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राम मंदिर चढ़ावा चोरी: चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव तक नहीं पहुंची FIR की आंच; बैंक अधिकारी भी 'बेदाग'

सूरज शुक्ला, अमर उजाला लखनऊ Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Fri, 26 Jun 2026 03:52 AM IST
सार

आशंका थी कि एफआईआर की आंच किसी बड़े तक नहीं पहुंचेगी, वैसा ही हुआ। ट्रस्ट के बड़े नाम चंपत राय और अनिल मिश्रा व निर्माण समिति के सहायक गोपाल राव का केस में कहीं कोई जिक्र नहीं है।

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Ram Mandir donation theft case: Champat Rai, Anil Mishra, and Gopal Rao remain untouched by the FIR.
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

राम मंदिर चढ़ावा चोरी के प्रकरण में जिन पर केस दर्ज हुआ है, वे सभी छोटी मछलियां हैं। आशंका थी कि एफआईआर की आंच किसी बड़े तक नहीं पहुंचेगी, वैसा ही हुआ। ट्रस्ट के बड़े नाम चंपत राय और अनिल मिश्रा व निर्माण समिति के सहायक गोपाल राव का केस में कहीं कोई जिक्र नहीं है। साफ है कि फिलहाल उन्हें बचा लिया गया है। यह इसलिए भी क्योंकि केस ट्रस्ट की तरफ से ही दर्ज कराया गया है।

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मामला उजागर होने के बाद से ही लीपापोती शुरू हो गई थी। ट्रस्ट के पदाधिकारी खुद ही अफसरों की तरह छानबीन शुरू कर चुके थे। यही नहीं, संदिग्धों को पकड़कर उनके घर से रकम बरामद भी की थी। लेकिन केस दर्ज कराने की जहमत नहीं उठाई गई। एक सप्ताह बाद एसआईटी गठन की मांग की गई। तब एसआईटी का गठन किया गया। तभी अंदेशा था कि मामले में सिर्फ छोटों पर कार्रवाई की तैयारी है। सबसे बड़ा सवाल है कि मामले में ट्रस्ट के बड़े पदाधिकारियों चंपत राय व अनिल मिश्रा के करीबियों की भूमिका सामने आई, तब भी उन्हें भनक नहीं लगी, यह समझ से परे है। यही वजह है कि हर तरफ इन पदाधिकारियों पर सवाल खड़े हो रहे हैं। सूत्रों ने पहले ही बताया था कि केस में इनमें से कोई शामिल नहीं होगा।
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बैंक का भी कोई अधिकारी नहीं फंसा
चढ़ावा गणना में बैंक की बड़ी भूमिका रहती है। मामले में बैंक की लापरवाही भी उजागर हुई थी, क्योंकि बैंक ने संविदाकर्मियों के सहारे गणना की व्यवस्था तय कर रखी थी। उनमें भी जो संविदाकर्मी रखे गए थे, उनमें पदाधिकारियों के करीबी, रिश्तेदार या उनसे जुड़े लोग थे। वहीं, जब एफआईआर हुई तो उसमें किसी बैंक अधिकारी का नाम नहीं है।
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कुछ इस तरह तय हो जाएगी जिम्मेदारी
मामले में छोटे कर्मियों पर केस दर्ज कर मामला शांत कराने का प्रयास किया जाएगा। अब तक वही हुआ। वहीं ट्रस्ट के प्रमुख पदाधिकारी खुद इस्तीफा देकर ट्रस्ट से अलग हो सकते हैं, जिससे यह संदेश दिया जाएगा कि जिनकी लापरवाही रही, वे भी हट गए। लेकिन सवाल है कि जिन पर पूरी जिम्मेदारी थी, उनके करीबियों, खासकर टिन्नू, अनुकल्प व लवकुश ने पूरा खेल कर दिया, तो उनकी भी जिम्मेदारी तय क्यों नहीं की गई?

विहिप को साख की चिंता
राम मंदिर में चढ़ावा और दानराशि प्रबंधन को लेकर उठे विवाद तथा एसआईटी जांच के बीच विश्व हिंदू परिषद (विहिप) की सक्रियता बढ़ गई है। इसी बीच राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और विहिप के शीर्ष पदाधिकारियों के बीच बृहस्पतिवार को हुई एक महत्वपूर्ण बैठक ने नए राजनीतिक और सांगठनिक कयासों को जन्म दे दिया है। संगठन के भीतर यह चर्चा तेज हो गई है कि यदि विवाद लंबा खिंचता है तो मंदिर आंदोलन और विहिप की साख बचाने के लिए बड़े फैसले लिए जा सकते हैं।

सूत्रों के अनुसार, बैठक में राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी डॉक्टर अनिल मिश्र, निर्माण प्रभारी गोपाल राव, समेत विहिप के महामंत्री बजरंग लाल बांगड़ा, केंद्रीय संगठन महामंत्री मिलिंद परांडे तथा केंद्रीय सह-संगठन महामंत्री विनायक राव सहित कई प्रमुख पदाधिकारी मौजूद रहे। बैठक का आधिकारिक एजेंडा सार्वजनिक नहीं किया गया, लेकिन चढ़ावा विवाद, एसआईटी जांच और उससे उपजे हालात को लेकर चर्चा होने की बात कही जा रही है।

राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय इस समय दान और चढ़ावा प्रबंधन को लेकर उठे सवालों के केंद्र में हैं। ऐसे समय में विहिप के शीर्ष नेतृत्व और ट्रस्ट के बीच हुई बैठक को सामान्य औपचारिक बैठक मानने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। संगठन से जुड़े सूत्रों का कहना है कि जांच से उत्पन्न परिस्थितियों और उसके संभावित प्रभावों पर गंभीर मंथन हुआ है।

सुप्रीम कोर्ट ने याची से 29 को याचिका का उल्लेख करने को कहा
सुप्रीम कोर्ट ने एक याचिकाकर्ता से कहा कि वह अयोध्या में श्रीराम मंदिर को मिले दान में हेराफेरी के मामले में प्राथमिकी दर्ज करने और निष्पक्ष तथा समयबद्ध जांच की मांग करने वाली अपनी याचिका का उल्लेख 29 जून को कोर्ट के सामने करे। मामले को तत्काल सूचीबद्ध करने के लिए जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस जोयमाल्या बागची की पीठ के समक्ष रखा गया था। अधिवक्ताओं अजय कुमार राय और दिनेश कुमार यादव की याचिका में कहा गया है कि सीबीआई के नेतृत्व वाले विशेष जांच दल (एसआईटी) को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के मामलों और प्रशासन से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं तथा अन्य कथित अवैधताओं की जांच करनी चाहिए। 

भगवान के घर में डाका पड़ा, एसआईटी कर रही लीपापोती : अरविंद केजरीवाल
राम मंदिर के दान एवं चढ़ावा प्रकरण को लेकर चल रहे विवाद के बीच आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक व दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल बृहस्पतिवार को अयोध्या पहुंचे। उन्होंने कहा कि वह शुक्रवार को रामलला के दर्शन करेंगे और भगवान राम के समक्ष न्याय की प्रार्थना करेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि भगवान के घर में डाका डाला गया है। भगवान की पादुका, माला, गहने और चढ़ावा तक चोरी कर लिया गया। उनका मन विचलित है। एसआईटी लीपापोती का प्रयास कर रही है और बड़े लोगों को बचाने के लिए जांच की जा रही है। जब उनसे पूछा गया कि रामलला के दर्शन के दौरान वह क्या मांगेंगे, तो उन्होंने कहा कि इसका जवाब वह शुक्रवार को दर्शन के बाद देंगे। राम मंदिर दान प्रकरण को लेकर केजरीवाल ने एसआईटी जांच पर भी सवाल खड़े किए। उनका कहना था कि बिना एफआईआर दर्ज किए एसआईटी का गठन कानून सम्मत नहीं माना जा सकता। उधर, केजरीवाल के अयोध्या आगमन को लेकर रामनगरी के संत समाज के एक वर्ग ने विरोध दर्ज कराया है। जगद्गुरु परमहंसाचार्य और हनुमानगढ़ी के पुजारी राजूदास ने वीडियो संदेश जारी कर उनके दौरे पर आपत्ति जताई।

संजय सिंह ने एसआईटी को दस्तावेज सौंपे करोड़ों रुपये के घोटाले का आरोप लगाया
राम मंदिर में चढ़ावा चोरी मामले के तूल पकड़ने के बाद अब जमीन की खरीद-फरोख्त का मामला एसआईटी ने खंगालना शुरू कर दिया है। आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने एसआईटी को जमीन की खरीद-फरोख्त संबंधी 11 दस्तावेज सौंपे। दावा किया कि इन जमीनों की बिक्री व खरीदारी में करोड़ों का घोटाला किया गया। सांसद ने आरोप लगाया है कि मंदिर के लिए कई जमीनें बाजार मूल्य से कई गुना अधिक कीमत पर खरीदी गईं। संजय सिंह ने कहा है कि जिन लोगों के नाम हाल ही में मंदिर के चढ़ावे और दानपात्र में अनियमितताओं के मामले में सामने आए हैं, उन्हीं लोगों की भूमिका जमीन खरीद के विवादित सौदों में भी दिखाई दे रही है। उन्होंने दस्तावेज देने के साथ मामले की गहनता से जांच कर कार्रवाई की मांग की। 


2 करोड़ की जमीन कुछ ही मिनटों में 18.5 करोड़ की : संजय सिंह द्वारा सौंपे गए दस्तावेज के अनुसार 18 मार्च 2021 को सुल्तान अंसारी और रवि मोहन तिवारी ने कुसुम पाठक और हरीश पाठक से गाटा संख्या 243, 244 और 246 की जमीन दो करोड़ रुपये में खरीदी। आरोप है कि उसी दिन कुछ ही देर बाद यही जमीन ट्रस्ट को 18.5 करोड़ रुपये में बेच दी गई। 

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