उसके साथ मिलने वाला कैलोरी लोड आपके शरीर को फैट के रूप में जमा होने लगते हैं।

उदाहरण के लिए, 40 ग्राम प्रोटीन 'व्हे आइसोलेट' से लेने पर मात्र 160 कैलोरी मिलती है, लेकिन वही मात्रा अगर आप दाल, डेयरी, ड्राई फ्रुट्स, सोया से लेंगे तो पर लगभग 570 कैलोरी आपके शरीर में जमा होता है। यह 500 एक्स्ट्रा कैलोरी आपके शरीर में फैट के रूप में इकट्ठा होता है और हर दिन शरीर पर बोझ बनकर मेटाबॉलिक बीमारियों को जन्म देती है।

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प्रोटीन पाउडर - फोटो : Adobe Stock

प्रोटीन पाउडर बनाम प्राकृतिक स्रोत
डॉक्टर मल्हार ने आंकड़ों के जरिए समझाया है कि व्हे आइसोलेट प्रोटीन का सबसे प्रभावी स्रोत है क्योंकि इसमें प्रति ग्राम प्रोटीन पर केवल 4 कैलोरी होती है। इसके विपरीत, चना, फलियां और डेयरी उत्पादों में प्रोटीन के साथ कार्बोहाइड्रेट और फैट का भारी मिश्रण होता है।

जहां दालों में 100 कैलोरी में सिर्फ 7 ग्राम प्रोटीन मिलता है, वहीं मेवे बहुत कैलोरी डेंस होते हैं। शाकाहारी स्रोतों से प्रोटीन पूरा करने की कोशिश में हम अनजाने में मोटापे और शुगर को न्योता दे देते हैं।

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प्रोटीन - फोटो : Adobe Stock
नॉन-वेजिटेरियन और वेजिटेरियन के लिए अलग सलाह
डॉक्टर का कहना है कि अगर आप मांसाहारी हैं, तो जिस दिन आप चिकन या मछली खाते हैं, उस दिन सप्लीमेंट की जरूरत नहीं पड़ती क्योंकि नॉन-वेज में प्रोटीन डेंसिटी ज्यादा होती है। लेकिन शुद्ध शाकाहारियों के लिए स्थिति चुनौतीपूर्ण है।

वेजीटेरियन डाइट में प्रोटीन के साथ कार्ब्स का आना अनिवार्य है, जिसे 30 की उम्र के बाद शरीर संभाल नहीं पाता। इसलिए अस्पताल में भर्ती होने का इंतजार करने के बजाय अभी से 30-40 ग्राम प्रोटीन सप्लीमेंट के जरिए लेना शुरू करना एक समझदारी भरा कदम है।
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डायबिटीज - फोटो : Freepik.com

क्या करें?
यह समझना जरूरी है कि प्रोटीन केवल बॉडी बनाने के लिए नहीं, बल्कि शरीर के सुचारू कामकाज और बीमारियों से बचाव के लिए जरूरी है। डॉक्टर मल्हार की सलाह स्पष्ट है कि अगर आपके परिवार में मेटाबॉलिक बीमारियों का इतिहास है, तो प्रोटीन की कमी को नजरअंदाज न करें।

आइसोलेटेड प्रोटीन सोर्स आपकी डाइट को संतुलित रखते हैं और अतिरिक्त कैलोरी के बोझ से बचाते हैं। अपनी सेहत के प्रति जागरूक बनें और उम्र के तीसरे दशक में ही सही सप्लीमेंट का चुनाव कर खुद को सुरक्षित करें।


नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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