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Makar Sankranti 2026 Live: शुभ योग में मकर संक्रांति आज, जानें क्या करें और क्या न करें

धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: श्वेता सिंह Updated Wed, 14 Jan 2026 05:52 PM IST
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खास बातें

Makar Sankranti 2026 Wishes Shubh Muhurat Live Updates in Hindi: मकर संक्रांति को लेकर तारीख का कन्फ्यूजन जरूर है, लेकिन असल में 14 और 15 जनवरी दोनों ही दिन यह पर्व मनाया जा सकता है। जो लोग गुरुवार या एकादशी के नियम मानते हैं वे 14 जनवरी को तय समय के बाद पूजा-पाठ और खिचड़ी का दान-सेवन कर सकते हैं, जबकि बाकी लोग 15 जनवरी को भी पूरे विधि-विधान से संक्रांति मना सकते हैं।

Makar Sankranti 2026 Live Date Shubh Muhurat Snan Puja Vidhi & Daan
makar sankranti 2026 - फोटो : amar ujala
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लाइव अपडेट

05:52 PM, 14-Jan-2026

15 जनवरी को मकर संक्रांति


ज्योतिषियों के मुताबिक, यदि आप 15 जनवरी को मकर संक्रांति मना रहे हैं, तो सुबह 4 बजे से दोपहर 3 बजे के बीच स्नान करना सबसे उत्तम माना जा रहा है। 
05:46 PM, 14-Jan-2026

मकर संक्रांति और उत्तरायण में है अंतर 


मकर संक्रांति का सीधा संबंध 'उत्तरायण' से है। प्राचीन काल में उत्तरायण और मकर संक्रांति एक ही दिन होते थे (21-22 दिसंबर)। लेकिन पृथ्वी की गति में आए इस बदलाव के कारण अब उत्तरायण 21 दिसंबर को होता है, जबकि सूर्य का मकर राशि में प्रवेश (मकर संक्रांति) 14-15 जनवरी को। वैज्ञानिक आधार पर यह पर्व हमारे सौर मंडल की अद्भुत गतिशीलता का प्रतीक है। उत्तरायण और मकर संक्रांति के बीच के अंतर को समझना बहुत दिलचस्प है, क्योंकि आज के समय में हम इन दोनों को एक ही मान लेते हैं, जबकि विज्ञान की दृष्टि से इनमें लगभग 24-25 दिनों का अंतर आ चुका है।
05:34 PM, 14-Jan-2026

कब खा सकते हैं दही-चूड़ा?

मकर संक्रांति और षटतिला एकादशी व्रत को ध्यान में रखते हुए खिचड़ी और दही चूड़ा खाने की परंपरा 15 जनवरी को निभाई जा सकती है। इस दिन खिचड़ी और दही चूड़ा का सेवन और दान पुण्यकारी माना जाता है। 
05:19 PM, 14-Jan-2026

मकर संक्रांति के दिन क्या करना चाहिए

  • पवित्र स्नान करें
  • सूर्य देव की आराधना करें
  • तिल का विशेष प्रयोग करें
  • गौ सेवा करें
04:47 PM, 14-Jan-2026

सूर्यास्त से पहले अवश्य करें यह एक छोटा उपाय

श्री सूर्य चालीसा
 दोहा
 
कनक बदन कुंडल मकर, मुक्ता माला अंग।
पद्मासन स्थित ध्याइए, शंख चक्र के संग।।
 
चौपाई
जय सविता जय जयति दिवाकर, सहस्रांशु सप्ताश्व तिमिरहर।
भानु, पतंग, मरीची, भास्कर, सविता, हंस, सुनूर, विभाकर।
 
विवस्वान, आदित्य, विकर्तन, मार्तण्ड, हरिरूप, विरोचन।
अम्बरमणि, खग, रवि कहलाते, वेद हिरण्यगर्भ कह गाते।
 
सहस्रांशु, प्रद्योतन, कहि कहि, मुनिगन होत प्रसन्न मोदलहि।
अरुण सदृश सारथी मनोहर, हांकत हय साता चढ़ि रथ पर।
 
मंडल की महिमा अति न्यारी, तेज रूप केरी बलिहारी।
उच्चैश्रवा सदृश हय जोते, देखि पुरन्दर लज्जित होते।
 
मित्र, मरीचि, भानु, अरुण, भास्कर, सविता,
सूर्य, अर्क, खग, कलिहर, पूषा, रवि,
 
आदित्य, नाम लै, हिरण्यगर्भाय नमः कहिकै।
द्वादस नाम प्रेम सो गावैं, मस्तक बारह बार नवावै।
 
चार पदारथ सो जन पावै, दुख दारिद्र अघ पुंज नसावै।
नमस्कार को चमत्कार यह, विधि हरिहर कौ कृपासार यह।
 
सेवै भानु तुमहिं मन लाई, अष्टसिद्धि नवनिधि तेहिं पाई।
बारह नाम उच्चारन करते, सहस जनम के पातक टरते।
 
उपाख्यान जो करते तवजन, रिपु सों जमलहते सोतेहि छन।
छन सुत जुत परिवार बढ़तु है, प्रबलमोह को फंद कटतु है।
 
अर्क शीश को रक्षा करते, रवि ललाट पर नित्य बिहरते।
सूर्य नेत्र पर नित्य विराजत, कर्ण देश पर दिनकर छाजत।
 
भानु नासिका वास करहु नित, भास्कर करत सदा मुख कौ हित।
ओठ रहैं पर्जन्य हमारे, रसना बीच तीक्ष्ण बस प्यारे।
 
कंठ सुवर्ण रेत की शोभा, तिग्मतेजसः कांधे लोभा।
पूषा बाहु मित्र पीठहिं पर, त्वष्टा-वरुण रहम सुउष्णकर।
 
युगल हाथ पर रक्षा कारन, भानुमान उरसर्मं सुउदरचन।
बसत नाभि आदित्य मनोहर, कटि मंह हंस, रहत मन मुदभर।
 
जंघा गोपति, सविता बासा, गुप्त दिवाकर करत हुलासा।
विवस्वान पद की रखवारी, बाहर बसते नित तम हारी।
 
सहस्रांशु, सर्वांग सम्हारै, रक्षा कवच विचित्र विचारे।
अस जोजजन अपने न माहीं, भय जग बीज करहुं तेहि नाहीं।
 
दरिद्र कुष्ट तेहिं कबहुं न व्यापै, जोजन याको मन मंह जापै।
अंधकार जग का जो हरता, नव प्रकाश से आनन्द भरता।
 
ग्रह गन ग्रसि न मिटावत जाही, कोटि बार मैं प्रनवौं ताही।
मन्द सदृश सुतजग में जाके, धर्मराज सम अद्भुत बांके।
 
धन्य-धन्य तुम दिनमनि देवा, किया करत सुरमुनि नर सेवा।
भक्ति भावयुत पूर्ण नियम सों, दूर हटत सो भव के भ्रम सों।
 
परम धन्य सो नर तनधारी, हैं प्रसन्न जेहि पर तम हारी।
अरुण माघ महं सूर्य फाल्गुन, मध वेदांगनाम रवि उदय।
 
भानु उदय वैसाख गिनावै, ज्येष्ठ इन्द्र आषाढ़ रवि गावै।
यम भादों आश्विन हिमरेता, कातिक होत दिवाकर नेता।
अगहन भिन्न विष्णु हैं पूसहिं, पुरुष नाम रवि हैं मलमासहिं।
 
दोहा
 भानु चालीसा प्रेम युत, गावहिं जे नर नित्य।
सुख सम्पत्ति लहै विविध, होंहि सदा कृतकृत्य।।
04:20 PM, 14-Jan-2026

क्या आज खा सकते हैं खिचड़ी?

मकर संक्रांति को लेकर तारीख का कन्फ्यूजन जरूर है, लेकिन असल में 14 और 15 जनवरी दोनों ही दिन यह पर्व मनाया जा सकता है। जो लोग गुरुवार या एकादशी के नियम मानते हैं वे 14 जनवरी को तय समय के बाद पूजा-पाठ और खिचड़ी का दान-सेवन कर सकते हैं, जबकि बाकी लोग 15 जनवरी को भी पूरे विधि-विधान से संक्रांति मना सकते हैं।
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04:00 PM, 14-Jan-2026

मकर संक्रांति और खिचड़ी का धार्मिक महत्व

मकर संक्रांति को कई क्षेत्रों में खिचड़ी पर्व के रूप में भी मनाया जाता है। इस दिन चावल और दाल से बनी खिचड़ी का सेवन और दान अत्यंत शुभ माना जाता है। यह पर्व नई फसल के आगमन का प्रतीक है और खिचड़ी को स्वास्थ्य, ग्रह शांति और समृद्धि के लिए प्रसाद रूप में ग्रहण किया जाता है।
03:32 PM, 14-Jan-2026

घर पर तिल के उपाय

घर की उत्तर दिशा (कुबेर की दिशा) में तांबे या मिट्टी के छोटे पात्र में तिल भरकर रखें और संक्रांति के अगले दिन इसे दान कर दें। यह उपाय व्यापार में वृद्धि और अटके हुए धन को वापस पाने में मदद करता है।
03:19 PM, 14-Jan-2026

मकर संक्रांति पर सुख-समृद्धि के लिए तिल-हवन

घर में सुख-शांति बनाए रखने के लिए संक्रांति की शाम को छोटा सा हवन करें और उसमें काले तिल की आहुति दें। "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का जाप करते हुए आहुति देने से घर की नकारात्मक ऊर्जा खत्म होती है और लक्ष्मी जी का स्थायी वास होता है।
02:46 PM, 14-Jan-2026

मकर संक्रांति पर राशि अनुसार दान

धनु: पीली दाल या हल्दी का दान करें।
मकर: काले तिल या काले वस्त्र का दान करें।
कुंभ: काले तिल या कंबल का दान करें।
मीन: चावल या चने की दाल का दान करें।
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