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बालाघाट में निर्माणाधीन भवन में बड़ा हादसा: बेसमेंट से सटी दीवार गिरी, मलबे में दबे तीन मजदूर; दो की हालत खराब
Wed, 01 Jul 2026 09:45 PM IST
बालाघाट ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बालाघाट
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बालाघाट
Published by: बालाघाट ब्यूरो
Updated Wed, 01 Jul 2026 09:45 PM IST
सार
बालाघाट के रामनगर में निर्माणाधीन भवन के बेसमेंट में पास की दीवार गिरने से तीन मजदूर मलबे में दब गए। स्थानीय लोगों और पुलिस ने रेस्क्यू कर सभी को बाहर निकाला। दो मजदूरों की गंभीर हालत के कारण उन्हें हायर सेंटर रेफर किया गया। हादसे के कारणों और सुरक्षा मानकों की जांच जारी है।
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घायल मजदूर
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विस्तार
बालाघाट शहर के रामनगर क्षेत्र में बुधवार शाम निर्माणाधीन भवन में काम के दौरान बड़ा हादसा हो गया। बेसमेंट निर्माण के दौरान पास के मकान की दीवार अचानक भरभराकर गिर गई, जिससे नीचे काम कर रहे तीन मजदूर मलबे में दब गए। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई।
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आसपास के लोग दौड़कर पहुंचे और पुलिस के साथ मिलकर तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। करीब पांच फीट गहरे बेसमेंट में फंसे मजदूरों को कड़ी मशक्कत के बाद बाहर निकाला गया। तीनों को जिला अस्पताल पहुंचाया गया, जहां से दो मजदूरों की गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें हायर सेंटर रेफर कर दिया गया।
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घटना बुधवार शाम करीब 5:30 बजे रामनगर स्थित स्टेट बैंक के पीछे व्यापारी हर्षित पगारिया के निर्माणाधीन भवन में हुई। यहां बेसमेंट की दीवार का निर्माण कार्य चल रहा था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार मजदूर बेसमेंट में काम कर रहे थे, तभी निर्माण स्थल से सटी एक पुरानी दीवार अचानक भरभराकर ढह गई। दीवार के साथ बड़ी मात्रा में मिट्टी और मलबा सीधे बेसमेंट में जा गिरा, जिससे वहां मौजूद तीनों मजदूर दब गए।हादसे में नवेगांव नैतरा निवासी निलेश पिता धनलाल नगपुरे (23), चैतराम पिता सोंधड़ सौलखे (35) तथा हट्टा के तिलपेवाड़ा निवासी मानिक पिता उमेन्द्र मचाड़े (48) घायल हुए हैं।
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चीख-पुकार सुनकर दौड़े लोग, शुरू किया रेस्क्यू
दीवार गिरते ही आसपास के क्षेत्र में तेज धमाके जैसी आवाज गूंज गई। मौके पर मौजूद लोगों ने तुरंत मजदूरों की चीख-पुकार सुनी और बिना देर किए निर्माण स्थल की ओर दौड़ पड़े। किसी ने पुलिस को सूचना दी तो कई लोग खुद ही मलबा हटाने में जुट गए। कुछ ही देर में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौके पर पहुंच गए और राहत कार्य शुरू कर दिया।
एक मजदूर का सिर्फ चेहरा दिख रहा था
सूचना मिलते ही सीएसपी मयंक तिवारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। शुरुआती प्रयास में दो मजदूरों को बाहर निकाल लिया गया, लेकिन तीसरा मजदूर मानिक मचाड़े पूरी तरह मिट्टी में दब चुका था। उसका केवल चेहरा दिखाई दे रहा था। ऐसे में रेस्क्यू टीम ने बेहद सावधानी से हाथों और फावड़ों की मदद से मिट्टी हटाई, ताकि किसी तरह का और नुकसान न हो।
पांच फीट गहरे बेसमेंट से पीठ पर उठाकर निकाला
करीब पांच फीट गहरे बेसमेंट में उतरकर पुलिसकर्मियों और स्थानीय युवाओं ने लगातार मशक्कत की। जब मानिक को बाहर निकालने का रास्ता बना तो सीएसपी के चालक पुलिसकर्मी राजू गौतम और स्थानीय युवक सुमित मंगलानी ने उसे अपनी पीठ पर उठाया और सीढ़ियों के सहारे ऊपर लेकर आए। इसके बाद एंबुलेंस से तत्काल जिला अस्पताल भेजा गया।
जिला अस्पताल में प्राथमिक उपचार, दो को किया रेफर
तीनों घायलों को जिला अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने तत्काल उपचार शुरू किया। जांच के बाद मानिक मचाड़े और चैतराम सौलखे की हालत गंभीर पाई गई। दोनों को बेहतर इलाज के लिए हायर सेंटर रेफर कर दिया गया। वहीं निलेश नगपुरे का इलाज जिला अस्पताल में जारी है और उसकी हालत फिलहाल खतरे से बाहर बताई जा रही है।
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युवक बोला- चेहरा दिख रहा था, शरीर पूरा मलबे में दबा था
रेस्क्यू में शामिल स्थानीय युवक सुमित मंगलानी ने बताया कि उनकी दुकान घटनास्थल के पास है। सूचना मिलते ही वे तुरंत वहां पहुंचे। उन्होंने देखा कि एक मजदूर पूरी तरह मलबे में दबा हुआ था और केवल उसका चेहरा दिखाई दे रहा था। इसके बाद उन्होंने अन्य लोगों के साथ मिलकर हाथों और फावड़ों से मिट्टी हटाई। काफी देर की मशक्कत के बाद मजदूर को सुरक्षित बाहर निकाला गया और अस्पताल पहुंचाया गया।
हादसे के कारणों की होगी जांच
प्रारंभिक तौर पर माना जा रहा है कि बेसमेंट की खुदाई के कारण पास की दीवार कमजोर हो गई थी, जिसके चलते वह अचानक ढह गई। हालांकि हादसे के वास्तविक कारणों का पता जांच के बाद ही चल सकेगा। पुलिस ने पूरे घटनाक्रम की जानकारी जुटानी शुरू कर दी है। वहीं निर्माण कार्य में सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं, इसकी भी जांच की जाएगी।
