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MP: जादू-टोने के लिए भालू का शिकार, नाले में फैलाया करंट; 18 साल बाद कोर्ट ने चार दोषियों को सजा सुनाई
Wed, 19 Aug 2026 03:01 PM IST
हिमांशु सिंह बघेल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बैतूल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बैतूल
Published by: हिमांशु सिंह बघेल
Updated Wed, 19 Aug 2026 03:01 PM IST
सार
बैतूल में 2008 के भालू शिकार मामले में अदालत ने चार आरोपियों को दोषी ठहराते हुए तीन-तीन वर्ष के सश्रम कारावास और 40-40 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। आरोपियों ने कथित तौर पर 'जादू' के उद्देश्य से नाले में जीआई तार और लकड़ी की खूंटी के जरिए बिजली का करंट फैलाकर भालू का शिकार किया था।
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बैतूल न्यायिक मजिस्ट्रेट
- फोटो : Social Media
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विस्तार
वन्यप्राणी भालू के शिकार के 18 वर्ष पुराने मामले में बैतूल के प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट सुरेश यादव की अदालत ने चार आरोपियों को दोषी ठहराते हुए तीन-तीन वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने प्रत्येक दोषी पर 40-40 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। सजा पाने वालों में झोली नंबर-2 निवासी प्रीतिश मंडल, बटकीडोह निवासी रमेन उर्फ चंकी बाईन और राहुल बंगाली तथा निश्चिंतपुर निवासी वासु गोलदार शामिल हैं।
बिजली का करंट फैलाकर किया था भालू का शिकार
वन विभाग की टीम ने 14 दिसंबर 2008 को सारणी सामान्य वन परिक्षेत्र की हीरापुर बीट के कक्ष क्रमांक आरएफ-289 में गश्त के दौरान सीमा रेखा के पास नाले में भालू का शव बरामद किया था। मृत भालू का एक पंजा कटा हुआ था और दूसरे पंजे के नाखून गायब थे। प्रथम दृष्टया शिकार का मामला सामने आने पर अज्ञात आरोपियों के विरुद्ध वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू की गई थी। जांच के दौरान डॉग स्क्वॉड और मुखबिर की सूचना के आधार पर वन विभाग ने चारों आरोपियों को पकड़ा। पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि उन्होंने 'जादू' के उद्देश्य से भालू को निशाना बनाया था। इसके लिए उन्होंने नाले में लकड़ी की खूंटी और जीआई तार के माध्यम से बिजली का करंट फैलाया था, जिसकी चपेट में आने से भालू की मौत हो गई थी।
जांच टीम ने बरामद किए थे भालू के बाल और नाखून
आरोपियों की निशानदेही पर वन विभाग ने घटनास्थल और आरोपियों के पास से जीआई तार, विद्युत तार, लकड़ी की खूंटी तथा भालू के नाखून और बाल बरामद किए थे। इसके बाद वैज्ञानिक जांच में जब्त किए गए अंगों के भालू के होने की प्रामाणिक पुष्टि हुई। मामले में शासन की ओर से अभियोजन अधिकारी अजीत सिंह और अभयदीप सिंह ठाकुर ने पैरवी की। इसमें वन अधिकारियों और कर्मचारियों की जांच तथा अभियोजन प्रक्रिया की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
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ये भी पढ़ें- अधिकारी भी हैरान: कलेक्ट्रेट में डॉगी मास्क पहनकर पहुंचा युवक, खंडवा नगर निगम पर बधियाकरण में घोटाले का आरोप
फरार आरोपी के खिलाफ फैसला फिलहाल रोका
मामले में शामिल एक अन्य सहअभियुक्त नूतनडंगा, घोड़ाडोंगरी निवासी कालू उर्फ सुभाष फिलहाल फरार है। उसके लगातार फरार रहने के कारण अदालत ने उसके विरुद्ध फिलहाल कोई निर्णय पारित नहीं किया है।
वन विभाग के अमले और अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों और तर्कों पर विचार करने के बाद अदालत ने शेष चारों दोषियों को तीन-तीन वर्ष के सश्रम कारावास और अर्थदंड से दंडित किया है।
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बिजली का करंट फैलाकर किया था भालू का शिकार
वन विभाग की टीम ने 14 दिसंबर 2008 को सारणी सामान्य वन परिक्षेत्र की हीरापुर बीट के कक्ष क्रमांक आरएफ-289 में गश्त के दौरान सीमा रेखा के पास नाले में भालू का शव बरामद किया था। मृत भालू का एक पंजा कटा हुआ था और दूसरे पंजे के नाखून गायब थे। प्रथम दृष्टया शिकार का मामला सामने आने पर अज्ञात आरोपियों के विरुद्ध वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू की गई थी। जांच के दौरान डॉग स्क्वॉड और मुखबिर की सूचना के आधार पर वन विभाग ने चारों आरोपियों को पकड़ा। पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि उन्होंने 'जादू' के उद्देश्य से भालू को निशाना बनाया था। इसके लिए उन्होंने नाले में लकड़ी की खूंटी और जीआई तार के माध्यम से बिजली का करंट फैलाया था, जिसकी चपेट में आने से भालू की मौत हो गई थी।
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जांच टीम ने बरामद किए थे भालू के बाल और नाखून
आरोपियों की निशानदेही पर वन विभाग ने घटनास्थल और आरोपियों के पास से जीआई तार, विद्युत तार, लकड़ी की खूंटी तथा भालू के नाखून और बाल बरामद किए थे। इसके बाद वैज्ञानिक जांच में जब्त किए गए अंगों के भालू के होने की प्रामाणिक पुष्टि हुई। मामले में शासन की ओर से अभियोजन अधिकारी अजीत सिंह और अभयदीप सिंह ठाकुर ने पैरवी की। इसमें वन अधिकारियों और कर्मचारियों की जांच तथा अभियोजन प्रक्रिया की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
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फरार आरोपी के खिलाफ फैसला फिलहाल रोका
मामले में शामिल एक अन्य सहअभियुक्त नूतनडंगा, घोड़ाडोंगरी निवासी कालू उर्फ सुभाष फिलहाल फरार है। उसके लगातार फरार रहने के कारण अदालत ने उसके विरुद्ध फिलहाल कोई निर्णय पारित नहीं किया है।
वन विभाग के अमले और अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों और तर्कों पर विचार करने के बाद अदालत ने शेष चारों दोषियों को तीन-तीन वर्ष के सश्रम कारावास और अर्थदंड से दंडित किया है।
