कहीं क्रिसमस, न्यू ईयर की शॉपिंग सिर दर्द ना बन जाएं, अपनाएं ये जरूरी टिप्स
लुभावने विज्ञापनों को देखा या बंपर सेल के बैनर पर नजर गई और आप सामान खरीदने निकल गईं। लेकिन कभी सोचा है आपने कि जो खरीद कर ले आईं, क्या सचमुच उसकी जरूरत थी आपको? क्रिसमस की घंटियों की रुनझुन कानों में दस्तक देने लगी है, मन में उत्साह-उमंग जाग रहे हैं, क्योंकि क्रिसमस, पार्टी, शॉपिंग और उपहारों का त्योहार है। आपका कोई अपना आपके लिए सैंटा बनकर यादगार उपहार देता है और आप भी किसी न किसी के लिए सैंटा बनती होंगी।
गिफ्ट देना हो या पाना, बाजार में आना-जाना तो लगा ही रहता है। वैसे भी, इस मौसम में बाजार की रौनक देखते ही बनती है। रंग-बिरंगी लाइटों और क्रिसमस ट्री से सजे-धजे बाजार, लुभावने विज्ञापन, बंपर सेल के बड़े-बड़े बैनर। इन प्रलोभनों के जाल में फंसता हमारा नासमझ मन। फिर कोई बचे तो भला कैसे? वैसे त्योहार खुशियों के प्रतीक होते हैं, मगर हमारी नासमझी इन्हें फिजूलखर्ची और बिगड़े बजट का प्रतीक बना देती है। त्योहार में हम इतने मस्त हो जाते हैं कि बिगड़े बजट का होश ही नहीं रहता, लेकिन बाद में बैठकर पछताते हैं। हमें ऐसा न करना पड़े, इसके लिए कुछ बातों को ध्यान में रखने की जरूरत है।
कुछ भी खरीदने से पहले यह देखें कि वह आपकी जरूरत है या चाहत। यदि आपका मन लुभावने विज्ञापनों और बंपर सेल के बैनर देखकर बिना जरूरत के भी खरीदारी करने को मचल पड़े, तो खुद से यह सवाल पूछें। यह खर्च मेरी जरूरत है या केवल चाहत है? यदि उत्तर चाहत है, तो संभल जाएं। यदि इस समय आप अपने मन को नियंत्रण में रख लें, तो निश्चित ही फिजूलखर्ची से बच जाएंगी।
दूसरों के सामने खुद को बड़ा दिखाने की मानसिकता फिजूलखर्ची की बड़ी वजह होती है। यदि आप ऐसी मानसिकता की शिकार हैं, तो हजारों रुपए खर्च करने के बाद भी कभी संतुष्टि का अहसास नहीं कर पाएंगी। क्योंकि झूठा दिखावा करके, महंगे सामान और कपड़े खरीदकर हम जिन लोगों के सामने अपने स्टेट्स को ऊंचा दिखाने का प्रयास करते हैं, वही लोग पीठ पीछे हमारा मजाक उड़ाते हैं। अपनी स्थिति को खुले दिल से स्वीकार करें और झूठा दिखावा करने से बचें।
त्योहार के मौसम में चारों ओर सेल की धूम रहती है, जिन्हें देखकर लोगों में शॉपिंग का नशा छाने लगता है और वे बिना जरूरत के भी शॉपिंग करने चल देते हैं। बहुत से लोग लेने कुछ जाते हैं, परंतु लेकर कुछ आ जाते हैं। यदि आप भी बिना सोचे समझे विज्ञापन की ‘बाय वन गेट वन’ स्कीमों में उलझ जाएंगी, तो अनावश्यक शॉपिंग कर बैठेंगी और धन की बर्बादी करेंगी। कोई भी सामान खरीदने से पहले इतना जरूर सोचें, क्या आपको वास्तव में उस चीज की जरूरत है अगर जरूरत नहीं है, तो सस्ते में मिलने के बावजूद भी वह व्यर्थ ही है।
फिजूलखर्ची पर नियंत्रण करने का उपाय है, सीमा में रहकर बजट बनाना। लेकिन ज्यादातर लोगों का स्वभाव होता है कि वे बिना बजट बनाए दिल खोलकर खर्च करती हैं और बिल हाथ में आने पर उनके होश उड़ते हैं। इसका एक मुख्य कारण क्रेडिट कार्ड का प्रचलन भी है। हाथ में अगर क्रेडिट कार्ड हो तो आप सोचती हैं कि इसका बिल भविष्य में आएगा, तब की तब देखेंगे। बाद में स्थिति आपके नियंत्रण से बाहर हो जाती है और आप कर्ज के जाल में फंस जाती हैं। आपके साथ ऐसा न हो, इसलिए क्रेडिट कार्ड की जगह शॉपिंग के लिए डेबिट कार्ड का इस्तेमाल करें। पहले से ही अपनी आय की एक निश्चित रकम सेविंग के लिए अलग रख दें और बची हुई रकम में ही बजट प्लान कर शॉपिंग करें।
इस दौरान स्वीट्स, केक आदि पकवानों की बिक्री जोरों पर होती है। ऐसे अवसरों पर उनके दाम तो ज्यादा होते ही हैं, साथ ही उनकी क्वालिटी पर भी प्रश्न चिन्ह लगे होते हैं। शहर के बाजारों में मिलने वाले खोए, मावे, दूध, मिठाई आदि में मिलावट के कारण स्वास्थ्य संबंधित परेशानियां खड़ी हो सकती हैं। इसलिए त्योहारों पर जहां तक संभव हो, घर पर ही पकवान बनाएं। इससे बचत तो होगी ही, आपका स्वास्थ्य भी सही रहेगा।