MP News: फोर्टिफाइड चावल घोटाले की जांच में बड़ा एक्शन, 17 ट्रक जब्त; 50 से ज्यादा लोगों से पूछताछ
सरकारी फोर्टिफाइड चावल के कथित दुरुपयोग मामले में जांच तेज हो गई है। अब तक 17 ट्रक जब्त, 50 से अधिक लोगों से पूछताछ और 13 से ज्यादा लोग नामजद किए गए हैं। जांच एजेंसियां आर्थिक लेनदेन, परिवहन और पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़कर प्रभावशाली लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही हैं।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
सरकारी फोर्टिफाइड चावल के कथित दुरुपयोग से जुड़े बहुचर्चित मामले में जांच लगातार गहराती जा रही है। अब तक 17 ट्रकों को जब्त किया जा चुका है। 50 से अधिक लोगों से पूछताछ की जा चुकी है, जबकि 13 से ज्यादा लोगों को नामजद किया गया है। जांच एजेंसियां अब इस पूरे नेटवर्क की परतें खोलने में जुटी हैं।अधिकारियों का कहना है कि शुरुआती जांच में कई ऐसे प्रभावशाली लोगों के नाम सामने आए हैं, जिनकी भूमिका की गंभीरता से जांच की जा रही है। परिवहन, राइस मिल, एथेनॉल प्लांट और आर्थिक लेनदेन की कड़ियों को जोड़कर पूरे नेटवर्क की पड़ताल की जा रही है।
यह मामला उस समय सुर्खियों में आया, जब सरकारी फोर्टिफाइड चावल को एथेनॉल उत्पादन के लिए आवंटित किए जाने के बाद उसके कथित तौर पर निजी राइस मिलों तक पहुंचने का खुलासा हुआ। आरोप है कि सरकारी योजना के तहत निर्धारित दर पर मिलने वाले चावल को बाजार में अधिक कीमत पर बेचकर करोड़ों रुपये का अवैध मुनाफा कमाया जा रहा था।
ऐसे चलता था पूरा खेल
जांच एजेंसियों के अनुसार, भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) से एथेनॉल उत्पादन के लिए करीब 2320 रुपये प्रति क्विंटल की दर से फोर्टिफाइड चावल आवंटित किया जाता था। आरोप है कि यह चावल निर्धारित उद्योग तक पहुंचने के बजाय निजी राइस मिलों और कारोबारियों के माध्यम से लगभग 2800 रुपये प्रति क्विंटल तक बेचा जा रहा था। प्रति क्विंटल मिलने वाले इस अतिरिक्त लाभ को पूरे नेटवर्क में अलग-अलग स्तर पर बांटा जाता था। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि इस प्रक्रिया में परिवहन, भंडारण और खरीद-बिक्री से जुड़े कई लोग शामिल हो सकते हैं।
ये भी पढ़ें-एथेनॉल चावल विवाद: मंत्री राजपूत की दो टूक- एफसीआई की हेराफेरी में राज्य सरकार की कोई भूमिका नहीं
तीन जून को खुली थी पूरे मामले की परत
मामले की शुरुआत 3 जून को हुई, जब वारासिवनी क्षेत्र में संचेती राइस मिल के पास सरकारी फोर्टिफाइड चावल से भरा एक ट्रक पकड़ा गया। जांच में पता चला कि यह चावल बालाघाट स्थित एफसीआई गोदाम से छिंदवाड़ा जिले के बोरगांव स्थित एवीजे एग्रिको प्राइवेट लिमिटेड के एथेनॉल प्लांट के लिए जारी किया गया था। लेकिन निर्धारित स्थान तक पहुंचने के बजाय यह राइस मिल परिसर में मिला। इसके बाद प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए विस्तृत जांच शुरू की।
अब तक 17 ट्रक जब्त, लगातार बढ़ रही जांच
जांच आगे बढ़ने के साथ अलग-अलग स्थानों से सरकारी चावल से जुड़े 17 ट्रक जब्त किए जा चुके हैं। इन ट्रकों के दस्तावेज, परिवहन मार्ग और संबंधित कारोबारियों की भूमिका की जांच की जा रही है। अधिकारियों ने 50 से अधिक लोगों से पूछताछ की है, जिनमें ट्रांसपोर्टर, राइस मिल संचालक, कर्मचारी, एजेंट और अन्य संबंधित लोग शामिल हैं। 13 से अधिक लोगों को नामजद किया गया है और कई अन्य संदिग्धों से पूछताछ जारी है।
मंत्री बोले- प्रथम दृष्टया व्यपवर्तन की पुष्टि
खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा कि कलेक्टर की जांच रिपोर्ट में प्रथम दृष्टया चावल के व्यपवर्तन की पुष्टि हुई है। जांच में एवीजे एग्रिको प्राइवेट लिमिटेड, बोरगांव को एथेनॉल उत्पादन के लिए आवंटित 242.55 क्विंटल (490 बोरी) फोर्टिफाइड चावल संचेती राइस मिल परिसर में पाया गया। इसके बाद एवीजे एग्रिको के अधिकृत प्रतिनिधि और संचेती राइस मिल संचालक के खिलाफ वारासिवनी थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई है।
उन्होंने कहा कि शुरुआती जांच में एथेनॉल निर्माता कंपनी और राइस मिल संचालक की भूमिका सामने आई है। सरकार पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करा रही है और दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति या संस्था को बख्शा नहीं जाएगा।
केंद्र सरकार को भेजा गया पत्र
मंत्री ने बताया कि भविष्य में इस तरह की गड़बड़ियां रोकने के लिए केंद्रीय खाद्य मंत्री को पत्र लिखकर व्यवस्था को और पारदर्शी बनाने का आग्रह किया गया है। उन्होंने कहा कि यदि नीति या निगरानी व्यवस्था में किसी प्रकार की कमी है तो उसे दूर करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
एफसीआई ने दिल्ली भेजी अपनी रिपोर्ट
दूसरी ओर भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) ने अपनी आंतरिक जांच रिपोर्ट दिल्ली मुख्यालय भेज दी है। एफसीआई का कहना है कि एथेनॉल उत्पादन के लिए चावल का आवंटन निर्धारित नीति के अनुसार किया गया था और आवंटन प्रक्रिया में किसी प्रकार का उल्लंघन नहीं पाया गया। हालांकि, आवंटन के बाद चावल का उपयोग निर्धारित उद्देश्य के अनुरूप हुआ या नहीं, इसकी जांच राज्य सरकार और संबंधित एजेंसियां कर रही हैं।
आर्थिक लेनदेन और नेटवर्क की भी जांच
सूत्रों के अनुसार जांच एजेंसियां अब केवल चावल की आवाजाही तक सीमित नहीं हैं, बल्कि बैंक खातों, भुगतान के रिकॉर्ड, मोबाइल कॉल डिटेल, परिवहन दस्तावेज और कारोबारी लेनदेन की भी जांच कर रही हैं। यह पता लगाया जा रहा है कि सरकारी चावल किस-किस स्तर से होकर गुजरा और इससे किसे कितना आर्थिक लाभ मिला। कई प्रभावशाली लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
और बढ़ सकती है कार्रवाई
जांच अधिकारियों का कहना है कि जैसे-जैसे दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों की जांच पूरी होगी, वैसे-वैसे नए नाम सामने आ सकते हैं। आने वाले दिनों में इस मामले में और एफआईआर दर्ज होने, गिरफ्तारियां होने तथा कई अन्य ट्रकों और गोदामों की जांच किए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है। फिलहाल जांच एजेंसियां पूरे नेटवर्क को खंगालने में जुटी हैं और मामले को प्रदेश के बड़े आर्थिक अनियमितताओं में से एक मानकर जांच आगे बढ़ाई जा रही है।
