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Agar Malwa News: मां बगलामुखी मंदिर परिसर की कीमती जमीन से हटा अतिक्रमण, कोर्ट के फैसले के बाद कार्रवाई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगर मालवा
Published by: अर्पित याज्ञनिक
Updated Sat, 29 Nov 2025 09:15 AM IST
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सार
फैसला आते ही शुक्रवार देर रात पुलिस प्रशासन, राजस्व विभाग और नगर परिषद की संयुक्त टीम मौके पर पहुंची और जेसीबी की मदद से वर्षों पुराने अतिक्रमण को हटाया गया। कार्रवाई देर रात तक चलती रही और परिसर में भारी भीड़ के बीच अतिक्रमणकर्ताओं में हड़कंप मचा रहा।
कोर्ट फैसला। (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
जिले के नलखेड़ा में स्थित विश्व प्रसिद्ध मां बगलामुखी मंदिर की कीमती भूमि को लेकर हाई कोर्ट ने फैसला सुनाया। इसके बाद शुक्रवार रात को पुलिस प्रशासन और अन्य विभागों की टीम मौके पर पहुंची। जेसीबी की मदद से जमीन पर किए गए अतिक्रमण को हटा दिया गया। कार्रवाई देर रात तक चली और परिसर में भीड़ लगी रही।
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दरअसल आगर मालवा जिले के नलखेड़ा स्थित प्रसिद्ध मूर्ति श्रीराम मंदिर की कीमती भूमि को लेकर मामला हाईकोर्ट में चल रहा था। मामले में कोर्ट के फैसले से जमीन पर सरकार का अधिकार एक बार फिर स्थापित कर दिया। अपील को किया निरस्त कोर्ट ने इस मामले को लेकर सरकार के खिलाफ वर्ष 2007 से चल रही अपील निरस्त कर दी। मंदिर परिसर स्थित जमीन का विवाद दो दशकों से अधिक समय से लंबित था। वर्ष 1997 में कुछ लोगों ने महत्वपूर्ण तथ्यों को छुपाकर और फर्जी आधार पर इस जमीन के संबंध में एक डिक्री प्राप्त कर ली थी। इस डिक्री पर सवाल उठे और जिला न्यायालय में वाद प्रस्तुत हुआ। जिसके बाद आगर अपर जिला न्यायाधीश ने 14 मार्च 2007 को विस्तृत साक्ष्यों के आधार पर उक्त डिक्री को अवैध व शून्य घोषित कर दिया था।
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जिला न्यायालय के इस फैसले के खिलाफ प्रथम अपील दायर हुई जिसे कोर्ट ने निरस्त कर दिया। विधिक रूप से टिकाऊ नहीं डिक्री कोर्ट ने कहा है कि वर्ष 1997 में प्राप्त डिक्री धोखे से और दस्तावेजों को छुपाकर प्राप्त की गई थी। यह विधिक रूप से टिकाऊ नहीं है। कोर्ट ने यह भी देखा कि प्रस्तुत वसीयतनामा संदेहास्पद था और मूल राजस्व अभिलेख मंदिर/मठ की पारंपरिक गुरु-चेले प्रणाली की पुष्टि करते थे।
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महाधिवक्ता ने मजबूती से रखा शासन का पक्ष
मामले में शासन की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता आनंद सोनी ने अंतिम बहस की। उन्होंने कोर्ट के समक्ष राजस्व अभिलेख, ओकाफ समिति के मूल रिकार्ड, मंदिर की ऐतिहासिक संरचना, पूर्व के न्यायालयीन निर्णय तथा फर्जी दस्तावेज़ों के पूरे क्रम को स्पष्टता से रखा। अदालत ने माना कि धोखाधड़ी के माध्यम से उक्त भूमि पर गलत तरीके से दावा स्थापित करने की कोशिश की गई थी। हाई कोर्ट द्वारा सरकार के पक्ष में अपील निरस्त करने से मंदिर की भूमि सुरक्षित हो गई। देर रात तक चली जेसीबी, हटाया अतिक्रमण फैसला आने के बाद शुक्रवार रात को पुलिस और प्रशासन की टीम ने विभिन्न विभागों के दल के साथ मंदिर की भूमि पर से अतिक्रमण हटाया मौके पर एसडीएम सर्वेश यादव नलखेड़ा एसडीओपी देव नारायण यादव सीएमओ मनोज नामदेव नलखेड़ा सुसनेर पुलिस बल अन्य विभागों की टीम के साथ पहुंचे। जेसीबी की मदद से अतिक्रमण हटाया गया। रात में की गई कार्रवाई से अतिक्रमणकर्ताओ में हड़कंप की स्थिति रही। मामले में मौके पर मौजूद अधिकारियों ने कोई भी जानकारी देने से इंकार किया।

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