Ashoknagar News: अशोकनगर में जमीन विवाद ने पकड़ा तूल, न्याय की आस में 100 फीट ऊंचे टावर पर चढ़े दो आदिवासी
अशोकनगर के मन्हेंटी गांव में जमीन सीमांकन से नाराज दो आदिवासी ग्रामीण 100 फीट ऊंचे मोबाइल टावर पर चढ़ गए। निष्पक्ष सीमांकन की मांग करते हुए उन्होंने आत्महत्या की चेतावनी दी। प्रशासन के दोबारा सीमांकन के आश्वासन के बाद करीब चार घंटे बाद दोनों सुरक्षित नीचे उतर आए।
अशोकनगर के मन्हेंटी गांव में जमीन सीमांकन से नाराज दो आदिवासी ग्रामीण 100 फीट ऊंचे मोबाइल टावर पर चढ़ गए। निष्पक्ष सीमांकन की मांग करते हुए उन्होंने आत्महत्या की चेतावनी दी। प्रशासन के दोबारा सीमांकन के आश्वासन के बाद करीब चार घंटे बाद दोनों सुरक्षित नीचे उतर आए।
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जमीन का एक टुकड़ा जब जीवन और मरण का सवाल बन जाए, तो इंसान क्या नहीं करता। अशोकनगर जिले की ईसागढ़ तहसील के मन्हेंटी गांव में कुछ ऐसा ही नजारा दिखा, जब सीमांकन से नाराज दो आदिवासी ग्रामीण न्याय की आस में 100 फीट ऊंचे मोबाइल टावर पर जा चढ़े। करीब चार घंटे तक विरोध चलता रहा।
घटना रविवार सुबह की है। मन्हेंटी गांव के संग्राम आदिवासी और फूलसिंह आदिवासी अचानक गांव के पास लगे मोबाइल टावर पर चढ़ गए। ऊपर पहुंचते ही उन्होंने मोबाइल से गांव में सूचना दी कि जब तक जमीन का निष्पक्ष सीमांकन नहीं होगा, वे नीचे नहीं उतरेंगे। इतना ही नहीं, उन्होंने चेतावनी भी दे डाली कि न्याय न मिला तो टावर से कूदकर जान दे देंगे। देखते ही देखते टावर के नीचे ग्रामीणों की भीड़ जमा हो गई। सूचना मिलते ही ईसागढ़ एसडीएम, तहसीलदार और थाना प्रभारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे।
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टावर पर चढ़े संग्राम आदिवासी का आरोप है कि पीढ़ियों से वह 45 बीघा जमीन जोत रहे थे, लेकिन सीमांकन में उन्हें सिर्फ 8 बीघा उपजाऊ जमीन दी गई। बाकी जमीन ऊबड़-खाबड़ और पथरीली है जिस पर खेती असंभव है। वहीं फूलसिंह आदिवासी ने बताया कि उनकी 5 बीघा जमीन के बदले आधा बीघा टुकड़ा थमा दिया गया।आदिवासी नेता रणवीर आदिवासी ने प्रशासन पर पक्षपात का आरोप लगाया। उनका कहना है, जिन जमीनों पर आदिवासी वर्षों से हल चला रहे थे, उन्हें हटाकर बंजर जमीन दे दी गई। यह आदिवासियों के साथ अन्याय है।
पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने लाउडस्पीकर से लगातार समझाइश दी। एसडीएम ने नीचे से ही आश्वासन दिया कि राजस्व टीम दोबारा मौके पर जाकर निष्पक्ष सीमांकन करेगी। करीब 4 घंटे की मशक्कत के बाद दोनों ग्रामीण टावर से नीचे उतरे। नीचे उतरते ही उन्हें पानी पिलाया गया और मेडिकल जांच के लिए अस्पताल भेजा गया। वहीं प्रशासन का कहना है कि नियमानुसार सीमांकन कर दोनों किसानों को उनकी पात्रतानुसार भूमि का कब्जा सौंपा जा चुका है। अधिकारियों के मुताबिक टावर पर चढ़े ग्रामीण अतिरिक्त जमीन की मांग कर रहे हैं, जो राजस्व रिकॉर्ड के हिसाब से संभव नहीं है। फिर भी तनाव को देखते हुए प्रशासन ने दोबारा सीमांकन कराने पर सहमति जताई है।
