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Shivratri 2026: जिसने संवारा मंदिर, उसकी छठी पीढ़ी विदेश से आकर करेगी पूजन, अफगान युद्ध से रहा खास नाता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगर मालवा
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Sat, 14 Feb 2026 04:31 AM IST
सार
आगर मालवा के बाबा बैजनाथ मंदिर से जुड़े कर्नल मार्टिन परिवार की छठी पीढ़ी की सदस्य शांति मैक्लोवर ऑस्ट्रेलिया से महाशिवरात्रि पर आ रही हैं। शोध से मंदिर के जीर्णोद्धार का ऐतिहासिक संबंध प्रमाणित हुआ। उनका आगमन आस्था, इतिहास और सांस्कृतिक जुड़ाव का प्रतीक माना जा रहा है।
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आगर वाले बैजनाथ महादेव की खास कहानी
- फोटो : अमर उजाला
इस वर्ष महाशिवरात्रि का पर्व आगर के लिए केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि ऐतिहासिक पुनर्स्मरण का अवसर बन गया है। आगर के प्रसिद्ध बाबा बैजनाथ मंदिर से जुड़े कर्नल मार्टिन के परिवार की छठी पीढ़ी की सदस्य शांति मैक्लोवर 14 फरवरी को ऑस्ट्रेलिया से आगर पहुंचेंगी और 15 फरवरी से प्रारंभ हो रहे मंदिर के महाशिवरात्रि कार्यक्रमों में शामिल होंगी। इस मंदिर का जीर्णोद्धार कर्नल मार्टिन व उनकी पत्नी ने 1887 में कराया था। अफगान युद्ध में एक त्रिशूलधारी योगी के चमत्कार से प्रभावित होकर उन्होंने यह कार्य किया था।
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आगर वाले बैजनाथ महादेव
- फोटो : अमर उजाला
इतिहास और आस्था का अद्भुत संगम
जनश्रुतियों और ऐतिहासिक संदर्भों में आगर के बाबा बैजनाथ मंदिर का संबंध कर्नल मार्टिन से जोड़ा जाता रहा है। समय के साथ यह कथा स्मृतियों में सिमटती चली गई थी, लेकिन अब परिवार के वंशजों के आगमन से उस इतिहास को नया आधार मिल रहा है। शांति मैक्लोवर का महाशिवरात्रि पर्व में शामिल होना, इस बात का प्रतीक होगा कि इतिहास भले ही समय की धूल में दब जाए, पर उसकी जड़ें कभी समाप्त नहीं होतीं।
15 फरवरी से महाशिवरात्रि पर्व की शुरुआत
महाशिवरात्रि पर्व को लेकर बैजनाथ मंदिर परिसर में व्यापक तैयारियां की जा रही हैं। प्रातःकाल बाबा बैजनाथ का विशेष पूजन, रुद्राभिषेक और धार्मिक अनुष्ठान आयोजित होंगे। सुबह 7 बजे तक श्रद्धालुओं को गर्भगृह में प्रवेश कर दर्शन की अनुमति रहेगी, इसके बाद बाहर से दर्शन की व्यवस्था की जाएगी।
ये भी पढ़ें- रात 3:30 बजे अन्नपूर्णा मंडप में बागेश्वर महाराज, खुद संभाली भट्टी, तैयार कराईं प्रसादी की पूरियां
जनश्रुतियों और ऐतिहासिक संदर्भों में आगर के बाबा बैजनाथ मंदिर का संबंध कर्नल मार्टिन से जोड़ा जाता रहा है। समय के साथ यह कथा स्मृतियों में सिमटती चली गई थी, लेकिन अब परिवार के वंशजों के आगमन से उस इतिहास को नया आधार मिल रहा है। शांति मैक्लोवर का महाशिवरात्रि पर्व में शामिल होना, इस बात का प्रतीक होगा कि इतिहास भले ही समय की धूल में दब जाए, पर उसकी जड़ें कभी समाप्त नहीं होतीं।
15 फरवरी से महाशिवरात्रि पर्व की शुरुआत
महाशिवरात्रि पर्व को लेकर बैजनाथ मंदिर परिसर में व्यापक तैयारियां की जा रही हैं। प्रातःकाल बाबा बैजनाथ का विशेष पूजन, रुद्राभिषेक और धार्मिक अनुष्ठान आयोजित होंगे। सुबह 7 बजे तक श्रद्धालुओं को गर्भगृह में प्रवेश कर दर्शन की अनुमति रहेगी, इसके बाद बाहर से दर्शन की व्यवस्था की जाएगी।
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इस बार शिवरात्रि पर ऑश्ट्रेलिया से आकर पूजन करेंगे शांति मैक्लोवर
- फोटो : अमर उजाला
ऐतिहासिक शिव मंदिर है बैजनाथ धाम
आगर मालवा जिले के सुसनेर रोड नेशनल हाईवे-के किनारे बाणगंगा नदी के पास स्थित यह प्राचीन शिव मंदिर है। यह आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है। मूल रूप से यह मदिर 16वीं-17वीं शताब्दी में बनाया गया था।
त्रिशूल वाले योगी ने कर्नल मार्टिन को बचाया था
1879 के आसपास अंग्रेज सेना के लेफ्टिनेंट कर्नल सी. मार्टिन आगर-मालवा क्षेत्र में तैनात थे। उनकी पत्नी भी यहीं रहती थीं। बाद में कर्नल मार्टिन को अफगानिस्तान के युद्ध में भेजा गया था। लंबे समय तक उनकी पत्नी को उनसे कोई पत्र नहीं मिला, जिससे वह बहुत चिंतित हो गईं। एक बार वह अपने घोड़े पर सवार होकर जा रही थीं और रास्ते में बाबा बैजनाथ महादेव मंदिर के पास रुकीं। वहां पूजा-पाठ और मंत्रों की ध्वनि ने उन्हें आकर्षित किया। मंदिर के पुजारियों ने उनसे ओम नमः शिवाय मंत्र का 11 दिनों तक जाप करने का आग्रह किया और शिव की भक्ति करने को कहा। उनकी विनती और भक्ति के बाद कुछ हफ्तों में ही कर्नल मार्टिन का पत्र आया, जिसमें उन्होंने अपने सुरक्षित लौटने की सूचना दी। पत्र में मार्टिन ने बताया कि युद्ध के बीच एक धारीदार त्रिशूल वाले योगी ने अफगानों को पीछे हटने पर मजबूर किया और उन्हें बचाया। इस चमत्कारिक अनुभव के बाद कर्नल मार्टिन और उनकी पत्नी दोनों भगवान शिव के भक्त बन गए। उन्होंने 1883 में बाबा बैजनाथ महादेव मंदिर का जीर्णोद्धार किया। कहा जाता है कि यह भारत का एकमात्र शिव मंदिर है, जिसे ब्रिटिश अधिकारी ने पुनः बनवाया। मंदिर में इसी योगदान की जानकारी एक शिलालेख पर अंकित है।
आगर मालवा जिले के सुसनेर रोड नेशनल हाईवे-के किनारे बाणगंगा नदी के पास स्थित यह प्राचीन शिव मंदिर है। यह आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है। मूल रूप से यह मदिर 16वीं-17वीं शताब्दी में बनाया गया था।
त्रिशूल वाले योगी ने कर्नल मार्टिन को बचाया था
1879 के आसपास अंग्रेज सेना के लेफ्टिनेंट कर्नल सी. मार्टिन आगर-मालवा क्षेत्र में तैनात थे। उनकी पत्नी भी यहीं रहती थीं। बाद में कर्नल मार्टिन को अफगानिस्तान के युद्ध में भेजा गया था। लंबे समय तक उनकी पत्नी को उनसे कोई पत्र नहीं मिला, जिससे वह बहुत चिंतित हो गईं। एक बार वह अपने घोड़े पर सवार होकर जा रही थीं और रास्ते में बाबा बैजनाथ महादेव मंदिर के पास रुकीं। वहां पूजा-पाठ और मंत्रों की ध्वनि ने उन्हें आकर्षित किया। मंदिर के पुजारियों ने उनसे ओम नमः शिवाय मंत्र का 11 दिनों तक जाप करने का आग्रह किया और शिव की भक्ति करने को कहा। उनकी विनती और भक्ति के बाद कुछ हफ्तों में ही कर्नल मार्टिन का पत्र आया, जिसमें उन्होंने अपने सुरक्षित लौटने की सूचना दी। पत्र में मार्टिन ने बताया कि युद्ध के बीच एक धारीदार त्रिशूल वाले योगी ने अफगानों को पीछे हटने पर मजबूर किया और उन्हें बचाया। इस चमत्कारिक अनुभव के बाद कर्नल मार्टिन और उनकी पत्नी दोनों भगवान शिव के भक्त बन गए। उन्होंने 1883 में बाबा बैजनाथ महादेव मंदिर का जीर्णोद्धार किया। कहा जाता है कि यह भारत का एकमात्र शिव मंदिर है, जिसे ब्रिटिश अधिकारी ने पुनः बनवाया। मंदिर में इसी योगदान की जानकारी एक शिलालेख पर अंकित है।

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