BSF भर्ती में फर्जीवाड़ा: बालाघाट का फर्जी निवासी बनकर नौकरी पाने की साजिश, 10 अभ्यर्थियों के दस्तावेज फर्जी
बालाघाट में बीएसएफ भर्ती के लिए फर्जी निवास, जाति और ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र बनाकर बाहरी युवकों के आवेदन का खुलासा हुआ है। जांच में 10 अभ्यर्थियों के दस्तावेज फर्जी मिले हैं। प्रशासन संगठित रैकेट और दस्तावेज बनाने में शामिल लोगों की भूमिका की जांच कर कानूनी कार्रवाई की तैयारी कर रहा है।
बालाघाट में बीएसएफ भर्ती के लिए फर्जी निवास, जाति और ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र बनाकर बाहरी युवकों के आवेदन का खुलासा हुआ है। जांच में 10 अभ्यर्थियों के दस्तावेज फर्जी मिले हैं। प्रशासन संगठित रैकेट और दस्तावेज बनाने में शामिल लोगों की भूमिका की जांच कर कानूनी कार्रवाई की तैयारी कर रहा है।
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सीमा सुरक्षा बल (BSF) की भर्ती प्रक्रिया में सरकारी दस्तावेजों के जरिए बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। नौकरी हासिल करने के लिए बाहरी राज्यों और दूसरे जिलों के युवकों ने बालाघाट जिले का फर्जी निवासी बनकर आवेदन किया। इसके लिए निवास, जाति और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के प्रमाण पत्र तैयार कराए गए। जब बीएसएफ और जिला प्रशासन ने दस्तावेजों का सत्यापन कराया तो 10 अभ्यर्थियों के प्रमाण पत्र पूरी तरह फर्जी निकले। मामले के सामने आते ही प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया है। एसडीएम कार्यालय से इसकी जांच की जा रही है।
इस पूरे मामले की शुरुआत पूर्व भाजयुमो जिलाध्यक्ष एवं नगर पालिका के मनोनीत पार्षद गजेंद्र भारद्वाज की शिकायत से हुई। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि बालाघाट जिले के नाम पर बड़ी संख्या में फर्जी दस्तावेज बनाकर बाहरी लोगों को भर्ती का लाभ दिलाने की कोशिश की जा रही है। शिकायत के बाद प्रशासन ने दस्तावेजों की जांच शुरू की, जिसमें 18 से 20 संदिग्ध आवेदन सामने आए। शुरुआती जांच में 10 आवेदकों की धोखाधड़ी की पुष्टि हो चुकी है, जबकि शेष मामलों की जांच अभी जारी है।
बीएसएफ अधिकारियों ने घर-घर जाकर कराया सत्यापन
मामले की गंभीरता को देखते हुए बीएसएफ के अधिकारी स्वयं बालाघाट पहुंचे। एसडीएम गोपाल सोनी की मौजूदगी में दस्तावेजों में दर्ज पतों का भौतिक सत्यापन कराया गया। अधिकारियों ने संबंधित मकानों तक पहुंचकर मकान मालिकों और आसपास के लोगों से पूछताछ की। जांच में पता चला कि बालाघाट तहसील के छह और किरनापुर के चार अभ्यर्थियों के निवास, जाति और ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र पूरी तरह फर्जी हैं। ये दस्तावेज बालाघाट, किरनापुर, लालबर्रा, लांजी और वारासिवनी तहसीलों के पते पर बनाए गए थे। फिलहाल बालाघाट और किरनापुर के मामलों में फर्जीवाड़े की पुष्टि हो चुकी है, जबकि अन्य तहसीलों से जुड़े दस्तावेजों की जांच जारी है।
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स्थानीय पहचान बनाने के लिए वोटर आईडी तक तैयार कराए
जांच में सामने आया कि फर्जीवाड़ा केवल प्रमाण पत्रों तक सीमित नहीं था। आरोपियों ने बालाघाट का स्थानीय निवासी साबित होने के लिए वोटर आईडी कार्ड, पहचान पत्र और अन्य दस्तावेज भी बनवा लिए थे। इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि पूरा काम किसी संगठित गिरोह की मदद से किया गया, जिसने सरकारी दस्तावेज तैयार कराने से लेकर पहचान स्थापित करने तक का पूरा इंतजाम किया।
सूत्रों के अनुसार, जिन अभ्यर्थियों के दस्तावेज फर्जी पाए गए हैं, उनमें अधिकांश के नाम के आगे सरनेम तक दर्ज नहीं था। प्रारंभिक जांच में आशंका जताई जा रही है कि ये अभ्यर्थी उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश के भिंड जिले के रहने वाले हो सकते हैं। हालांकि प्रशासन ने अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
जांच की भनक लगते ही सक्रिय हुआ गिरोह
सूत्रों के मुताबिक, मंगलवार को जैसे ही बीएसएफ की जांच टीम बालाघाट पहुंची, पूरे फर्जीवाड़े से जुड़े लोगों में अफरा-तफरी मच गई। आरोप है कि सिंडिकेट के सदस्यों ने तत्काल उन मकान मालिकों और स्थानीय लोगों से संपर्क किया, जिनके पते दस्तावेजों में दर्ज थे। उन्हें पैसों का लालच देकर यह बयान देने के लिए कहा गया कि संबंधित अभ्यर्थी वर्षों से उनके यहां रह रहे हैं। लेकिन जब बीएसएफ अधिकारियों ने अलग-अलग लोगों से स्वतंत्र रूप से पूछताछ की तो किसी ने भी उन अभ्यर्थियों को पहचानने से इनकार कर दिया। स्थानीय लोगों के इन बयानों के बाद फर्जीवाड़े की परतें खुलती चली गईं।
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आरक्षण और विशेष छूट का उठाना चाहते थे फायदा
सूत्रों के अनुसार, सुरक्षाबलों की भर्ती में बालाघाट, मंडला और डिंडौरी जैसे विशेष एवं आदिवासी जिलों के अभ्यर्थियों को कुछ नियमों में छूट और विशेष लाभ मिलता है। इसी व्यवस्था का फायदा उठाने के लिए बाहरी राज्यों और दूसरे जिलों के युवकों ने कथित सिंडिकेट से संपर्क किया और बालाघाट का फर्जी निवासी बनकर भर्ती प्रक्रिया में शामिल होने की कोशिश की।
अब फर्जी दस्तावेज बनाने वालों तक पहुंचेगी जांच
प्रशासन अब केवल फर्जी अभ्यर्थियों की भूमिका ही नहीं, बल्कि उन लोगों की भी जांच करेगा जिन्होंने निवास, जाति और ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र तैयार किए। यह पता लगाया जा रहा है कि दस्तावेज बनाने में किस स्तर पर लापरवाही या मिलीभगत हुई और किन लोगों ने सरकारी रिकॉर्ड का दुरुपयोग किया। यदि जांच में किसी सरकारी कर्मचारी, लोकसेवा केंद्र संचालक, एजेंट या अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ भी आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जा सकता है।
एफआईआर के बाद खुल सकता है बड़ा नेटवर्क
फिलहाल बीएसएफ ने स्थानीय पुलिस में औपचारिक एफआईआर दर्ज नहीं कराई है। प्रशासन का कहना है कि जांच पूरी होने और बीएसएफ की ओर से शिकायत मिलने के बाद कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ाई जाएगी। अधिकारियों का मानना है कि यह मामला केवल 10 फर्जी अभ्यर्थियों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे सरकारी दस्तावेजों का बड़ा रैकेट सक्रिय हो सकता है। जिले में सामने आए इस मामले ने भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता के साथ-साथ सरकारी दस्तावेजों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच पूरी होने के बाद इस फर्जीवाड़े में कई और लोगों के नाम सामने आने की संभावना जताई जा रही है।
